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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Almora News ›   Women's non-village collective efforts to save forest

महिलाओं के सामूहिक प्रयासों से बचा है गैरगांव का जंगल

Mon, 25 Apr 2016 10:57 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा। Updated Mon, 25 Apr 2016 10:57 PM IST
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 वनों की सुरक्षा को लेकर जहां लोग जागरूक नहीं हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उपमंडल के गैरगांव की महिलाएं एकजुट होकर वनों को आग से बचाने का कार्य कर रही हैं। महिलाएं जहां खेतों के कूड़े को अपनी नजरों के सामने नष्ट करवाती हैं, वहीं वनों को आग के हवाले करने वाले अराजक तत्वों पर भी नजर रखती हैं। 

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गैरगांव का जंगल 481 हेक्टेयर में फैला है। 241 हेक्टेयर क्षेत्र बांज वन है। जबकि 14 वन पंचायतें हैं। महिलाओं के सामूहिक प्रयासों से ही वन क्षेत्र सुरक्षित है। खास बात यह है कि बांज वन में 2003 के बाद सिर्फ दो बार आग लगी है। महिलाओं का कहना है कि विभाग और ग्रामीणों के सामूहिक प्रयासों से ही वन सुरक्षित रह सकते हैं। 
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-गैरगांव के नौघर तोक निवासी बिशना देवी का कहना है कि वह पिछले पांच सालों से लगातार वनों की आग बुझाने का काम कर रही हैं। मैं ग्रामीणों से अपील करना चाहती हूं कि खेतों का कूड़ा शाम के वक्त नहीं जलाना चाहिए। शाम के वक्त हवा चलती है, जिस कारण आग जंगलों का फैल जाती है। कूड़े का निस्तारण नजरों के सामने करें। वन विभाग को भी समय समय पर ग्रामीणों के साथ बैठकें कर नीतियां बनानी चाहिए।
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- गैरगांव निवासी देवकी देवी का कहना है कि वनाग्नि सुरक्षा में विभाग का अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाता। ग्रामीणों के साथ नियमित रूप से बैठकों का अभाव रहता है। प्रशिक्षण भी नहीं मिल पाता। आग बुझाने के यंत्र भी ग्रामीणों को पर्याप्त नहीं मिल पाते। जिस कारण वनाग्नि सुरक्षा में कई तरह की परेशानियां उठानी पड़ती हैं। वन विभाग को अपने क्रू स्टेशनों को सक्रिय करना चाहिए। 

-महिला मंगल दल अध्यक्षा निर्मला भंडारी का कहना है कि वनाग्नि सुरक्षा में महिला मंगल दल भी विशेष सहयोग करता है। उनका कहना है कि वन अमूल्य धरोहर हैं। विभाग की तरफ  से विद्यालयों के माध्यम से भी वनाग्नि सुरक्षा का प्रचार प्रसार होना चाहिए। ग्रामीणों का वनाग्नि का प्रशिक्षण दिया जाना जरूरी है। साथ ही अराजक तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। विभाग और ग्रामीणों के सहयोग से ही वन सुरक्षित रह पाएंगे।

- वनों में आग लगने से जहां चारा घास उजड़ जाती है, वहीं पेड़ पौधे नष्ट होने से पानी का अकाल पड़ जाता है। इसके अलावा वन्य जीव बस्तियों का रुख कर रहे हैं। जिसके कारण वन्य जीवन और मानव संघर्ष बढ़ रहा है। ग्रामीणों, सरपंचों, महिला मंगल दलों, युवाओं से वनाग्नि सुरक्षा को रोकने के लिए हरसंभव मदद की अपील की गई है। वन विभाग को क्रू स्टेशन सक्रिय करने चाहिए। रेंज और विभागीय स्तर पर सरपंचों को वनाग्नि सुरक्षा का प्रशिक्षण देना चाहिए।


-गैरगांव में कई महिलाएं वनाग्नि रोकने में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। विभाग की तरफ से गत वर्ष 50 वन पंचायतों में रेक वितरित किए गए थे। इस बार भी दिए जाएंगे। वन दरोगाओं को गांव में जाकर आग के प्रति जागरूक कर रहे हैं।
-दीवानी राम, वन क्षेत्राधिकारी, रानीखेत।

 

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