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पस्तौड़ावार के ग्रामीणों ने किया त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का बहिष्कार
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पस्तौड़ावार में वोटिंग का बहिष्कार करते ग्रामीण। अमर उजाला
- फोटो : RANIKHET
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। रोड नहीं तो वोट नहीं के नारे पर पस्तौड़ावार के ग्रामीण खरा उतरे। क्षेत्र के 443 मतदाताओं में से किसी ने भी पंचायत चुनाव के लिए मतदान नहीं किया। सुबह सेक्टर मजिस्ट्रेट ग्रामीणों को समझाने भी पहुंचे। इसके बावजूद ग्रामीण नहीं माने, ग्रामीणों का कहना था कि जब तक गांव मोटर मार्ग से नहीं जुड़ जाता तब तक वह हर चुनाव का बहिष्कार करते रहेंगे।
पस्तौड़ावार के ग्रामीण सड़क के लिए लंबे समय से संघर्षरत हैं। इसके लिए ग्रामीणों ने पूर्व में विधानसभा चुनाव का भी बहिष्कार किया था। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि विधानसभा चुनाव के बाद शायद सड़क बन जाएगी, लेकिन यह मांग पूरी नहीं हुई। गुस्साए ग्रामीणों ने एक माह पूर्व यहां रानीखेत में धरना प्रदर्शन किया और जुलूस निकाला और पंचायत चुनाव के बहिष्कार की चेतावनी दी थी।
इधर, शुक्रवार को हुए चुनाव में किसी भी ग्रामीण ने वहां मतदान नहीं किया। वहां तीन बूथ बनाए गए थे, लेकिन मतदान नहीं हुआ। इस दौरान शासन-प्रशासन पर वायदा खिलाफी का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की। कहा कि 2022 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव का भी बहिष्कार किया जाएगा। ग्रामीणों को पांच किमी की पैदल दूरी तय कर मुख्य मोटर मार्ग तक पहुंचना पड़ता है। गंभीर रोगियों को अस्पताल पहुंचाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। प्रदर्शन करने वालों में संघर्ष समिति के अध्यक्ष चंदन सिंह, अमर सिंह, हरीश राम, त्रिलोक सिंह, विरेंद्र सिंह, कुंदन सिंह, दिनेश चंद्र सहित तमाम लोग मौजूद थे।
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पस्तौड़ावार के ग्रामीण सड़क के लिए लंबे समय से संघर्षरत हैं। इसके लिए ग्रामीणों ने पूर्व में विधानसभा चुनाव का भी बहिष्कार किया था। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि विधानसभा चुनाव के बाद शायद सड़क बन जाएगी, लेकिन यह मांग पूरी नहीं हुई। गुस्साए ग्रामीणों ने एक माह पूर्व यहां रानीखेत में धरना प्रदर्शन किया और जुलूस निकाला और पंचायत चुनाव के बहिष्कार की चेतावनी दी थी।
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इधर, शुक्रवार को हुए चुनाव में किसी भी ग्रामीण ने वहां मतदान नहीं किया। वहां तीन बूथ बनाए गए थे, लेकिन मतदान नहीं हुआ। इस दौरान शासन-प्रशासन पर वायदा खिलाफी का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की। कहा कि 2022 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव का भी बहिष्कार किया जाएगा। ग्रामीणों को पांच किमी की पैदल दूरी तय कर मुख्य मोटर मार्ग तक पहुंचना पड़ता है। गंभीर रोगियों को अस्पताल पहुंचाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। प्रदर्शन करने वालों में संघर्ष समिति के अध्यक्ष चंदन सिंह, अमर सिंह, हरीश राम, त्रिलोक सिंह, विरेंद्र सिंह, कुंदन सिंह, दिनेश चंद्र सहित तमाम लोग मौजूद थे।
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