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सड़क न बनने से परेशान लोग वोट नहीं डालेंगे
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Wed, 18 Jan 2017 10:54 PM IST
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सत्तारूढ़ दलों द्वारा जनता की अपेक्षा के अनुरूप विकास कार्य नही कराने से कई स्थानों पर लोगों में असंतोष है। तहसील क्षेत्र के चनौदा घाटी क्षेत्र के भेटा, बड़सीला, तीताकोट, मेल्टी, धलरखोला, सैजारी समेत अन्य गांव आज तक सड़क से नहीं जुड़ सके हैं। इससे गुस्साए क्षेत्र के करीब डेढ़ हजार मतदाताओं ने विधानसभा चुनाव के बहिष्कार का एलान किया है।
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2006 में चनौदा-सैजारी सड़क को मंजूरी मिली। दस साल बीत गए हैं, पर सड़क बनना तो दूर अब तक सर्वे भी नहीं हुआ है। इस सड़क से भेटा, बड़सीला, तीताकोट, मेल्टी, धलरखोला और अंबेडकर गांव सैजारी को यातायात सुविधा मुहैया कराई जानी थी। सड़क के अभाव में इन गांवों के ग्रामीण छह से सात किमी पैदल चलकर सड़क तक पहुंचते हैं। बीमार और बुजुर्गों को डोली में लाना मजबूरी है। कई बार तो बीमार लोगों को समय से चिकित्सा सुविधा भी नहीं मिल पाती है।
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ग्रामीणों का कहना है कि वह समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री, शासन, डीएम, एसडीएम, लोनिवि, निर्वाचन आयोग को पूर्व में पत्र भेज चुके हैं, पर कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है। सरकार, प्रशासन, लोनिवि और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा से आहत क्षेत्र के ग्रामीणों ने इस बार विधानसभा चुनाव में वोट नहीं डालने का एलान किया है। भेटा के प्रधान आनंद राम, तीताकोट के प्रधान सुनील कुमार टम्टा, सुंदर सिंह, विनोद सिंह, पान सिंह ने कहा कि सरकार से कई बार गुहार लगा चुके हैं, पर एक दशक बाद भी सड़क नहीं बन सकी है। इस बार क्षेत्र के ग्रामीणों ने चुनाव बहिष्कार का निर्णय लिया है।
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