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अल्मोड़ा में बेरोजगार युवाओं ने खोला सरकार के खिलाफ मोर्चा
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बागेश्वर कलक्ट्रेट में भर्ती घोटाले की जांच सीबीआई से कराने की मांग को लेकर प्रदर्शन करते छात्र?
- फोटो : BAGESHWAR
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अल्मोड़ा/बागेश्वर। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) की स्नातक स्तरीय भर्ती घोटाले और अन्य भर्तियों में रोजाना हो रहे नए खुलासों से युवाओं में आक्रोश है। सोमवार को अल्मोड़ा और बागेश्वर में युवाओं ने प्रदर्शन कर मामले की सीबीआई जांच की मांग उठाई। अल्मोड़ा के चौघानपाटा स्थित गांधी पार्क और बागेश्वर डिग्री कॉलेज के छात्रों ने डीएम कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया।
अल्मोड़ा में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवा धरनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। युवाओं का कहना है की सरकार में हुई भर्ती परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और दोषियों को कड़ी सजा देने चाहती है तो इसकी सीबीआई जांच होनी चाहिए। आम आदमी पार्टी के आनंद बगडवाल और अखिलेश टम्टा तथा धर्मनिरपेक्ष युवा मंच के संयोजक विनय किरौला ने भी युवाओं को अपना समर्थन दिया है।
बागेश्वर में छात्र नेता मयंक चौबे के नेतृत्व में छात्रों ने कलक्ट्रेट परिसर में प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। डीएम के माध्यम से सीएम को ज्ञापन भेजकर विधानसभा सचिवालय में बैकडोर से हुई नियुक्तियों की भी जांच कराने की मांग की। छात्रों ने जल्द मांग नहीं सुने जाने पर दो सितंबर से डीएम कार्यालय के बाहर अनशन शुरू करने की चेतावनी दी है।
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छात्रों का कहना है कि जिस तरह से मामले में रोज गिरफ्तारी हो रही है, उसे देखते हुए स्पष्ट है कि घोटाला बड़ी पहुंच वालों की मिलीभगत से हुआ है। अभी सिर्फ एक ही मामला सामने आया है, अगर सीबीआई जांच की गई तो प्रदेश के कितने ऐसे घोटाले उजागर होंगे, जिनके चलते प्रशिक्षित बेरोजगारों के हक को छीनने का काम किया गया है।
छात्रों ने स्नातक स्तर की अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की परीक्षा को रद्द करने की बजाय वास्तविक परीक्षार्थियों को नौकरी देने, बैकडोर और आउटसोर्स की व्यवस्था को खत्म करने, प्रदेश के 60 हजार रिक्त पदों को भरने, महिलाओं को नौकरी में मिलने वाले 30 प्रतिशत आरक्षण को वैधानिक रूप देकर असम राज्य की तर्ज पर कानून बनाने और उत्तराखंड आंदोलनकारियों को पूर्व की तरह 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देेने की मांग की। वहां पर मनीष लोबियाल, पंकज चन्याल, विपिन कुमार, भास्कर रंजन, बसंत पंडा, कैलाश पांडे आदि मौजूद रहे।
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अल्मोड़ा में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवा धरनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। युवाओं का कहना है की सरकार में हुई भर्ती परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और दोषियों को कड़ी सजा देने चाहती है तो इसकी सीबीआई जांच होनी चाहिए। आम आदमी पार्टी के आनंद बगडवाल और अखिलेश टम्टा तथा धर्मनिरपेक्ष युवा मंच के संयोजक विनय किरौला ने भी युवाओं को अपना समर्थन दिया है।
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बागेश्वर में छात्र नेता मयंक चौबे के नेतृत्व में छात्रों ने कलक्ट्रेट परिसर में प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। डीएम के माध्यम से सीएम को ज्ञापन भेजकर विधानसभा सचिवालय में बैकडोर से हुई नियुक्तियों की भी जांच कराने की मांग की। छात्रों ने जल्द मांग नहीं सुने जाने पर दो सितंबर से डीएम कार्यालय के बाहर अनशन शुरू करने की चेतावनी दी है।
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छात्रों का कहना है कि जिस तरह से मामले में रोज गिरफ्तारी हो रही है, उसे देखते हुए स्पष्ट है कि घोटाला बड़ी पहुंच वालों की मिलीभगत से हुआ है। अभी सिर्फ एक ही मामला सामने आया है, अगर सीबीआई जांच की गई तो प्रदेश के कितने ऐसे घोटाले उजागर होंगे, जिनके चलते प्रशिक्षित बेरोजगारों के हक को छीनने का काम किया गया है।
छात्रों ने स्नातक स्तर की अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की परीक्षा को रद्द करने की बजाय वास्तविक परीक्षार्थियों को नौकरी देने, बैकडोर और आउटसोर्स की व्यवस्था को खत्म करने, प्रदेश के 60 हजार रिक्त पदों को भरने, महिलाओं को नौकरी में मिलने वाले 30 प्रतिशत आरक्षण को वैधानिक रूप देकर असम राज्य की तर्ज पर कानून बनाने और उत्तराखंड आंदोलनकारियों को पूर्व की तरह 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देेने की मांग की। वहां पर मनीष लोबियाल, पंकज चन्याल, विपिन कुमार, भास्कर रंजन, बसंत पंडा, कैलाश पांडे आदि मौजूद रहे।

अल्मोड़ा के चौघानपाटा स्थित गांधी पार्क में धरना-प्रदर्शन करते बेरोजगार। संवाद- फोटो : ALMORA