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अल्मोड़ा जेल से रंगदारी: कभी रेस्टोरेंट तो कभी डांस क्लब में तब्दील हो जाती थी जेल की बैरिक

Wed, 06 Oct 2021 09:46 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अल्मोड़ा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अल्मोड़ा Published by: हल्द्वानी ब्यूरो Updated Wed, 06 Oct 2021 09:46 AM IST
सार

कारागार के एंट्री रजिस्टर पर वहां आने वाले के हस्ताक्षर होते हैं और हर किसी की तलाशी भी ली जाती है फिर चाहे वह जेल का कर्मचारी हो या कैदियों से मिलने के लिए आने वाले लोग। बैरकों में बंद कैदियों पर भी कड़े पहरे के बीच पैनी नजर रखी जाती है। ऐसे में अल्मोड़ा जिला जेल में रंगदारी का इतना बड़ा खेल होना बेहद चौंकाने वाला है।

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Sometimes the barricade of Almora Jail was converted into a restaurant and sometimes a dance club.
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media

विस्तार

अल्मोड़ा जिला जेल से रंगदारी के खेल ने जेल के कई राज खोले हैं। जेल में कैद होकर भी रंगदारी मांगने वाला आरोपी कलीम अपनी बैरक में पूरे शान से जीवन जी रहा था। कलीम के चाहने पर जेल की बैरक कभी भी रेस्टोरेंट में तब्दील हो जाती थी। इसमें रेस्टोरेंट की तर्ज पर कई तरह का खाना परोसा जाता था। मनोरंजन के लिए बैरक में डांस पार्टी भी चलती थी। जेल प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी।
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रंगदारी का इतना बड़ा खेल होना बेहद चौंकाने वाला
जेल की सुरक्षा व्यवस्था को सबसे महत्वपूर्ण और सटीक माना जाता है। सुरक्षा के लिए जेल में कड़े इंतजाम होते हैं जिनका पालन एक साधारण कैदी से लेकर जेलर तक को करना पड़ता है। जेल के भीतर प्रवेश के मानक भी बेहद कड़े होते हैं। कारागार के एंट्री रजिस्टर पर वहां आने वाले के हस्ताक्षर होते हैं और हर किसी की तलाशी भी ली जाती है फिर चाहे वह जेल का कर्मचारी हो या कैदियों से मिलने के लिए आने वाले लोग।
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बैरकों में बंद कैदियों पर भी कड़े पहरे के बीच पैनी नजर रखी जाती है। ऐसे में अल्मोड़ा जिला जेल में रंगदारी का इतना बड़ा खेल होना बेहद चौंकाने वाला है। सूत्रों के अनुसार जेल की जिस बैरक में आरोपी कलीम रहता था, उसमें अक्सर पार्टियां चलतीं थीं। पार्टी में तरह-तरह के खाने का सामान होता था और पार्टी में कैैदी डांस भी करते थे। इसी बैरक से रंगदारी के लिए फोन भी किए जाते थे।
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जेल में रंगदारी मामला: प्रभारी जेल अधीक्षक समेत चार कर्मचारी निलंबित

नियमानुसार शाम के समय बैरक बंद होने के बाद बैरक के बाहर सुरक्षा गार्ड पहरे पर रहते हैं लेकिन इसके बाद भी कैदी के फोन पर बात करने की भनक किसी को नहीं लगी या फिर सुनकर उसे अनदेखा किया गया। ऐसे में जेल प्रशासन पर किस तरह की कार्रवाई हो सकती है यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।

रंगदारी कांड में शहर के कुछ और लोग भी शामिल
जेल से कैदी द्वारा रंगदारी मांगे जाने के मामले में पुलिस और एसटीएफ के हाथ कुछ और अहम सुराग लगे हैं। रंगदारी मांगने के बाद रंगदारी की रकम चालक ललित भट्ट के खाते में आती थी, जिसे ललित कलीम को सौंपता था और कलीम उसे संभालने के लिए एक और कैदी महिपाल को देता था। ललित के खाते से भी दस लाख रुपये का ट्रांजेक्शन मिला है। इसी तरह शहर के एक अन्य व्यक्ति के खाते में भी रंगदारी की रकम मंगाई जाती थी। शहर के ही कुछ और लोगों के भी पूरे खेल में शामिल होने के साक्ष्य पुलिस और एसटीएफ को मिले हैं।

13 घंटे तक जुटी रही एसटीएफ और पुलिस
जिला जेल से रंगदारी के मामले को उजागर करने के लिए एसटीएफ और पुलिस को 13 घंटे की मेहनत करनी पड़ी। छापा मारने के लिए एसटीएफ और पुलिस कर्मी सोमवार शाम करीब तीन बजे जेल में पहुंच गए थे। करीब तीन घंटे की मेहनत के बाद पुलिस को मौके से रकम, मोबाइल, सिम और चरस बरामद हुई। इसके बाद कागजी कार्रवाई करते हुए पुलिस और एसटीएफ को मंगलवार सुबह पांच बजे तक का समय जेल में ही बिताना पड़ा।

चार लाख से अधिक रकम मिलने का था अंदेशा
सूत्रों के अनुसार जिला जेल से रंगदारी के मामले में पुलिस और एसटीएफ को जो इनपुट मिले थे, उसके अनुसार कैदी से चार लाख से अधिक की रकम मिलने का अंदेशा था। अंदेशा जताया जा रहा है कि आरोपी कलीम को इस बात की जानकारी मिली थी कि उसे टिहरी जेल में शिफ्ट किया जा रहा है। इसके बाद उसने जेल के बाहर रहने वाले अपने सहयोगियों की मदद से कुछ और रकम को ठिकाने लगा दिया।

जेल अधीक्षक ने की थी कलीम के ट्रांसफर की मांग
जिला जेल अधीक्षक संजीव ह्यांकी भी आरोपी कलीम की दबंगई से परेशान थे। कई बार उन्होंने कलीम की हरकतों को रोकने के लिए सख्तीभी की लेकिन कलीम की हरकतें बंद नहीं हुईं। संजीव ह्यांकी ने बताया कि जेल में एसटीएफ के छापे से करीब दो सप्ताह पहले ही उन्होंने पुलिस मुख्यालय को कलीम को किसी अन्य जेल में शिफ्ट किए जाने के संबंध में पत्र लिखा था। इस पर मुख्यालय ने अमल कर कलीम को शिफ्ट करने के आर्डर भी दिए थे। ह्यांकी का भी मानना है कि जेल के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से ही इतना बड़ा प्रकरण जेल में हो गया।


खुलासा करने वाली टीम
जेल से रंगदारी के मामले का खुलासा करने वाली टीम में एसटीएफ कुमाऊं प्रभारी एमपी सिंह, एसआई बृजभूषण गुरूरानी, केजी मठपाल, हेड कांस्टेबल प्रकाश भगत, कांस्टेबल सुरेंद्र कनवाल, किशोर कुमार, प्रमोद रौतेला, अल्मोड़ा एलआईयू प्रभारी कमल कुमार पाठक, एसओजी प्रभारी नीरज भाकुनी, थाना प्रभारी सामेश्वर राजेंद्र बिष्ट, एसओ भतरोजखान अनीश अहमद, कांस्टेबल दिनेश नगरकोटी, दीपक खनका आदि शामिल थे।

जेलों में नहीं लग सके मोबाइल जैमर
जेल में बंद कैदियों की ओर से मोबाइल का इस्तेमाल करने के कई मामले प्रकाश में आए हैं। इस पर रोक लगाने के लिए कुछ समय पूर्व पुलिस मुख्यालय ने जेलों में मोबाइल जैमर लगाने का निर्णय लिया था। आईजी जेल पुष्पक ज्योति ने बताया कि जैमर लगाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। कुछ और भी बदलाव जेलों में करना है। प्रस्ताव स्वीकृत होने के बाद जैमर लगाने की कार्रवाई की जाएगी।
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