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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Almora News ›   Who understand the suffering of the mountain to send the Assembly

पहाड़ की पीड़ा समझने वाले  को ही भेजें विधानसभा

Fri, 03 Feb 2017 11:04 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा। Updated Fri, 03 Feb 2017 11:04 PM IST
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 महिला एकता परिषद की राजनीतिक पदयात्रा के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में अभियान जारी है। महिलाओं ने गांव-गांव जाकर सभाएं भी आयोजित की और पहाड़ की पीड़ा समझने वाले व्यक्ति को ही विधानसभा भेजने का आह्वान किया। इससे पूर्व शिलंग, धमेड़ा आदि गांवों में भी पदयात्रा का स्वागत किया गया।

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महिला एकता परिषद की राजनीतिक पदयात्रा का छठा चरण शुरू हो गया है। यात्रा के माध्यम से महिलाएं पहाड़ की पीड़ा बयां कर रही हैं। कहा कि सरकारों की नाकामी के चलते पहाड़ से पलायन हो रहा है। खेती बंजर होने की कगार पर है। सरकारों को पहाड़ के सरोकारों से कोई लेना-देना नहीं है। जनप्रतिनिधि ऐसा होना चाहिए जो पहाड़ का हो और पहाड़ के हित की बात करता हो, पहाड़ की संस्कृति, मंडुवा, झुंगरा का महत्व समझता हो। बाहर से आने वाले प्रत्याशियों को नहीं चुनने का आह्वान किया। कहा कि बंदर, सुअरों से निपटने के लिए सरकारों ने आज तक ठोस नीति नहीं बनाई। वन्य जीवों ने पहाड़ की कृषि व्यवस्था की रीढ़ तोड़कर रख दी है। लोग खेती से विमुुख हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि गांव में वोट मांगने आ रहे जनप्रतिनिधियों से बंदर, सुअरों के आतंक से निजात दिलाने का ठोस आश्वासन लें, उनसे शपथ पत्र भरवाए जाने चाहिए। पदयात्रा शिलंग, धमेड़ा, चौड़ा, जनरखड़ी, गोहाड़, मटेला भी गई। यात्रा में मधुबाला कांडपाल, कमला देवी, हेमा नेगी, दुर्गा बिष्ट, हीरा नेगी, जानकी देवी, प्रभा देवी, मुन्नी देवी सहित दर्जनों महिलाएं शामिल थीं।

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