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सादगी और शालीनता का वह दौर अब कहां
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Wed, 08 Feb 2017 11:26 PM IST
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परिचर्चा
- फोटो : अमर उजाला
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चुनावी शोर के बीच गांव कस्बों की दुकानों में भी चुनावी चर्चा का जोर है। विकास खंड के सबसे बडे़ गांव जमणियां की एक दुकान में चल रही चुनावी गपशप में शामिल बुजुर्गों का कहना था कि चुनाव का वह दौर ही कुछ और होता था, मान मर्यादा के साथ ही प्रत्याशी में सादगी और शालीनता होती थी। लेकिन आज धन बल और बाहुबल ने विकृति पैदा कर दी है। बुजुर्ग कहते हैं कि भाषणों में हम सबके मन की बात सुन रहे हैं अपने मन की बात तो 15 फरवरी को बटन दबाकर ही बताएंगे।
चुनावी शोरगुल के बीच हर गली दुकान ही नही बल्कि गांव कस्बों में भी सिर्फ चुनाव की चर्चा हो रही है। इसी कड़ी में विकास खंड की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत जमणियां में एक दुकान में चुनावी गपशप कर रहे लोगों के बीच बैठे सेना से सेवानिवृत्त बुजुर्ग खीम सिंह नेगी कहते हैं कि वे रिटायर होने के बाद तीन चुनाव देख चुके हैं। लेकिन अब चुनाव स्तर गिरता जा रहा है। कहते हैं कि नेताओं ने मोटी कमाई की है पानी की तरह बहा रहे हैं।
एक अन्य बुजुर्ग मोहन चंद्र पांडे कहते हैं कि पहले प्रत्याशी बड़ी सादगी से चुनाव लड़ते थे। परंतु अब दल बल के साथ प्रचार हो रहा है। वह कहते हैं पब्लिक है सब जानती है। बुजुर्ग अमर सिंह कहते हैं कि आज के दौर में प्रचार प्रसार की फिजूल खर्ची की जरूरत नही है मतदाता पढ़े लिखे हैं वे जानते हैं कि वोट किसे देना है। जवाहर सिंह मेहरा कहते हैं कि पुरानी कहावत है कि च्याल के देखछा च्यलक यार देखो (बेटे को क्या देखते हो उसके दोस्तों को देखो) उनकी छवि देखकर ही सब कुछ मालूम हो जाएगा। कहते हैं सही प्रत्याशी को ही वोट देंगे। कहते हैं कि चुनाव वाले दिन 15 फरवरी को सही प्रत्याशी के पक्ष में मतदान कर अपनी मन की बात बताएंगे।
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चुनावी शोरगुल के बीच हर गली दुकान ही नही बल्कि गांव कस्बों में भी सिर्फ चुनाव की चर्चा हो रही है। इसी कड़ी में विकास खंड की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत जमणियां में एक दुकान में चुनावी गपशप कर रहे लोगों के बीच बैठे सेना से सेवानिवृत्त बुजुर्ग खीम सिंह नेगी कहते हैं कि वे रिटायर होने के बाद तीन चुनाव देख चुके हैं। लेकिन अब चुनाव स्तर गिरता जा रहा है। कहते हैं कि नेताओं ने मोटी कमाई की है पानी की तरह बहा रहे हैं।
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एक अन्य बुजुर्ग मोहन चंद्र पांडे कहते हैं कि पहले प्रत्याशी बड़ी सादगी से चुनाव लड़ते थे। परंतु अब दल बल के साथ प्रचार हो रहा है। वह कहते हैं पब्लिक है सब जानती है। बुजुर्ग अमर सिंह कहते हैं कि आज के दौर में प्रचार प्रसार की फिजूल खर्ची की जरूरत नही है मतदाता पढ़े लिखे हैं वे जानते हैं कि वोट किसे देना है। जवाहर सिंह मेहरा कहते हैं कि पुरानी कहावत है कि च्याल के देखछा च्यलक यार देखो (बेटे को क्या देखते हो उसके दोस्तों को देखो) उनकी छवि देखकर ही सब कुछ मालूम हो जाएगा। कहते हैं सही प्रत्याशी को ही वोट देंगे। कहते हैं कि चुनाव वाले दिन 15 फरवरी को सही प्रत्याशी के पक्ष में मतदान कर अपनी मन की बात बताएंगे।
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