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अपने मूल स्वरूप में वापस आया ब्रिटिशकालीन कोषागार
अमर उजाला ब्यूरो रानीखेत (अल्मोड़ा)।
Updated Mon, 10 Jul 2017 11:12 PM IST
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रानीखेत को इसी उप कोषागार का हुआ है उच्चीकरण।
- फोटो : अमर उजाला
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अंग्रेजों द्वारा स्थापित कोषागार फिर से अपने मूल स्वरूप में आ गया है। 2011 में इसे उप कोषागार कर दिया गया था, बताया गया है कि नवंबर 2016 में तत्कालीन सरकार के आदेश पर इसे फिर से उच्चीकृत कर दिया गया है। तीन जुलाई से यहां विधिवत रूप से कार्य भी शुरू हो गया है। ट्रेजरी अधिकारी ने भी पदभार ग्रहण कर लिया है। इधर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इसे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और विधायक करन माहरा की बड़ी उपलब्धि बताया है।
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रानीखेत की स्थापना के साथ-साथ 1869 में अंग्रेजों ने यहां कोषागार भी स्थापित किया। तब अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ जिलों के लोग पेंशन, वेतन लेने के लिए यहीं आते थे। स्थापना के बाद 1968 में इस कोषागार को उपकोषागार बना दिया गया। राज्य बनने के बाद 2005 में तत्कालीन सरकार ने रानीखेत सहित 10 उपकोषागारों को अपग्रेड कर कार्यालयों का कंप्यूटरीकरण भी किया गया। कोषाधिकारी यहीं बैठने लगे।
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चौबटिया स्थित उद्यान निदेशालय सहित कई विभागों का आहरण-वितरण इसी कोषागार से होता था, लेकिन अक्तूबर 2011 में अचानक कोषागार को फिर से उपकोषागार बनाने का शासनादेश जारी कर दिया गया। तब से यहां उपकोषागार संचालित हो रहा था, विभागों के चालान, बिलों के सत्यापन का कार्य और कार्यालय के लिए सामग्री खरीद के लिए लोगों को एक बार फिर से अल्मोड़ा का मुंह ताकना पड़ रहा था। ट्रेजरी अधिकारी कमलेश भंडारी ने बताया कि नवंबर 2016 में इसके उच्चीकरण के आदेश हो गए थे। इधर, तीन जुलाई से विधिवत रूप से कोषागार का कार्य शुरू हो गया है।
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पूर्व सीएम रावत और करन का जताया आभार
रानीखेत। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बैठक कर कहा कि उप कोषागार के उच्चीकरण के लिए पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और विधायक करन माहरा का आभार जताया है। कहा कि उप कोषागार होने से लोगों को फजीहत झेलनी पड़ रही थी। 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इसके उच्चीकरण के आदेश जारी कर दिए थे। बैठक में एडवोकेट हिमांशु बिष्ट, महेंद्र बिष्ट, ललित आर्य, हवीब भाई, उमेश भट्ट, अगस्त लाल, चरन भाई, गोपाल देव, चंदन बिष्ट, कमल तिवारी आदि मौजूद थे।