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भूखे सोना पड़ रहा है मधुर गीतों से मुग्ध करने वाले को
अल्मोड़ा़, अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 02 Aug 2017 10:45 PM IST
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बदहाल जिंदगी गुजार रहे लोक गायक।
- फोटो : अमर उजाला
बुजुर्ग लोक कलाकार संत राम (67) तो जन्मांध हैं ही, कुछ साल पहले उनकी पत्नी आनंदी (63) की भी दोनों आंखों की रोशनी चली गई। लोक कलाकार दंपति धौलछीना में एक कमरे में एक-दूसरे के सहारे दिन गुजार रहे हैं। कभी कभार आसपास के लोग भोजन उपलब्ध करा देते हैं, जबकि कभी दोनों भूखे सो जाते हैं। संतराम को एक हजार रुपये माह दिव्यांगता पेंशन मिलती है। आधार कार्ड न बनने के कारण यह पेंशन भी पिछले कुछ महीनों से नहीं मिल रही है। जिस कमरे में दिन गुजार रहे हैं वह भी रहने लायक नहीं है। इस टूटे-फूटे कमरे में इन दिनों बरसात का पानी घुस रहा है।
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भैंसियाछाना ब्लॉक के अंतर्गत पीपली गांव निवासी संत राम जन्म से दृष्टिहीन हैं। भगवान ने उन्हें मधुर कंठ दिया है। जगह-जगह मेले, पर्व आदि में जाकर वह लोक गीत, बैर, भगनौल, झोड़ा, ऋतुरैंण आदि गाकर लोगों का मनोरंजन करते हैं। उनकी पत्नी आनंदी देवी भी अच्छी गायिका हैं। आनंदी देवी दृष्टि से कमजोर थीं, पर उनकी आंखों की थोड़ा बहुत रोशनी दोनों का सहारा थी। आनंदी ही संत राम को लेकर यहां-वहां जाती थी और दोनों लोगों को गीत सुनाकर दो समय की रोटी का जुगाड़ कर लिया करते थे, लेकिन कुछ साल पहले आनंदी देवी की आंखों की रोशनी भी चली गई। अब दोनों के लिए कहीं भी जाना मुश्किल हो गया है। लोगों का कहना है कि शासन-प्रशासन अथवा समाज कल्याण विभाग को इन दृष्टिहीन लोकगायकों को किसी वृद्धावस्था आश्रम में शरण दिलाने की व्यवस्था करनी चाहिए।
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