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जलाशय निर्माण का पैसा वापस जाने से बौखलाए विधायक करन माहरा
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देवीढुंगा में जलाशय निर्माण के दस्तावेज दिखाते विधायक माहरा। संवाद
- फोटो : RANIKHET
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। रानीखेत की पेयजल समस्या को देखते हुए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने देवीढुंगा में जलाशय निर्माण के लिए 1.30 करोड़ रुपये स्वीकृत कराए थे। टेंडर होने के बावजूद वन विभाग की अनापत्ति नहीं मिलने से विभाग ने राशि वापस कर दी है। इस पर कांग्रेस विधान मंडल दल के उपनेता विधायक करन माहरा ने कड़ी आपत्ति जताई।
विधायक ने कैंट बोर्ड के पदाधिकारियों की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। शुक्रवार को हुई प्रेसवार्ता में विधायक ने कहा कि वन विभाग से अनापत्ति के बिना पहले टेंडर कैसे हो गए। छावनी के जनप्रतिनिधियों को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। विधायक ने कहा कि कोरोनाकाल में प्रदेश सरकार से संवेदनहीन बन गई है। गांवों में लोग राशन कार्ड के नवीनीकरण के लिए परेशान हो रहे हैं। 80 फीसदी राशन कार्डों में त्रुटियां हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में कमजोर इंटरनेट नेटवर्क की समस्या है। उन्होंने संशोधन कार्य की अंतिम तिथि बढ़ाकर ब्लॉक कार्यालय में डाटा इंट्री ऑपरेटर नियुक्त कर राशन कार्ड में संशोधन का कार्य निशुल्क करवाने की मांग की है।
देवीढुंगा में योजना स्वीकृत हुई तो पांच हजार रुपये टोकन मनी मिली थी। 2019 में योजना के लिए एक करोड़ रुपये मिले थे। वन विभाग से अनापत्ति न मिल पाने के कारण राशि लौटानी पड़ी। कैंट बोर्ड की तरफ से भी अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।
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-चंडीप्रसाद भट्ट, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग रानीखेत।
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विधायक ने कैंट बोर्ड के पदाधिकारियों की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। शुक्रवार को हुई प्रेसवार्ता में विधायक ने कहा कि वन विभाग से अनापत्ति के बिना पहले टेंडर कैसे हो गए। छावनी के जनप्रतिनिधियों को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। विधायक ने कहा कि कोरोनाकाल में प्रदेश सरकार से संवेदनहीन बन गई है। गांवों में लोग राशन कार्ड के नवीनीकरण के लिए परेशान हो रहे हैं। 80 फीसदी राशन कार्डों में त्रुटियां हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में कमजोर इंटरनेट नेटवर्क की समस्या है। उन्होंने संशोधन कार्य की अंतिम तिथि बढ़ाकर ब्लॉक कार्यालय में डाटा इंट्री ऑपरेटर नियुक्त कर राशन कार्ड में संशोधन का कार्य निशुल्क करवाने की मांग की है।
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देवीढुंगा में योजना स्वीकृत हुई तो पांच हजार रुपये टोकन मनी मिली थी। 2019 में योजना के लिए एक करोड़ रुपये मिले थे। वन विभाग से अनापत्ति न मिल पाने के कारण राशि लौटानी पड़ी। कैंट बोर्ड की तरफ से भी अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।
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-चंडीप्रसाद भट्ट, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग रानीखेत।