कुमाऊं के प्रमुख पर्यटन स्थलों का होगा विश्व व्यापी प्रचार
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कुमाऊं मंडल विकास निगम के अधिकांश आवास गृहों को अपग्रेड करने के बाद अब निगम ने आने वाले सीजन से पहले ही पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए कुमाऊं के प्रमुख स्थलों का व्यापक प्रचार-प्रसार का काम शुरू कर दिया है। निगम ने कुमाऊं के नैनीताल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, रानीखेत सहित कुमाऊं के सभी जिलों में स्थित प्रमुख पर्यटन स्थलों, ट्रेकिंग रूटों, यहां पाए जाने वाले पक्षियों आदि के बारे में डिसकवर कुमाऊं विद केएमवीएन नाम से जानकारी परक ब्रासर (साहित्य) प्रकाशित किए हैं। यही नहीं निगम ने पहली बार दारमा, व्यास, चौदास और जोहार घाटियों के विस्तृत वर्णन वाली दो पुस्तकें भी छापी हैं। इन पुस्तकों को भारत के अलावा विश्व स्तर की पर्यटन एजेंसियों को भी उपलब्ध कराया जा रहा है। आठ मार्च से बर्लिन में होने जा रहे विश्व ट्रेड फेयर में भी कुमाऊं के बारे में जानकारी परक इस सभी प्रकार के साहित्य को भेजा जा रहा है। वहां अलग से भी इसका विमोचन कराया जाएगा, ताकि विश्व स्तर पर भी अधिक से अधिक पर्यटकों को कुमाऊं की संस्कृति और यहां के प्रमुख स्थलों के बारे में जानकारी हो सके।
कुमाऊं मंडल विकास निगम के कुमाऊं में कुल 42 गेस्ट हाउस हैं। अस्सी के दशक में बने इन गेस्ट हाउसों को आज तक अपग्रेड नहीं किया गया था। इधर बीते दो सालों में निगम ने इनमें से अधिकांश आवास गृहों आधुनिक रूप दिया है। इनमें नैनीताल, बिंसर, कौसानी, भीमताल, नौकुचियाताल, अल्मोड़ा, चौकोड़ी, मुक्तेश्वर, चिलियानौला, मुनस्यारी, आदि स्थानों पर स्थित गेस्ट हाउसों को नया रूप देकर वहां सुविधाएं बढ़ा दी गई हैं। अब दूसरे चरण में निगम ने कुमाऊं के प्रमुख स्थलों के बारे में विश्व स्तर पर प्रचार-प्रसार करने का फैसला किया है। इसके लिए कुमाऊं के प्रमुख पर्यटन, धार्मिक और एतिहासिक स्थलों के बारे में व्यापक जानकारी वाला साहित्य प्रकाशित किया गया है। इनमें कुमाऊं के हर जिले को कवर किया गया है। साहित्य में कसारदेवी, अल्मोड़ा, नैनीताल समेत सभी स्थलों के बारे में सभी तरह की जानकारियां हैं। खास तौर पर अल्मोड़ा की रामलीला और दशहरा के साथ ही कसारदेवी से जुड़ी ऐतिहासिक जानकारियां भी इसमें शामिल हैं। एक ब्रासर में कुमाऊं के प्रमुख ट्रैकिंग रूटों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है। जिसमें छोटा कैलाश, पंचाचूली, मिलम, नामिक, रालम, सुंदरढूंगा, कफनी, पिंडारी ग्लेशियरों के बारे में विस्तृत जानकारी है। एक अन्य ब्रासर में कुमाऊं में पाए जाने वाले पक्षियों के बारे में तो एक अन्य में मुनस्यारी क्षेत्र में पाए जाने वाले पक्षियों के बारे में पूरी जानकारी है।
निगम ने दो पुस्तकें भी प्रकाशित की हैं। थ्रॉन ऑफ द गॉड्स पुस्तक में दारमा, व्यास, चौदास के बारे में व्यापक जानकारी है। 275 पेज की इस पुस्तक में इन तीनों घाटियों में स्थित गांवों का इतिहास, वहां की संस्कृति, लामाओं की कहानी, प्राकृतिक सौंदर्य आदि के बारे में जानकारी है। दूसरी पुस्तक में जोहार घाटी के बारे में इसी तरह का पूरा वर्णन है। दोनों पुस्तकों का संयुक्त लेखन केएमवीएन के एमडी धीराज गर्ब्याल और प्रमुख साहित्यकार अशोक पांडे ने किया है। केएमवीएन के प्रबंध निदेशक ने बताया कि दोनों पुस्तकों के साथ ही अन्य सभी तरह का साहित्य देश की प्रमुख पर्यटन एजेंसियों के साथ ही विश्व स्तर के पर्यटन मेलों में भी उपलब्ध कराया जा रहा है ताकि देश-विदेश से अधिक से अधिक पर्यटक कुमाऊं में आने के लिए प्रेरित हो सकें। उन्होंने बताया कि आगामी आठ मार्च से जर्मनी के बर्लिन में होने जा रहे विश्व के सबसे बड़े पर्यटन फेयर में भी इन पुस्तकों और साहित्य को भेजा जा रहा है। वहां बकायदा इसका अलग से विमोचन भी किया जाएगा। बर्लिन में इन स्थलों आदि के बारे में लघु फिल्म भी दिखाई जाएगी। स्थानीय स्तर पर इस सभी तरह के साहित्य का विमोचन अलग से किया जाएगा।