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ऐतिहासिक स्याल्दे विखोती मेले में इस बार नहीं होंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम
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स्याल्दे विखोती मेले की तैयारियों को लेकर बैठक करते पूर्व विधायक पुष्पेश और नगर पंचायत अध्यक्ष।
- फोटो : RANIKHET
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द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। 13 अप्रैल से प्रस्तावित ऐतिहासिक स्याल्दे विखोती मेले के आयोजन को लेकर संशय दूर हो गया है। इस बार मेला होगा लेकिन चकाचौंध से दूर रहेगा।
बाहर से न तो व्यापारी आएंगे न ही झूले, चरखे आदि लगेंगे। सांस्कृतिक कार्यक्रम भी नहीं होंगे। हालांकि तीन दिवसीय मेेले में झोड़े, चांचरी और ओड़ा भेंटने की रस्म अदा की जाएगी।
पिछले साल कोरोना संक्रमण के चलते मेले का आयोजन नहीं हो सका था। नगर पंचायत सभागार में मेला समिति अध्यक्ष मुकेश लाल साह की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई बैठक में मेले के आयोजन पर बात की गई। तय हुआ कि इस बार बाहर से आने वाले व्यापारी दुकानें नहीं सजा सकेंगे। झूले चरखे नहीं लगेंगे।
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इसके अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी नहीं होंगे। इस बार सिर्फ पारंपरिक संस्कृति से संबंधी झोड़े, चांचरी मुख्य आकर्षण का केंद्र होंगे। 13 अप्रैल को शाम चार बजे रंणा के ग्रामीण नगाड़े निशानों के साथ विमांडेश्वर मंदिर परिक्रमा से मेले का शुभारंभ करेंगे। 14 अप्रैल को द्वाराहाट में बटपुजै मेला और 15 को मुख्य स्याल्दे मेला होगा।
इस बार मीना बाजार भी नहीं लगेगा। बैठक में पूर्व विधायक पुष्पेश त्रिपाठी, मेला समिति उपाध्यक्ष हेम रावत, उपजिलाधिकारी आरके पांडेय, तहसीलदार लीना चंद्रा, कैलाश भट्ट, प्रताप सिंह बिष्ट, विखोती मेला अध्यक्ष रमेश चंद्र पुजारी, जगदीश बुधानी, आशीष वर्मा, भूपेंद्र कांडपाल, आल पार्टी उपाध्यक्ष जगत सिंह रौतेला, गरख पार्टी उपाध्यक्ष नरेंद्र सिंह अधिकारी, नौज्यूला पार्टी उपाध्यक्ष गिरीश चंद्र चौधरी आदि थे।
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बाहर से न तो व्यापारी आएंगे न ही झूले, चरखे आदि लगेंगे। सांस्कृतिक कार्यक्रम भी नहीं होंगे। हालांकि तीन दिवसीय मेेले में झोड़े, चांचरी और ओड़ा भेंटने की रस्म अदा की जाएगी।
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पिछले साल कोरोना संक्रमण के चलते मेले का आयोजन नहीं हो सका था। नगर पंचायत सभागार में मेला समिति अध्यक्ष मुकेश लाल साह की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई बैठक में मेले के आयोजन पर बात की गई। तय हुआ कि इस बार बाहर से आने वाले व्यापारी दुकानें नहीं सजा सकेंगे। झूले चरखे नहीं लगेंगे।
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इसके अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी नहीं होंगे। इस बार सिर्फ पारंपरिक संस्कृति से संबंधी झोड़े, चांचरी मुख्य आकर्षण का केंद्र होंगे। 13 अप्रैल को शाम चार बजे रंणा के ग्रामीण नगाड़े निशानों के साथ विमांडेश्वर मंदिर परिक्रमा से मेले का शुभारंभ करेंगे। 14 अप्रैल को द्वाराहाट में बटपुजै मेला और 15 को मुख्य स्याल्दे मेला होगा।
इस बार मीना बाजार भी नहीं लगेगा। बैठक में पूर्व विधायक पुष्पेश त्रिपाठी, मेला समिति उपाध्यक्ष हेम रावत, उपजिलाधिकारी आरके पांडेय, तहसीलदार लीना चंद्रा, कैलाश भट्ट, प्रताप सिंह बिष्ट, विखोती मेला अध्यक्ष रमेश चंद्र पुजारी, जगदीश बुधानी, आशीष वर्मा, भूपेंद्र कांडपाल, आल पार्टी उपाध्यक्ष जगत सिंह रौतेला, गरख पार्टी उपाध्यक्ष नरेंद्र सिंह अधिकारी, नौज्यूला पार्टी उपाध्यक्ष गिरीश चंद्र चौधरी आदि थे।