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बागानों में चाय की पत्तियां तैयार, तोडने का कार्य शुरू
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सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए कौसानी बागान में चाय की पत्तियां तोड़ते श्रमिक।
- फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। प्रदेश के चाय बागानों में चाय के पेड़ लहलहा रहे हैं। बागानों में चाय के पेड़ों में पत्तियां तैयार हो गई हैं। लॉकडाउन शुरू होने पर बागानों में भी काम नहीं हुआ। अब शासन से अनुमति लेने के बाद बोर्ड ने चाय बागानों में तैयार हुई हरी पत्तियां तोड़ने का काम शुरू कर दिया है। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए बागानों में प्रतिदिन 1600 कर्मचारी कार्य कर रहे हैं। इसके अलावा चार फैक्ट्रियों में चाय प्रोसेसिंग भी शुरू कर दी गई है।
चाय बोर्ड के माध्यम से प्रदेश के नौ पर्वतीय जिलों में 1350 हेक्टेयर में चाय की खेती होती है। इसमें से 650 हेक्टयर क्षेत्र में चाय का उत्पादन होता है। अप्रैल में चाय के पौधों में पत्तियां तैयार हो गई हैं। शासन से अनुमति लेने के बाद बोर्ड ने लॉकडाउन में बागानों और फैक्ट्रियों में काम शुरू कर दिया है। बोर्ड के अंतर्गत कुल चार हजार श्रमिक कार्य करते हैं।
लॉकडाउन अवधि में 3200 श्रमिकों से एक दिन छोड़कर कार्य लिया जा रहा है। प्रतिदिन 1600-1600 श्रमिकों को कार्य पर लगाया जा रहा है। 650 हेक्टेयर में चाय की पत्तियां तोड़ने का काम शुरू हो गया है, जबकि शेष 700 हेक्टेयर क्षेत्र में चाय बागानों में पौधों की देखरेख में श्रमिक लगाए गए हैं।
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श्यामखेत (नैनीताल), हरीनगरी (गरुड़), चंपावत और भटोली (चमोली) स्थित फैक्ट्रियों को भी चालू कर दिया गया है। चाय बोर्ड के वित्त अधिकारी अनिल खोलिया ने बताया कि कोरोना संक्रमण को देखते हुए शासन के निर्देशों का पूरा पालन किया जा रहा है। श्रमिकों को मार्च के वेतन का 1.25 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया है। आगामी वित्तीय वर्ष के लिए बोर्ड ने शासन से 21 करोड़ रुपये की मांग की है।
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चाय बोर्ड के माध्यम से प्रदेश के नौ पर्वतीय जिलों में 1350 हेक्टेयर में चाय की खेती होती है। इसमें से 650 हेक्टयर क्षेत्र में चाय का उत्पादन होता है। अप्रैल में चाय के पौधों में पत्तियां तैयार हो गई हैं। शासन से अनुमति लेने के बाद बोर्ड ने लॉकडाउन में बागानों और फैक्ट्रियों में काम शुरू कर दिया है। बोर्ड के अंतर्गत कुल चार हजार श्रमिक कार्य करते हैं।
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लॉकडाउन अवधि में 3200 श्रमिकों से एक दिन छोड़कर कार्य लिया जा रहा है। प्रतिदिन 1600-1600 श्रमिकों को कार्य पर लगाया जा रहा है। 650 हेक्टेयर में चाय की पत्तियां तोड़ने का काम शुरू हो गया है, जबकि शेष 700 हेक्टेयर क्षेत्र में चाय बागानों में पौधों की देखरेख में श्रमिक लगाए गए हैं।
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श्यामखेत (नैनीताल), हरीनगरी (गरुड़), चंपावत और भटोली (चमोली) स्थित फैक्ट्रियों को भी चालू कर दिया गया है। चाय बोर्ड के वित्त अधिकारी अनिल खोलिया ने बताया कि कोरोना संक्रमण को देखते हुए शासन के निर्देशों का पूरा पालन किया जा रहा है। श्रमिकों को मार्च के वेतन का 1.25 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया है। आगामी वित्तीय वर्ष के लिए बोर्ड ने शासन से 21 करोड़ रुपये की मांग की है।