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गगास व कोसी नदी के घटते जल पर चिंता जताई
Fri, 31 May 2019 11:23 PM IST
दीपक नेगी
अमर उजाला ब्यूरो अल्मोड़ा।
अमर उजाला ब्यूरो अल्मोड़ा।
Published by: दीपक नेगी
Updated Fri, 31 May 2019 11:23 PM IST
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सूखने लगी गगास नदी।
- फोटो : amar ujala
बिंता में आयोजित विचार गोष्ठी में गगास, कोसी समेत विभिन्न नदियों में घट रहे जल स्तर पर चिंता जताई गई। वक्ताओं का कहना था कि जल स्तर कम होने से सिंचाई के लिए पानी कम होने के साथ साथ जल संकट भी गहरा रहा है। उन्होंने गगास, रामगंगा और कोसी नदी में पिंडर नदी का पानी छोड़ने पर जोर दिया।
वक्ताओं ने कहा कि कुमाऊं में ज्यादातर नदियां गैर बर्फानी हैं। जो गर्मियों में सूखने की स्थिति में आ जाती हैं। हर साल गर्मियों में क्षेत्र के कई लोगों को जल संकट से जूझना पड़ता है। लोगों को पानी के लिए दूर दूर जाना पड़ रहा है। अगर यही हाल रहा तो समस्या और विकराल रूप ले लेगी। उन्होंने कहा कि आजादी से पहले पिंडर नदी का पानी गगास, रामगंगा और कोसी में छोड़ने के लिए सर्वे किया गया था।
इस योजना पर अब सरकार को विचार करना चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश साह ने कहा कि इस बारे में जनप्रतिनिधियों को गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पिंडर नदी का पानी स्थानीय नदियों में छोड़ने का गंभीर प्रयास करना चाहिए। गोष्ठी में कमल तिवारी, पूरन कैड़ा, मोहन कैड़ा, मोहन अधिकारी, सुरेेश तिवारी, ललित चौधरी आदि मौजूद थे।
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वक्ताओं ने कहा कि कुमाऊं में ज्यादातर नदियां गैर बर्फानी हैं। जो गर्मियों में सूखने की स्थिति में आ जाती हैं। हर साल गर्मियों में क्षेत्र के कई लोगों को जल संकट से जूझना पड़ता है। लोगों को पानी के लिए दूर दूर जाना पड़ रहा है। अगर यही हाल रहा तो समस्या और विकराल रूप ले लेगी। उन्होंने कहा कि आजादी से पहले पिंडर नदी का पानी गगास, रामगंगा और कोसी में छोड़ने के लिए सर्वे किया गया था।
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इस योजना पर अब सरकार को विचार करना चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश साह ने कहा कि इस बारे में जनप्रतिनिधियों को गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पिंडर नदी का पानी स्थानीय नदियों में छोड़ने का गंभीर प्रयास करना चाहिए। गोष्ठी में कमल तिवारी, पूरन कैड़ा, मोहन कैड़ा, मोहन अधिकारी, सुरेेश तिवारी, ललित चौधरी आदि मौजूद थे।
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