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Almora News: इस अंधियारी रात की सुबह कब होगी...
Wed, 03 Dec 2025 11:36 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Wed, 03 Dec 2025 11:36 PM IST
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बागेश्वर के मटियोली से बीमार महिला को डोली से सड़क से लाते ग्रामीण। स्रोत- ग्रामीण
अल्मोड़ा। पहाड़ की जिंदगी हमेशा संघर्ष से भरी रही है। राज्य बनने के ढाई दशक बाद यह संघर्ष अब दर्द में बदलता जा रहा है। कभी रेफरल सेंटर बने अस्पतालों तक समय पर इलाज न मिल पाने से मौतें हो जाती हैं तो कभी सड़क न होने के कारण घायल और बीमार लोगों को इंसानी कंधों पर घंटों लादकर अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। एक ओर बागेश्वर की प्रसूता की अल्मोड़ा के अस्पताल में मौत से खुशियां छिन गईं। दूसरी ओर सड़क न होने से बागेश्वर जिले की ही एक घायल महिला की जिंदगी गांववालों की हिम्मत और जुगाड़ पर टिक गई। ऐसे में बड़ा सवाल है कि लोगों की जिंदगियों पर मंडराता अंधेरा आखिर कब छंटेगा...
अस्पतालों के चक्कर काटते प्रसूता ने दम तोड़ा
अल्मोड़ा। पहाड़ के अस्पताल रेफरल सेंटर बनकर रह गए हैं। लोगों की जान चली जाती है और सिस्टम तमाशा देखता रहता है। ताजा मामले में बागेश्वर से रेफर हुई प्रसूता ने मेडिकल कॉलेज अल्मोड़ा में दम तोड़ दिया।
प्रसव पीड़ा बढ़ने पर 24 वर्षीय सोनिया को परिजन बागेश्वर अस्पताल ले गए। अस्पताल में मृत बच्चे ने जन्म लिया। इसके बाद रक्तस्राव बढ़ने से उसकी हालत बिगड़ गई। डॉक्टर उसे राहत न दे सके और हायर सेंटर रेफर कर दिया। रात की ठिठुरती हवा और खतरे से भरा सफर सोनिया की जान पर भारी पड़ गया। पति राजेश कुमार से बागेश्वर अस्पताल में इलाज में लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
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रात लगभग डेढ़ बजे जब तक परिजन अल्मोड़ा पहुंचे, उम्मीदें आधी रह गई थीं। सोनिया जिंदगी की जंग हार गई। जिस घर में किलकारी की तैयारी थी वहां अब मातम पसर गया। अस्पताल के गलियारों में रोते हुए परिजनों को संभालना भी मुश्किल हो गया। दो मौतों ने परिवार की दुनिया उजाड़ दी और पहाड़ की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल भी खड़े कर दिए।
प्रसूता बागेश्वर से रेफर होकर यहां आई थी। उसे गंभीर हालत में यहां लाया गया था। चिकित्सकों ने उसका उपचार कर बचाने का पूरा प्रयास किया। उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
-डॉ. सीपी भैसोड़ा, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज अल्मोड़ा
खतरनाक रास्ते पर डोली में महिला को अस्पताल पहुंचाकर बचाई जान
बागेश्वर। पर्वतीय क्षेत्रों के कई गांवों का सड़क से न जुड़ पाने से लोगों की जान खतरे में पड़ जाती है लेकिन सिस्टम चुप्पी साध लेता है।
मटियोली गांव की अनीता देवी घास काटते वक्त पेड़ से गिर पड़ीं। कमर में गंभीर चोट लगी, दर्द इतना कि कदम भी नहीं उठ पा रहे थे। ऐसे में गांववालों ने इंसानियत की मिसाल पेश की। उन्हें डोली में लादकर ग्रामीण अशोक नेगी, कौस्तुभ फुलारा, चंदन नेगी, देव सिंह, भूपाल सिंह, जगत सिंह आदि ने गांव से ताछनी पांच किलोमीटर दूर उबड़-खाबड़, संकरे रास्तों से सड़क तक पहुंचाया। हर मोड़ पर फिसलने का डर, हर ढलान पर डोली के उलटने का खतरा। एक जगह तो डोली पेड़ से टकरा भी गई लेकिन ग्रामीणों ने हिम्मत नहीं हारी। जिला अस्पताल पहुंचने के बाद अनीता का इलाज शुरू हुआ।
नहीं बदले हालात
ग्रामीणों के मन में और भी घाव हैं। दशकों से सड़क की मांग की जा रही है, पर सुनवाई नहीं। इतना कि मटियोली और ताछनी के लोगों ने 2024 लोकसभा चुनाव का पूरी तरह बहिष्कार कर दिया। फिर भी हालात नहीं बदले। बीमार, गर्भवती, बुजुर्ग सबको इसी जोखिम भरे रास्ते पर जिंदगी और मौत के बीच जूझकर सफर तय करना पड़ता है।
मटियोली गांव के लिए सड़क स्वीकृत है। वन भूमि हस्तांतरण का मामला लंबित था, इसमें वन विभाग से आपत्ति आई थी। बताई गई कमियों को ठीक कर पत्र दोबारा शासन को भेज दिया गया है। वन भूमि का मामला क्लीयर होने के बाद आगे की प्रक्रिया की जाएगी। -एसके पांडेय, ईई लोनिवि, बागेश्वर
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अस्पतालों के चक्कर काटते प्रसूता ने दम तोड़ा
अल्मोड़ा। पहाड़ के अस्पताल रेफरल सेंटर बनकर रह गए हैं। लोगों की जान चली जाती है और सिस्टम तमाशा देखता रहता है। ताजा मामले में बागेश्वर से रेफर हुई प्रसूता ने मेडिकल कॉलेज अल्मोड़ा में दम तोड़ दिया।
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प्रसव पीड़ा बढ़ने पर 24 वर्षीय सोनिया को परिजन बागेश्वर अस्पताल ले गए। अस्पताल में मृत बच्चे ने जन्म लिया। इसके बाद रक्तस्राव बढ़ने से उसकी हालत बिगड़ गई। डॉक्टर उसे राहत न दे सके और हायर सेंटर रेफर कर दिया। रात की ठिठुरती हवा और खतरे से भरा सफर सोनिया की जान पर भारी पड़ गया। पति राजेश कुमार से बागेश्वर अस्पताल में इलाज में लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
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रात लगभग डेढ़ बजे जब तक परिजन अल्मोड़ा पहुंचे, उम्मीदें आधी रह गई थीं। सोनिया जिंदगी की जंग हार गई। जिस घर में किलकारी की तैयारी थी वहां अब मातम पसर गया। अस्पताल के गलियारों में रोते हुए परिजनों को संभालना भी मुश्किल हो गया। दो मौतों ने परिवार की दुनिया उजाड़ दी और पहाड़ की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल भी खड़े कर दिए।
प्रसूता बागेश्वर से रेफर होकर यहां आई थी। उसे गंभीर हालत में यहां लाया गया था। चिकित्सकों ने उसका उपचार कर बचाने का पूरा प्रयास किया। उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
-डॉ. सीपी भैसोड़ा, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज अल्मोड़ा
खतरनाक रास्ते पर डोली में महिला को अस्पताल पहुंचाकर बचाई जान
बागेश्वर। पर्वतीय क्षेत्रों के कई गांवों का सड़क से न जुड़ पाने से लोगों की जान खतरे में पड़ जाती है लेकिन सिस्टम चुप्पी साध लेता है।
मटियोली गांव की अनीता देवी घास काटते वक्त पेड़ से गिर पड़ीं। कमर में गंभीर चोट लगी, दर्द इतना कि कदम भी नहीं उठ पा रहे थे। ऐसे में गांववालों ने इंसानियत की मिसाल पेश की। उन्हें डोली में लादकर ग्रामीण अशोक नेगी, कौस्तुभ फुलारा, चंदन नेगी, देव सिंह, भूपाल सिंह, जगत सिंह आदि ने गांव से ताछनी पांच किलोमीटर दूर उबड़-खाबड़, संकरे रास्तों से सड़क तक पहुंचाया। हर मोड़ पर फिसलने का डर, हर ढलान पर डोली के उलटने का खतरा। एक जगह तो डोली पेड़ से टकरा भी गई लेकिन ग्रामीणों ने हिम्मत नहीं हारी। जिला अस्पताल पहुंचने के बाद अनीता का इलाज शुरू हुआ।
नहीं बदले हालात
ग्रामीणों के मन में और भी घाव हैं। दशकों से सड़क की मांग की जा रही है, पर सुनवाई नहीं। इतना कि मटियोली और ताछनी के लोगों ने 2024 लोकसभा चुनाव का पूरी तरह बहिष्कार कर दिया। फिर भी हालात नहीं बदले। बीमार, गर्भवती, बुजुर्ग सबको इसी जोखिम भरे रास्ते पर जिंदगी और मौत के बीच जूझकर सफर तय करना पड़ता है।
मटियोली गांव के लिए सड़क स्वीकृत है। वन भूमि हस्तांतरण का मामला लंबित था, इसमें वन विभाग से आपत्ति आई थी। बताई गई कमियों को ठीक कर पत्र दोबारा शासन को भेज दिया गया है। वन भूमि का मामला क्लीयर होने के बाद आगे की प्रक्रिया की जाएगी। -एसके पांडेय, ईई लोनिवि, बागेश्वर