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तीनों सेनाध्यक्षों के ऊपर हो सीडीएस की तैनाती: एडमिरल जोशी

Sat, 25 Mar 2017 11:09 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा। Updated Sat, 25 Mar 2017 11:09 PM IST
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The deployment of the CDS over the three chiefs: Admiral Joshi
व्याखान को संबोधित करते डीके जोशी। - फोटो : अमर उजाला

भारत के पूर्व नौसेनाध्यक्ष एडमिरल डीके जोशी ने कहा कि सरकार से अच्छे तालमेल, सेना की बेहतरी और सेना से जुड़ी व्यवहारिक नीतियों को लागू करने के लिए देश में तीनों सेनाध्यक्षों के ऊपर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) की तैनाती की जानी चाहिए। वह बोले केंद्र सरकार द्वारा बनाई गई कई उच्च स्तरीय समितियों ने भी पूर्व में इस बारे में सुझाव दिए थे, लेकिन इस पर आज तक लागू नहीं किया जा सका है। यहां उत्तराखंड सेवा निधि में राष्ट्रीय सुरक्षा और उच्च स्तर पर रक्षा नीतियों का संचालन विषय पर अष्टम बीडी पांडे स्मृति व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए एडमिरल जोशी ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को खत्म करने के लिए हर तरह के जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने सीमा क्षेत्रों से पलायन पर भी चिंता जताई और कहा कि इस पर ध्यान दिया जाना जरूरी है। 

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अपने व्याख्यान में एडमिरल जोशी ने भारत में आजादी से पहले अंग्रेज शासन में सैन्य व्यवस्था के बारे में भी जानकारी दी और फिर आजादी के बाद पंडित नेहरू के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि वह पंचशील का जमाना था और पंडित नेहरू और तत्कालीन रक्षा मंत्री कृष्णा मेनन पावरफुल मिलिट्री के पक्षधर नहीं रहे। उसके बाद जब 1950 के दशक में चीन ने तिब्बत पर कब्जा किया तब जनरल थिमैया ने पंडित नेहरू का इस ओर ध्यान खींचा। इसके बावजूद सेना को सशक्त बनाने के खास प्रयास नहीं हो सके।
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आखिरकार 1962 की लड़ाई में हमारी सेना को बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि इस युद्ध के बाद अगले एक दशक तक भारतीय सेना को सुसज्जित करने की तरफ काफी ध्यान दिया गया। हालांकि ऑर्गनाइजेशन की दृष्टि से कोई बदलाव नहीं हुआ इसके बावजूद 1971 की लड़ाई में देश को शानदार विजय मिली। एडमिरल डीके जोशी ने कहा कि 2001 में हुए कारगिल युद्ध तक भी सेना में बदलाव के लिए खास कदम नहीं उठाए गए। कारगिल की कामयाबी को कारगिल विजय के तौर पर देखा गया, लेकिन हकीकत यह थी कि कुछ घुसपैठियों को निकालने के लिए भारी जानमाल का नुकसान उठाना पड़ा था। उसके बाद सीनियर आईएएस के सुब्रह्मण्यम की अध्यक्षता में कारगिल रिव्यू कमेटी बनाई गई। एडमिरल जोशी ने कहा कि सुब्रह्मण्यम कमेटी के अलावा 1990 के दशक में पूर्व रक्षा राज्य मंत्री अरुण सिंह की अध्यक्षता वाली कमेटी और रमेश चंद्रा कमेटी ने समय-समय पर कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए, लेकिन इन सुझावों को आज तक लागू नहीं किया जा सका। 
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 बीआईटी रांची के पूर्व कुलपति प्रो.एचसी पांडे ने एडमिरल जोशी का परिचय प्रस्तुत किया। इस मौके पर पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी, जीबी पंत पर्यावरण संस्थान के निदेशक डा.पीपी ध्यानी, पूर्व आईएएस डा. रमेश, कर्नल चंद्रशेखर पंत, जानेमाने पत्रकार सुमन दुबे, सभासद अशोक पांडे, ब्रिगेडियर केसी जोशी, कर्नल जेसी लोहनी, पूर्व दर्जा मंत्री केवल सती, पीसी तिवारी, शेखर लखचौरा, प्रो.अनिल जोशी, प्रो. एमसी दुर्गापाल, ब्रिगेडियर सरताज सिंह, वीपीकेएस के पूर्व निदेशक डा. जेसी भट्ट सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद थे। इस मौके पर अनुराधा पांडे की पुस्तक पहाड़ी स्त्रियां का भी विमोचन किया गया। 
 

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