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कूड़े के ढेरों ने छावनी की खूबसूरती पर लगाया बट्टा
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा
Updated Tue, 24 Oct 2017 10:20 PM IST
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रानीखेत में बिखरा कूड़ा।
- फोटो : अमर उजाला
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आखिर कब सुधरेगी पर्यटन नगरी की सफाई व्यवस्था। यह सवाल आज अमूमन हर व्यक्ति की जुबां पर है। कभी बाहर से आने वाले लोग भी अंग्रेजों की बसाई इस नगरी की खूबसूरती की दाद देते थे, लेकिन वर्तमान में जगह-जगह पड़े कूड़े के ढेरों ने इसकी खूबसूरती पर बट्टा लगा दिया है। तमाम कोशिशों के बावजूद सफाई व्यवस्था पटरी पर नहीं आ पा रही है।
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छावनी परिषद ने व्यवस्था ठेके पर दी है पर लोगों ने ठेका व्यवस्था पर ही सवाल उठा दिए हैं। कूड़े के ढेरों से आ रही बदबू के चलते लोगों का जीना दुश्वार हो रहा है। अंग्रेजों ने 1869 में जब छावनी बसाई थी, तो यहां सफाई के विशेष इंतजाम किए गए थे। लोग बताते हैं कि छावनी की तरफ से नियमित रूप से सफाई का कार्य होता था। यहां तक की नगर की नालियों को भी दिन में दो दो बार धोया जाता था, लेकिन अब हालात बदल गए हैं। छावनी परिषद ने कर्मचारियों की कमी का हवाला देते हुए 90 लाख रुपये सालाना यह व्यवस्था ठेके पर दे दी। व्यवस्था ठेके पर जाने के बाद हालात और बदहाल हो गए हैं।
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मोहल्लों से नियमित रूप से कूड़ा नहीं उठ रहा है। कूड़ेदानों से गंदगी बाहर निकल रही है, इससे उठने वाली दुर्गंध ने नागरिकों का जीना दूभर कर दिया है। खड़ी बाजार, जरूरी बाजार क्षेत्र को सबसे अधिक बसासत वाला इलाका माना जाता है, लेकिन यहीं सफाई नहीं हो रही है। पालीक्लीनिक गली में तो हालात और खराब हैं। कैंट बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि सफाई ठेकेदार को नोटिस जारी कर दिया गया है। यदि इसके बाद भी हालात नहीं सुधरे तो कड़ी कार्रवाई करेंगे।
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