{"_id":"5a242a414f1c1b6a118b5a3c","slug":"wild-animals-became-known-enemies-of-crops","type":"story","status":"publish","title_hn":"फसलों के जानी दुश्मन बन गए जंगली जानवर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फसलों के जानी दुश्मन बन गए जंगली जानवर
अमर उजाला ब्यूरो अल्मोड़ा।
Updated Sun, 03 Dec 2017 10:15 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिले के ग्रामीण क्षेत्र में सुअरों और बंदरों का आतंक काफी बढ़ गया है। सुअर और बंदर खेतों में बोई गई गेहूं, मसूर, जौ आदि की फसल समेत सब्जियों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। फसल तैयार करने के लिए किसान सालभर मेहनत करते हैं, लेकिन ज्यों ही फसल तैयार होती है जंगली जानवर उसे चट कर जाते हैं। इस कारण किसानों का खेती से मोह भंग हो रहा है।
विज्ञापन
जिले के मनान, पथरिया, पड़ोलिया, ककराड़, पामनीगाड़, सैनोली, कनोली, बरम, नैगाड़, धनखोली, कुंज, भाबू, बिराड़, संग्रोली, दाड़िमी, नौगांव, सीम, त्योनरा, बाराकोट, सूरी, खडिय़ानौली, गणाऊं, थामथोली, मझाऊं समेत कई गांवों में गेहूं, मसूर, जौ की फसल समेत विभिन्न प्रकार की सब्जियां उगाई गई हैं, लेकिन सुअर और बंदरों के झुड खेतों में पहुंच कर बोई गई फसल को तहस-नहस कर दे रहे हैं। बंदर कई बार घरों में घुसकर खाने का सामान भी उठा ले जा रहे हैं। बंदरों के बढ़ते आतंक के कारण छोटे बच्चों का अकेले स्कूल जाना मुश्किल होता जा रहा है।
विज्ञापन
मनान गांव निवासी भैरव दत्त जोशी और दीपक जोशी ने बताया कि जंगली जानवरों के आतंक के कारण कई लोगों ने खेती छोड़ दी और वह रोजगार की तलाश में शहरी क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि जंगली जानवरों के आतंक से छुटकारा दिलाने के लिए ठोस कार्रवाई की जाए।
विज्ञापन