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जीवंत हो उठी पाली पछाऊं की प्राचीन संस्कृति
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Fri, 14 Apr 2017 10:35 PM IST
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मेले में झोड़ा गायन प्रस्तुत करतीं महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला
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पाली पछाऊं की प्राचीन संस्कृति शुक्रवार को सड़कों पर जीवंत हो उठी। मौका था ऐतिहासिक स्याल्दे विखोती मेले का। पहली बार शुरू की गई इस सांस्कृतिक झलकियाें के तहत विद्यालयी बच्चों ने आकर्षक झाकियां निकाल लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
नगर में शुक्रवार को विवेकानंद इंटर कालेज के बच्चों ने गंगा सफाई अभियान के झांकी प्रस्तुत की।
सरस्वती शिशु मंदिर के बच्चों ने फूलों की घाटी, एमडी तिवारी हाइस्कूल दैरी ने फूलदेयी संक्रांति की झलकियां पेश कीं। दूनागिरि माडर्न जूनियर हाईस्कूल ने पारंपरिक कुमाऊंनी बरात के दृश्य दिखाए। द्रोण पब्लिक स्कूल पूजाखेत के बच्चों का छोलिया नृत्य और झोड़ा, चांचरी गायन मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा। झांकियां घटगाड़ से शुरू होकर पूरे नगर में गुजरी। लोगों ने इस कार्यक्रम की सराहना की।
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नगर में शुक्रवार को विवेकानंद इंटर कालेज के बच्चों ने गंगा सफाई अभियान के झांकी प्रस्तुत की।
सरस्वती शिशु मंदिर के बच्चों ने फूलों की घाटी, एमडी तिवारी हाइस्कूल दैरी ने फूलदेयी संक्रांति की झलकियां पेश कीं। दूनागिरि माडर्न जूनियर हाईस्कूल ने पारंपरिक कुमाऊंनी बरात के दृश्य दिखाए। द्रोण पब्लिक स्कूल पूजाखेत के बच्चों का छोलिया नृत्य और झोड़ा, चांचरी गायन मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा। झांकियां घटगाड़ से शुरू होकर पूरे नगर में गुजरी। लोगों ने इस कार्यक्रम की सराहना की।
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