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बोरारो घाटी के प्रभावित गांवों में पहुंची पशु चिकित्सकों की टीम,
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अर्जुनराठ गांव में बीमार गाय का उपचार करते पशु चिकित्सा कर्मी। (विज्ञप्ति)
- फोटो : ALMORA
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सोमेश्वर/अल्मोड़ा। बौरारो घाटी के गांवों में पशुओं में फैल रहे खुरपका रोग और बुखार के इलाज के लिए पशुपालन विभाग के डॉक्टरों और कार्मिकों की टीम बृहस्पतिवार को प्रभावित गांवों में पहुंची। पशु चिकित्सकों ने बीमार पशुओं का इलाज करके खून के सैंपल लेकर दवाएं बांटीं। साथ ही रोग से बचाव के लिए सावधानियां बरतने के निर्देश भी दिए।
बौरारो घाटी के ग्राम पंचायत अर्जुनराठ, भानाराठ, बमन फलिया, नारंगतोली, रौतेला गांव, नकुड़ा गांव में पिछले तीन हफ्ते से 36 से ज्यादा गाय, भैंस और बकरियां खुरपका, बुखार की चपेट में हैं। इसके अलावा छह से ज्यादा पशुओं की बीमारी की वजह से मौत भी हो गई है।
अमर उजाला ने नौ सितंबर के अंक में इस मामले को प्रमुखता से उठाया तब हरकत में आए पशुपालन विभाग ने पशु सचल चिकित्सा वाहन प्रभावित क्षेत्र में भेजा। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. चित्रा जोशी और डॉ. शैलजा जोशी ने इन गांवों में बीमार पशुओं का इलाज किया। उनके साथ पशुधन प्रसार अधिकारी अनुज मिश्रा, पंकज जोशी, गुरुराम सिंह राणा, प्रयोगशाला सहायक अखिलेश बिष्ट, वैक्सीनेटर राजेंद्र राम भी थे।
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रखें ख्याल
- बीमार पशुओं को अन्य पशुओं से अलग बांधें।
- उनका शेष बचा चारा दूसरे पशुओं को न दें।
- बीमार पशुओं को चरने के लिए चारागाह भी नहीं भेंजे।
- साथ रहने से अन्य पशुओं में भी बीमारी फैल सकती है।
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बौरारो घाटी के ग्राम पंचायत अर्जुनराठ, भानाराठ, बमन फलिया, नारंगतोली, रौतेला गांव, नकुड़ा गांव में पिछले तीन हफ्ते से 36 से ज्यादा गाय, भैंस और बकरियां खुरपका, बुखार की चपेट में हैं। इसके अलावा छह से ज्यादा पशुओं की बीमारी की वजह से मौत भी हो गई है।
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अमर उजाला ने नौ सितंबर के अंक में इस मामले को प्रमुखता से उठाया तब हरकत में आए पशुपालन विभाग ने पशु सचल चिकित्सा वाहन प्रभावित क्षेत्र में भेजा। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. चित्रा जोशी और डॉ. शैलजा जोशी ने इन गांवों में बीमार पशुओं का इलाज किया। उनके साथ पशुधन प्रसार अधिकारी अनुज मिश्रा, पंकज जोशी, गुरुराम सिंह राणा, प्रयोगशाला सहायक अखिलेश बिष्ट, वैक्सीनेटर राजेंद्र राम भी थे।
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रखें ख्याल
- बीमार पशुओं को अन्य पशुओं से अलग बांधें।
- उनका शेष बचा चारा दूसरे पशुओं को न दें।
- बीमार पशुओं को चरने के लिए चारागाह भी नहीं भेंजे।
- साथ रहने से अन्य पशुओं में भी बीमारी फैल सकती है।