{"_id":"68ffb82d0b693db303050e14","slug":"the-pharmaceutical-factory-that-once-provided-livelihoods-to-500-workers-needs-treatment-almora-news-c-232-1-ha11012-135622-2025-10-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Almora News: कभी 500 मजदूरों को आजीविका देने वाली दवा फैक्टरी को इलाज की जरूरत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Almora News: कभी 500 मजदूरों को आजीविका देने वाली दवा फैक्टरी को इलाज की जरूरत
Mon, 27 Oct 2025 11:51 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Mon, 27 Oct 2025 11:51 PM IST
विज्ञापन
रानीखेत (अल्मोड़ा)। भले ही पहाड़ों में उद्योग स्थापित कर बेरोजगारों को रोजगार देने के दावे हो रहे हैं लेकिन पूर्व में स्थापित उद्योग बंद कर लोगों का रोजगार छीना जा रहा है।
रानीखेत में स्थापित सरकारी दवा फैक्टरी वर्ष 2023 में निजी हाथों में सौंप दी गई थी लेकिन इसके बाद कंपनी ने भी इसके संचालन से किनारा कर लिया।
अब दवा फैक्ट्री अपना अस्तित्व बचाने की बांट जोह रही है। अनदेखी के कारण यहां अब सिर्फ 11 कर्मचारी कार्य कर रहे हैं। रानीखेत में स्थापित दवा फैक्टरी की राज्य गठन से पूर्व देश-दुनिया में अलग पहचान थी। 80 के दशक तक फैक्टरी में करीब 500 से अधिक कामगार नौकरी कर रोजगार से जुड़े थे।
राज्य गठन के बाद हिमालयी जड़ी-बूटियों का संरक्षण और आयुर्वेदिक दवाओं का निर्माण करने वाली यह सरकारी दवा फैक्टरी अपना अस्तित्व नहीं बचा सकी और इसे निजी हाथों में सौंप दिया गया। उम्मीद थी कि कुछ बेहतर होगा लेकिन नए उद्योग स्थापित कर रोजगार के द्वार खोलने के सरकारी दावे खोखले साबित हो रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
रानीखेत में स्थापित सरकारी दवा फैक्टरी वर्ष 2023 में निजी हाथों में सौंप दी गई थी लेकिन इसके बाद कंपनी ने भी इसके संचालन से किनारा कर लिया।
अब दवा फैक्ट्री अपना अस्तित्व बचाने की बांट जोह रही है। अनदेखी के कारण यहां अब सिर्फ 11 कर्मचारी कार्य कर रहे हैं। रानीखेत में स्थापित दवा फैक्टरी की राज्य गठन से पूर्व देश-दुनिया में अलग पहचान थी। 80 के दशक तक फैक्टरी में करीब 500 से अधिक कामगार नौकरी कर रोजगार से जुड़े थे।
विज्ञापन
राज्य गठन के बाद हिमालयी जड़ी-बूटियों का संरक्षण और आयुर्वेदिक दवाओं का निर्माण करने वाली यह सरकारी दवा फैक्टरी अपना अस्तित्व नहीं बचा सकी और इसे निजी हाथों में सौंप दिया गया। उम्मीद थी कि कुछ बेहतर होगा लेकिन नए उद्योग स्थापित कर रोजगार के द्वार खोलने के सरकारी दावे खोखले साबित हो रहे हैं।
विज्ञापन