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मेनका ने दी माता की चिता को मुखाग्नि
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा
Updated Mon, 08 Jun 2015 12:24 AM IST
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रुढ़िवादी विचारधारा को तोड़ते हुए वाराणसी की एक महिला ने अपनी माता के शव को न केवल कंधा दिया, वरन शमशान घाट पहुंचकर चिता को मुखाग्नि भी दी। महिला द्वारा चिता को मुखाग्नि देने का रानीखेत क्षेत्र में यह पहला मामला है।
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यह महिला वाराणसी से वृद्ध माता के साथ अपने पति से मिलने यहां चिलियानौला जीडी बिड़ला स्कूल आई थी, लेकिन रात में माता का निधन हो गया। महिला के भाई नहीं हैं, इसीलिए उसने सामाजिक विचारों की परवाह न करते हुए समाज के लिए एक नई मिसाल पेश की है।
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यहां चिलियानौला स्थित जीडी बिड़ला मेमोरियल स्कूल में हिंदी विषय के शिक्षक मिथिलेश कुमार मिश्रा की 62 वर्षीय सास माधुरी त्रिपाठी शनिवार की दोपहर अपनी पुत्री डा. मेनका मिश्रा के साथ यहां रानीखेत आई थी। रात को दोनों जीडी बिड़ला स्कूल के स्टाफ क्वार्टर में रहे।
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बताया जाता है कि शनिवार की देर रात 10 बजे माधुरी त्रिपाठी की अचानक मृत्यु हो गई। माधुरी त्रिपाठी की एकमात्र पुत्री है। रात को तय हुआ कि मिथिलेश कुमार चिता को मुखाग्नि देंगे। जैसे ही सुबह शवयात्रा शुरू हुई तो डा. मेनका मिश्रा ने माता की चिता को स्वयं मुखाग्नि देने की बात कही।
यह सुनकर सब लोग आश्चर्य चकित रह गए। डा. मेनका ने ने केवल शवयात्रा में शामिल हुई बल्कि उन्होंने मां की अर्थी को कंधा भी लगाया और मुक्तिघाट पहुंचकर उन्होंने पूरे विधि-विधान से माता की चिता को मुखाग्नि दी। मुखाग्नि देते वक्त मेनका की आंखें काफी नम थी। उन्होंने बताया कि माता की अस्थियों को वह बनारस ले जाकर गंगा में विसर्जित करेंगी।
मुक्तिधाम में जनसेवा समिति के अध्यक्ष सतीश पांडे और उनकी टीम ने सभी व्यवस्थाएं देखी और अंत्येष्टि कराई। पांडे ने बताया कि किसी महिला द्वारा चिता को मुखाग्नि देने का यह रानीखेत क्षेत्र में पहला मामला है। वहां सुनील कुमार, बिड़ला स्कूल के जिया खान आदि शिक्षक आदि कर्मचारी मौजूद थे।