विश्व कैंसर दिवस पर विशेष: एचपीवी टीके से खत्म किया जा सकता है बच्चेदानी के मुंह के कैंसर का खतरा
नौ से 15 वर्ष तक की बेटियों को लगाया जाता है यह टीका, कैंसर पीड़ित 50 से 60 फीसदी महिलाएं बच्चेदानी के मुंह के कैंसर से ही पीड़ित।
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नौ से 15 वर्ष तक की लड़कियों को अगर एचपीवी (ह्यूमन पेपिलोमा वायरस) का टीका लग जाए तो बच्चेदानी के मुंह का कैंसर का खतरा 90 फीसदी तक कम किया जा सकता है। पूर्वांचल में महिला कैंसर रोगियों में 50 से 60 फीसदी मरीज इसी कैंसर से पीड़ित हैं।
वहीं बाकी 45 से 50 फीसदी महिलाओं में स्तन कैंसर है। पुरुषों में 60 से 70 प्रतिशत मामले मुंह के कैंसर के आ रहे हैं। जागरुकता के अभाव में इससे पीड़ित मरीज ऐसे समय इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, जब कैंसर दूसरे या तीसरे स्टेज में पहुंच जा रहा है।
हनुमान प्रसाद पोद्दार कैंसर हॉस्पिटल के कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ एचबी सिंह ने बताया कि बच्चेदानी के मुंह के कैंसर को ही सर्वाइकल कैंसर भी कहते हैं। साफ-सफाई के अभाव और असुरक्षित शारीरिक संबंध बनाने से एक विषाणु से बच्चेदानी के मुंह पर संक्रमण हो जाता है। इस संक्रमण को कैंसर बनने में लगभग आठ से 10 साल का समय लग जाता है। अगर नौ से 15 वर्ष की उम्र की बेटियां एचपीवी टीका लगवा लें तो 90 फीसदी मामलों में कैंसर होने से बचा जा सकता है।
यूं तो यह टीका बच्चियों को ही लगाया जाता है, लेकिन अब इसे 26 वर्ष की युवतियों और महिलाओं को भी लगाया जा रहा है। पहले इस टीके की तीन डोज दी जाती थी, अब केवल दो डोज ही दी जाती है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के कैंसर रोग के विभागाध्यक्ष डॉ राकेश रावत ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में आने वाले रोगियों में सबसे अधिक मुंह व गले के कैंसर से पीड़ित हैं। इसका मुख्य कारण पान मसाला, गुटखा, तंबाकू व सिगरेट आदि है। दूसरे नंबर पर बच्चेदानी के मुंह के कैंसर के रोगी हैं। स्तन कैंसर तीसरे नंबर पर है। जबकि अन्य कैंसरों में पित्ताशय, फेफड़ों के कैंसर है।
शहर की महिलाओं में स्तन कैंसर ज्यादा
डॉ एचबी सिंह ने बताया कि शहर की महिलाओं में स्तन कैंसर के मामले ज्यादा मिल रहे हैं। जबकि ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं में बच्चेदानी का कैंसर मिल रहा है। इसकी वजह यह है कि ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं साफ-सफाई पर ध्यान नहीं दे रही है।
तीन से चार प्रतिशत बच्चे भी कैंसर के हो रहे शिकार
डॉ एचबी सिंह ने बताया कि तीन से चार प्रतिशत बच्चे भी कैंसर की जद में आ रहे हैं। बच्चों में मसल्स कैंसर और गांठ कैंसर की शिकायतें मिल रही हैं। ऐसे में अगर समय रहते लोग टीका लगवा लें तो कई कैंसर से बच्चों को बचाया जा सकता है।
कैंसर होने के कारण
- तंबाकू व उससे बने उत्पादों का सेवन।
- लंबे समय तक शराब का सेवन।
- जंक फूड व फास्ट का अत्यधिक प्रयोग।
- अनुवांशिक दोष।
- शरीर में गांठें बनना।
- बार-बार एक्स-रे करवाना, मोटापा।
- अचानक शरीर का वजन बढ़ना या कम होने लगना।
- कमजोरी व थकान महसूस होना।
- त्वचा के नीचे गांठ बनना या घाव बन जाने के बाद दो से तीन सप्ताह तक ठीक न होना।
- बोलने में दिक्कत महसूस होना।
- बार-बार बुखार आना।
- भूख कम लगना।
डॉक्टरों ने क्या कहा
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ज्यादातर मामले मुंह व गले के कैंसर के आ रहे हैं, इसकी बड़ी वजह तंबाकू और गुटखा है। लोगों को इनसे बचने की जरूरत है। जीवन शैली में बदलाव करके कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों से बचा जा सकता है।- डॉ. राकेश रावत, अध्यक्ष, कैंसर रोग विभाग, बीआरडी मेडिकल कॉलेज।कैंसर का इलाज अब काफी आसान हो गया है। अगर सही समय पर मरीज इलाज के लिए आ जाएं तो ऑपरेशन, रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी से मरीज ठीक हो जाते हैं। लेकिन, पूर्वांचल में लोग देरी से इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। अब कई ऐसी मशीनें भी आ गईं हैं, जिससे बिना ऑपरेशन के ही थेरेपी करके मरीजों का इलाज किया जा रहा है। - डॉ. एचबी सिंह, कैंसर रोग विशेषज्ञ, हनुमान प्रसाद पोद्दार कैंसर अस्पताल।