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Almora News: 75 साल बाद भी नहीं पहुंची सड़क, वीरान हो गया स्वतंत्रता सेनानी का गांव

Wed, 23 Aug 2023 12:19 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा Updated Wed, 23 Aug 2023 12:19 AM IST
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The road did not reach even after 75 years
आजादी की लड़ाई के दौरान शीर्ष नेताओं के साथ स्व. देवी सिंह कुवार्बी। संवाद
चेतन जोशी
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। देश में आजादी का अमृतकाल मनाया जा रहा है लेकिन जिन स्वतंत्रता सेनानियों ने देश को आजाद कराया आज उनके गांवों को विकास की दरकार है। ऐसा ही एक स्वतंत्रता सेनानी का गांव कमेछीना है जहां आजादी के 75 साल बाद भी सड़क नहीं पहुंच सकी है, इससे गांव के सभी लोगों ने पलायन कर दिया जिसके कारण यह गांव अब वीरान हो चुका है।

ताड़ीखेत विकासखंड के स्वतंत्रता सेनानी स्व. देवी सिंह कुवार्बी का गांव देश में विकास के सभी दावों को खोखला साबित कर रहा है। आजादी के बाद से अब तक इस गांव को सड़क से जोड़ने की मांग लगातार चली आ रही है। वर्ष 2015 में बमुश्किल गांव को जोड़ने के लिए ताड़ीखेत-मंजूरखान-कमेछीना सड़क को स्वीकृति मिली थी, जो अब तक धरातल पर नहीं उतर सकी है। सड़क न बनने से अब यह गांव पलायन की मार झेलते हुए वीरान हो चुका है। तीन दशक पूर्व तक 80 परिवारों का खुशहाल यह गांव पूरी तरह खाली हो चुका है, जिसकी मुख्य वजह गांव तक सड़क न पहुंचना है।
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स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के पौत्र श्याम सिंह ने बताया कि कई बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने के बाद भी कुछ हाथ नहीं लगा। बताया कि मायूस लोगों को गांव से पलायन कर सड़क किनारे और मैदानी क्षेत्रों का रुख करना पड़ा है और पूरा गांव खाली हो गया है। संवाद
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स्वतंत्रता सेनानी स्व. देव सिंह कुवार्बी का परिचय

रानीखेत। 14 नवंबर 1891 को जन्मे स्वतंत्रता सेनानी स्व. देवी सिंह कुवार्बी 1917 में ब्रिटिश सेना में भर्ती हो गए। 1921 में सेना छोड़ कर वो अपने घर ताड़ीखेत लौटे और स्वतंत्रता के लिए चल रहे आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाना शुरू कर दिया। 1923 में उन्हें एक साल की कैद और 100 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। 1932 में फिर से एक साल की कठोर सजा और 100 रुपये जुर्माने की सजा मिली। 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान घर की कुर्की हो गई। देश को आजादी दिलाने के बाद जून 1968 में उनका निधन हो गया। संवाद

बोले लोग
आजादी के बाद भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के गांव में सड़क नहीं पहुंचना उनका अपमान है। गांवों में बुनियादी सुविधाएं नहीं और यहां से पलायन रोकने के दावे हो रहे हैं। -अमित नेगी, ग्राम प्रधान।

कई बार सड़क निर्माण के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटे। लेकिन निराशा ही हाथ लगी है। यदि गांव तक सड़क पहुंचती तो यह स्वतंत्रता सेनानी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। -शोभा रौतेला, जिला पंचायत सदस्य, मोवड़ी।

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का गांव आज भी सड़क सुविधा से वंचित है। केवल स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर स्वतंत्रता सेनानियों को याद किया जाता है। इसके बाद उन्हें भुला दिया जाता है। -दीपक नेगी


कोट
सड़क निर्माण के लिए वन भूमि हस्तांतरित हो चुकी है। डीपीआर स्वीकृति के लिए भेजी गई है। उम्मीद है जल्द सड़क का निर्माण शुरू होगा। - कुंदन सिंह बिष्ट, सहायक अभियंता, लोनिवि, रानीखेत
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