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खाद्यान्न वितरण के साथ बाल पोषाहार का वितरण भी ठप
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Sat, 26 Nov 2016 10:31 PM IST
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सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेताओं की हड़ताल से जहां एक तरफ लोगों को खाद्यान्न वितरण नहीं हो पा रहा है। वहीं दूसरी ओर कुटीर उद्योग चला रहे बेरोजगारों को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। जिलाधिकारी सविन बंसल ने विकास खंड अधिकारियों से ग्रामीण क्षेत्रों में गल्ला विक्रेताओं की स्थिति का पता कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं ताकि शासन को इस संबध में सूचना दी जा सके।
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मानेदय, जीवन बीमा और स्टेशनी चार्ज आदि सुविधाओं की मांग को लेकर एक नवंबर से हड़ताल पर गए गल्ला विक्रेताओं ने सरकार पर उनकी मांगों की अनदेखी का आरोप लगाया है। हड़ताल के कारण जिले भर में 937 दुकानों से लोगों को गेहूं, चावल, चीनी आदि खाद्यान्न समेत कैरोसीन मिलना भी बंद हो गया है। चक्की आदि चलाकर जीवन यापन करने वाले बेरोजगार युवकों पर भी हड़ताल की मार पड़ी है। गेहूं, चावल नहीं मिलने के कारण चक्की भी नहीं चल रही है। यही नहीं स्कूलों में बच्चों को मिलने वाला बाल पोषाहार भी गल्ला विक्रेताओं ने नहीं देने का निर्णय लिया है।
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गल्ला विक्रेताओं का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगें पूरी नहीं करती वह लोग हड़ताल जारी रखेंगे। इस संबंध में उन्होंने आगे की रणनीति तय करने के लिए सोमवार को बैठक भी बुलाई है। इधर जिलाधिकारी सविन बंसल ने विकास खंड अधिकारियों को गांवों का भ्रमण कर सस्ता गल्ला विक्रेता की स्थिति की जानकारी लेकर विवरण सीडीओ कार्यालय में देने के निर्देश दिए हैं ताकि शासन को सूचना भेजी जा सके।
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