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मौत से जूझ रहे परिवारों के लिए सरकार के पास धन नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Wed, 22 Jun 2016 11:20 PM IST
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इसी गांव को है भूस्खलन से खतरा
- फोटो : अमर उजाला
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अल्मोड़ा। एक तरफ सरकार तमाम योजनाओं में हर साल अरबों का बजट फूंक रही है वहीं दूसरी तरफ भूस्खलन के कारण कई सालों से जान का खतरा झेल रहे14 गांवों के 242 परिवारों के लिए सुरक्षित जगह पर तीन-तीन लाख रुपये के घर नहीं बनवा पा रही है जबकि इसमें मुश्किल से 10 करोड़ रुपये भी खर्च नहीं होंगे। बता दें कि 2010 की आपदा में जिले के 46 लोगों की जान चली गई थी।
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इनमें 30 लोग अकेले अल्मोड़ा तहसील के थे। आपदा और भूस्खलन से संवेदनशील इन गांवों से लोगों को शिफ्ट करने के लिए कई बार शासन को प्रस्ताव भेजे गए, लेकिन गरीबों की जानमाल से जुड़े इन प्रस्तावों को किसी न किसी बहाने लटका दिया जाता है। बरसात आते ही प्रभावित परिवारों को गांव छोड़ने के फरमान जारी कर दिया जाता है। सत्ता और विपक्ष के माननीयों का ध्यान भी गरीबों की इस गंभीर समस्या पर नहीं जा पा रहा है।
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सितंबर 2010 में हुई भारी बारिश के बाद अल्मोड़ा तहसील के अंतर्गत बल्टा, बाड़ी, देवली, भुल्यूड़ा सहित कई गांवों में भारी भूस्खलन हुआ था। इसमें कई लोग जिंदा दफन हो गए थे। इस आपदा में अल्मोड़ा तहसील के अंतर्गत ही 30 लोगों की मौत हो गई थी। जबकि जिले में 46 लोग मारे गए। आपदा के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने कुछ गांवों का दौरा भी किया था। कुछ समय बाद भूगर्भ वैज्ञानिकों ने संवेदनशील गांवों का निरीक्षण किया था।
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भूगर्भ विशेषज्ञों की राय के बाद आपदा से संवेदनशील गांवों को शिफ्ट करने की योजना तैयार करके शासन को भेजी गई, लेकिन इसे लंबे समय तक मंजूरी नहीं मिली। इसके बाद 2013 की बरसात में बूढ़ाधार, खैरखेत समेत कुछ अन्य गांवों में काफी भूस्खलन हुआ। जिससे शिफ्ट होने वाली सूची में कुछ और गांव जुड़ गए। जिले में आपदा को लेकर संवेदनशील14 गांवों के 242 परिवारों को शिफ्ट करने का प्रस्ताव पिछले तीन साल में कई बार शासन को भेजा गया, लेकिन हर बार कुछ पेंच लगाकर इसे लटका दिया जा रहा है।
यह भी बता दें कि प्रदेश सरकार द्वारा 2011 में बनाई गई विस्थापन नीति के मुताबिक शिफ्ट किए जाने वाले परिवारों को सरकारी भूमि आवंटित करने के साथ ही घर बनाने के लिए तीन-तीन लाख रुपये और साइड डवलपमेंट और गौशाला आदि के लिए कुछ अतिरिक्त धनराशि दी जानी है। इस हिसाब से भी देखें तो जिले के इन 242 परिवारों को शिफ्ट करने में कुल 10 करोड़ रुपये भी खर्च नहीं होंगे।
दरअसल इन गरीब परिवारों के जानमाल से जुड़ी इस गंभीर समस्या की तरफ सत्ता और विपक्ष किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। स्थानीय जनप्रतिनिधि भी प्रभावितों को आश्वासन देकर लौट जाते हैं और हर बार बरसात के मौसम में उन्हें गांव छोड़कर सुरक्षित स्थान पर चले जाने का फरमान दे दिया जाता है।
जिलाधिकारी सविन बंसल कहते हैं कि शासन के निर्देश पर पहले चरण में अतिसंवेदनशील गांवों बूढ़ाधार, खैरखेत और बल्टा के करीब 40 परिवारों को शिफ्ट करने की प्रक्रिया चल रही है। उन्हें भूमि के अलावा घर बनाने के लिए तीन-तीन लाख रुपये और नियमानुसार कुछ अन्य धनराशि दी जाएगी। अन्य प्रभावित परिवारों को दूसरे चरण में शिफ्ट किया जाएगा।
आपदा से प्रभावित गांव जो शिफ्ट किए जाने हैं
बल्टा, बाड़ी, बटेठी, मालता,देवड़ी, भुल्यूड़ा, ल्वेटा, थालागूंठ, बूढ़ाधार, खैरखेत (सभी तहसील अल्मोड़ा), रगड़गाड़, पनुवाद्योखन का तोक ऐराड़ (सल्ट), बसरखेत (चौखुटिया) और इंदिराबस्ती (रानीखेत)।