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Almora News: खराब खान-पान, तनाव के कारण थायराइड की बीमारी पसार रही पैर
Sun, 24 May 2026 09:40 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Sun, 24 May 2026 09:40 PM IST
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अल्मोड़ा। कम उम्र में ही थकान हो रही है तो सावधान हो जाएं। कही आप थायराइड के शिकार तो नहीं हैं। बदलती जीवनशैली, खराब खान-पान और तनाव के कारण थायराइड की बीमारी तेजी से पैर पसार रही है। युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। जिला अस्पताल और मेडिकल काॅलेज के अधीन संचालित बेस अस्पताल की ओपीडी में महीने में 500 से अधिक मरीज उपचार के लिए आ रहे हैं।
थायराइड के महत्व और रोग की रोकथाम के लिए लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से 25 मई को हर साल विश्व थायराइड दिवस मनाया जाता है। खराब जीवनशैली और खान-पान में बदलाव के कारण थायराइड की समस्या तेजी से बढ़ रही है। गर्दन में तितली के आकार की यह ग्रंथि असंतुलित होने पर पूरे शरीर के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करती है। थायराइड कई प्रकार का होता है। हाइपोथायरायडिज्म में थायराइड ग्रंथि पर्याप्त हार्मोन नहीं बना पाती है। यह सबसे आम स्थिति है। इसमें बिना कारण तेजी से वजन बढ़ना (मोटापा), हर समय थकान, बाल झड़ना, कब्ज और त्वचा का रूखा होना आदि समस्याएं बनी रहती हैं। जबकि हाइपरथायरायडिज्म में ग्रंथि जरूरत से ज्यादा हार्मोन का उत्पादन करती है। अचानक तेजी से वजन कम होना, दिल की धड़कन का तेज होना (घबराहट), बहुत अधिक पसीना आना और चिड़चिड़ापन जैसी समस्या होती है। इस बीमारी के चपेट में आने से असंतुलित हार्मोन बनने से शरीर का वजन, ऊर्जा स्तर प्रभावित होता है।
महिलाओं में यह समस्या पुरुषों से अधिक
पुरुषों के मुकाबले महिलाएं थायराइड का ज्यादा शिकार होती हैं। अस्पतालों में आने वाले मरीजों में महिलाओं की संख्या अधिक रहती हैं। चिकित्सकों के मुताबिक 30 साल की उम्र से ही थायराइड की जांच शुरू करा देनी चाहिए। इसके बाद नियमित जांच करानी चाहिए ताकि इस गंभीर बीमारी से बचाव कर स्वस्थ्य रह सके।
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थायरॉइड के लक्षण
थकान, सांस फूलना, कम नींद आना, वजन कम होना, घबराहट, अधिक प्यास लगना
कोट
लक्षण महसूस होने पर डॉक्टर से सलाह लेकर थायराइड स्टिमुलेटिंग हार्मोन (टीएसएच) जांच करानी चाहिए। बाहर के प्रोसेस्ड फूड और ज्यादा मीठी चीजों से परहेज करे। अपनी डाइट में विटामिन ए से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे गाजर और हरी सब्जियां शामिल करें। - डॉ. अशोक कुमार, विभागाध्यक्ष मेडिसिन विभाग मेडिकल कॉलेज अल्मोड़ा
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थायराइड के महत्व और रोग की रोकथाम के लिए लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से 25 मई को हर साल विश्व थायराइड दिवस मनाया जाता है। खराब जीवनशैली और खान-पान में बदलाव के कारण थायराइड की समस्या तेजी से बढ़ रही है। गर्दन में तितली के आकार की यह ग्रंथि असंतुलित होने पर पूरे शरीर के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करती है। थायराइड कई प्रकार का होता है। हाइपोथायरायडिज्म में थायराइड ग्रंथि पर्याप्त हार्मोन नहीं बना पाती है। यह सबसे आम स्थिति है। इसमें बिना कारण तेजी से वजन बढ़ना (मोटापा), हर समय थकान, बाल झड़ना, कब्ज और त्वचा का रूखा होना आदि समस्याएं बनी रहती हैं। जबकि हाइपरथायरायडिज्म में ग्रंथि जरूरत से ज्यादा हार्मोन का उत्पादन करती है। अचानक तेजी से वजन कम होना, दिल की धड़कन का तेज होना (घबराहट), बहुत अधिक पसीना आना और चिड़चिड़ापन जैसी समस्या होती है। इस बीमारी के चपेट में आने से असंतुलित हार्मोन बनने से शरीर का वजन, ऊर्जा स्तर प्रभावित होता है।
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महिलाओं में यह समस्या पुरुषों से अधिक
पुरुषों के मुकाबले महिलाएं थायराइड का ज्यादा शिकार होती हैं। अस्पतालों में आने वाले मरीजों में महिलाओं की संख्या अधिक रहती हैं। चिकित्सकों के मुताबिक 30 साल की उम्र से ही थायराइड की जांच शुरू करा देनी चाहिए। इसके बाद नियमित जांच करानी चाहिए ताकि इस गंभीर बीमारी से बचाव कर स्वस्थ्य रह सके।
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थायरॉइड के लक्षण
थकान, सांस फूलना, कम नींद आना, वजन कम होना, घबराहट, अधिक प्यास लगना
कोट
लक्षण महसूस होने पर डॉक्टर से सलाह लेकर थायराइड स्टिमुलेटिंग हार्मोन (टीएसएच) जांच करानी चाहिए। बाहर के प्रोसेस्ड फूड और ज्यादा मीठी चीजों से परहेज करे। अपनी डाइट में विटामिन ए से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे गाजर और हरी सब्जियां शामिल करें। - डॉ. अशोक कुमार, विभागाध्यक्ष मेडिसिन विभाग मेडिकल कॉलेज अल्मोड़ा