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ये महंगाई डायन खाए जात है...
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अल्मोड़ा। सखी सइयां तो खूब कमात है ये महंगाई डायन खाए जात है.. फिल्म ‘पीपली लाइव’ का यह गीत लगातार बढ़ रही महंगाई पर सटीक बैठता है। राशन और सब्जी से लेकर अन्य घरेलू सामान तक के दामों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। 15 दिन में ही खाद्य पदार्थों की कीमतों में 10 से 15 फीसदी की वृद्धि हो गई है। आम आदमी महंगाई को लेकर खासा परेशान है। लोगों का कहना है कि कोरोना काल के संकट से जूझते-जूझते करीब डेढ़ साल होने को है और अब लगातार बढ़ती महंगाई ने कमर तोड़ दी।
कोरोनाकाल में लोग महंगाई से जूझ रहे हैं। इस बीच घरेलू गैस और व्यावसायिक गैस सिलिंडरों की कीमत में हो रही वृद्धि ने आग में घी का काम कर दिया है। सब्जी से राशन तक महंगा हो गया है। कुछ समय पहले तक आटा 26 रुपये प्रति किलो मिलता था अब 30 रुपये प्रति किलो मिल रहा है। इसी तरह चावल (एचएम) 36 रुपये, अंगूरी 40 रुपये, सरबती 60, बासमती 100 रुपये पहुंच गया है। दालों की कीमत भी आसमान छू रही है। नगर के प्रमुख कारोबारी हरीश जोशी ने बताया कि पेट्रोल-डीजल के लगातार बढ़ते दाम से खाद्य आपूर्ति महंगी हो रही है। ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने से इसका सीधा असर खाद्य वस्तुओं के दामों पर पड़ रहा है।
दाल के नाम - कीमत
अरहर -110-120
मलका- 90-95
उड़द-110
मूंग-110
चना दाल-80-90
चना साबुत-75-80
काबुले चने-120
राजमा-130-150
लोबिया-100
सफेद मटर-80
काला मसूर-90-100
मूंग साबुत-120
भट देशी-90
गहत देशी-100
तेल के नाम-कीमत
सरसों का तेल-180
रिफाइंड-160
अन्य खाद्य पदार्थ- कीमत
चाय पती-340
चीनी-44
आटा-30
चावल (एचएम)- 36
चावल अंगूरी- 40
चावल सरबती- 60,
चावल बासमती- 100
सब्जी के नाम-कीमतें
आलू-25-30
प्याज-30
टमाटर-30
फूल गोबी-80
बंद गोबी-30
लौकी-20
कद्दू-20
तुरई-30
बैगन-30
भिंडी-30
शिमला मिर्च-60
अरबी-40
परवल-60
नोट- (उपरोक्त सभी खाद्य वस्तुओं के दाम रुपये प्रति किलो में हैं।)
बढ़ती महंगाई की मार ने रसोई का बजट ही बिगाड़ दिया है। चुनाव के वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वायदा किया था कि महंगाई कम होगी मगर महंगाई तो लगातार बढ़ रही है। आखिर बढ़ती महंगाई से राहत कब मिलेगी।
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हेमा देवी, कपकोट (अल्मोड़ा)
आटा, दाल, चावल समेत अन्य खाद्य वस्तुएं इतनी महंगी हो जाएंगी कभी सपने में भी नहीं सोचा था। कोरोनाकाल में बढ़ी महंगाई के बीच मध्यम वर्गीय परिवार को खर्चा चलाना मुश्किल हो रहा है। हर चीज में कटौती करनी पड़ रही है।
मंजू देवी, कपकोट (अल्मोड़ा)
दो सालों में खाद्य वस्तुओं पर महंगाई कम होने के बजाय और बढ़ी है। जो अरहर की दाल 100 रुपये थी वह 120 पहुंच गई हैं। सरकार महंगाई पर अंकुश लगाने में पूरी तरह असफल साबित रही है।
अमर सिंह रावत, लमगड़ा (अल्मोड़ा)
मेहनत मजदूरी कर परिवार का गुजारा करते हैं। आम वस्तुओं की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि से घर का खर्च बहुत बढ़ गया है। लगातार बढ़ती महंगाई से आम जनता बुरी तरह त्रस्त है। इससे घर का बजट भी बिगड़ गया है।
सुंदर सिंह नगरकोटी, लमगड़ा (अल्मोड़ा)
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कोरोनाकाल में लोग महंगाई से जूझ रहे हैं। इस बीच घरेलू गैस और व्यावसायिक गैस सिलिंडरों की कीमत में हो रही वृद्धि ने आग में घी का काम कर दिया है। सब्जी से राशन तक महंगा हो गया है। कुछ समय पहले तक आटा 26 रुपये प्रति किलो मिलता था अब 30 रुपये प्रति किलो मिल रहा है। इसी तरह चावल (एचएम) 36 रुपये, अंगूरी 40 रुपये, सरबती 60, बासमती 100 रुपये पहुंच गया है। दालों की कीमत भी आसमान छू रही है। नगर के प्रमुख कारोबारी हरीश जोशी ने बताया कि पेट्रोल-डीजल के लगातार बढ़ते दाम से खाद्य आपूर्ति महंगी हो रही है। ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने से इसका सीधा असर खाद्य वस्तुओं के दामों पर पड़ रहा है।
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दाल के नाम - कीमत
अरहर -110-120
मलका- 90-95
उड़द-110
मूंग-110
चना दाल-80-90
चना साबुत-75-80
काबुले चने-120
राजमा-130-150
लोबिया-100
सफेद मटर-80
काला मसूर-90-100
मूंग साबुत-120
भट देशी-90
गहत देशी-100
तेल के नाम-कीमत
सरसों का तेल-180
रिफाइंड-160
अन्य खाद्य पदार्थ- कीमत
चाय पती-340
चीनी-44
आटा-30
चावल (एचएम)- 36
चावल अंगूरी- 40
चावल सरबती- 60,
चावल बासमती- 100
सब्जी के नाम-कीमतें
आलू-25-30
प्याज-30
टमाटर-30
फूल गोबी-80
बंद गोबी-30
लौकी-20
कद्दू-20
तुरई-30
बैगन-30
भिंडी-30
शिमला मिर्च-60
अरबी-40
परवल-60
नोट- (उपरोक्त सभी खाद्य वस्तुओं के दाम रुपये प्रति किलो में हैं।)
बढ़ती महंगाई की मार ने रसोई का बजट ही बिगाड़ दिया है। चुनाव के वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वायदा किया था कि महंगाई कम होगी मगर महंगाई तो लगातार बढ़ रही है। आखिर बढ़ती महंगाई से राहत कब मिलेगी।
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हेमा देवी, कपकोट (अल्मोड़ा)
आटा, दाल, चावल समेत अन्य खाद्य वस्तुएं इतनी महंगी हो जाएंगी कभी सपने में भी नहीं सोचा था। कोरोनाकाल में बढ़ी महंगाई के बीच मध्यम वर्गीय परिवार को खर्चा चलाना मुश्किल हो रहा है। हर चीज में कटौती करनी पड़ रही है।
मंजू देवी, कपकोट (अल्मोड़ा)
दो सालों में खाद्य वस्तुओं पर महंगाई कम होने के बजाय और बढ़ी है। जो अरहर की दाल 100 रुपये थी वह 120 पहुंच गई हैं। सरकार महंगाई पर अंकुश लगाने में पूरी तरह असफल साबित रही है।
अमर सिंह रावत, लमगड़ा (अल्मोड़ा)
मेहनत मजदूरी कर परिवार का गुजारा करते हैं। आम वस्तुओं की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि से घर का खर्च बहुत बढ़ गया है। लगातार बढ़ती महंगाई से आम जनता बुरी तरह त्रस्त है। इससे घर का बजट भी बिगड़ गया है।
सुंदर सिंह नगरकोटी, लमगड़ा (अल्मोड़ा)