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मसाला आधारित खेती से जंगली जानवरों से छुटकारा मिलेगा
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Thu, 20 Apr 2017 10:48 PM IST
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हल्दी के बीज ले जाते किसान।
- फोटो : अमर उजाला
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बंदर, सुअरों के आतंक से परेशान ग्रामीणों को अब मसाला आधारित खेती की ओर अग्रसर किया जा रहा है। मसाले की खेती को बंदर और सुअर नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। यदि यह योजना सफल रही तो ग्रामीणों को इससे आर्थिक लाभ मिलेगा। इसी के तहत उद्यान विभाग और होप संस्था की ओर से धूराफाट के मंडलकोट में ग्रामीणों को हल्दी बीज वितरित किया गया।
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मालूम हो कि पर्वतीय क्षेत्र में बंदर, सुअरों ने खेती बर्बाद कर दी है, जिस कारण ग्रामीण खेती से विमुख हो रहे हैं। अब मसाला आधारित खेती करने पर जोर दिया जा रहा है। जिला उद्यान अधिकारी भावना जोशी ने बताया कि हल्दी की सुवर्णा प्रजाति के बीज हिमाचल से मंगाए गए हैं। 2.5 हेक्टेयर क्षेत्र में इसे उत्पादित किया जाना है। किसानों को इसे 75 फीसदी अनुदान पर दिया जा रहा है।
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फिलहाल 35 क्विंटल बीज बांटा गया है। होप संस्था के सचिव प्रकाश जोशी ने कहा कि ग्रामीण मसाला आधारित खेती की ओर अग्रसर हों और अधिक से अधिक क्षेत्रफल में हल्दी आदि का उत्पादन करें। उन्होंने कहा कि हल्दी की पत्तियों से तेल भी निकाला जा सकता है। इससे दोहरा लाभ मिलेगा। एडीओ इंद्र लाल ने हल्दी लगाने के तरीके बताए। पर्यवेक्षक राम सिंह नेगी ने कहा कि हल्दी लगाने के बाद इसे गोबर की खाद और सूखी पत्तियों से ढक देना चाहिए। प्रधान हेमा नेगी, दीपा नेगी, भीगीरथ पांडे, जीत सिंह, खुशाल सिंह बिष्ट, राम सिंह नेगी, भीम राम ने विभाग से हल्दी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बायो फर्टिलाइजर उपलब्ध कराने की मांग उठाई।
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