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बरसात में डर के साये में काम करते हैं याचिका लेखक

Sun, 02 Jul 2017 10:06 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो  रानीखेत (अल्मोड़ा)।
अमर उजाला ब्यूरो  रानीखेत (अल्मोड़ा)। Updated Sun, 02 Jul 2017 10:06 PM IST
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Writing writers working in the shadow of fear in the rainy season
इस हालत में है रानीखेत का याचिका लेखन भवन।  - फोटो : amar ujala

तमाम कोशिशों के बावजूद तहसील के याचिका लेखन कक्ष की हालत नहीं सुधर पाई है। शायद शासन-प्रशासन को किसी बड़े हादसे के इंतजार है। एकमात्र याचिका लेखन कक्ष वर्षों से बदहाल है। लिंटर और दीवारों का प्लास्टर पूरी तरह से उखड़ गया है। दीवारों पर बड़ी-बड़ी दरारें हैं, लेकिन इस भवन की मरम्मत की सुध किसी को नहीं है। कक्ष में डेढ़ दर्जन से अधिक याचिका लेखक बैठते हैं और मुवक्किलों का आना जाना लगा रहता है।

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बरसात में याचिका लेखक भय के साये में काम करते हैं।कभी भी अगर यह जर्जर भवन गिरा तो बड़ा हादसा हो सकता है। तहसील परिसर में पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री बची सिंह रावत ने 1996 में साक्ष्य प्रतीक्षालय के नाम पर इस कक्ष को मंजूरी दिलाई थी। करीब डेढ़ लाख रुपये की लागत से बने इस भवन की इसके बाद से किसी ने भी सुध नहीं ली। कुछ वर्ष पूर्व छत पर बड़ा पेड़ गिर गया था जिससे भवन काफी क्षति पहुंची थी।
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याचिका लेखक पंकज मुनगली ने बताया कि पूर्व में नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने इस जीर्णशीर्ण भवन का निरीक्षण कर मरम्मत करवाने का आश्वासन दिया था, लेकिन आज तक आश्वासन पर कोई अमल नहीं हुआ। कक्ष के अंदर कार्यदिवस में 18 से 20 याचिका लेखक और न्यायालय संबंधी कार्यों के लिए फरियादी पहुंचते हैं। भवन के किसी भी वक्त गिरने की आशंका से याचिका लेखक परेशान हैं। 
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याचिका लेखन कक्ष की मरम्मत के लिए अलग से मद की व्यवस्था नहीं है। याचिका लेखकों की ओर से इस संबंध में कोई आवेदन भी नहीं आया है। आपदा मद से ही मरम्मत हो सकती है।
- मोहन सिंह भोजक, नायब तहसीलदार, रानीखेत। 

 

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