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समाज महिलाओं के प्रति अपना दृष्टिकोण बदलें: ढौंडियाल
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अल्मोड़ा। एसएसजे विश्वविद्यालय अल्मोड़ा में शिक्षाशास्त्र की ओर से आयोजित कार्यशाला में चौथे दिन लैगिंक समानता पर व्याख्यान दिया गया। वक्ताओं ने ट्रांसजेंडर समुदाय को भी समाज की मुख्यधारा में जोड़ने पर जोर दिया गया। इस मौके पर शिक्षाशास्त्र संकायाध्यक्ष प्रोफेसर विजयारानी ढौंडियाल ने कहा कि समाज को महिलाओं के प्रति अपना दृष्टिकोण बदलना चाहिए।
डॉ. देवेंद्र सिंह चम्याल ने कहा कि जिस समाज में लैंगिक समानता होती है उस समाज में विकास रूपी इमारत बनाई जा सकती है। महिला और पुरुष समाज के मूल आधार हैं। समानता एक सुरक्षित, सुंदर और विकसित समाज की नीव है। लैंगिक असमानता एक खाई के समान है। सरकार भले ही कानूनी तौर पर लैंगिक समानता लाने का प्रयास कर रही है लेकिन लोगों को भी अपने विचारों से व्यवहारिक तौर पर समानता लानी होगी। तभी लैंगिक समानता आएगी।
प्रोफेसर भीमा मनराल ने कहा कि समाज के समुचित विकास के लिए लैंगिक विभेदता की खाई को पाटना जरूरी है। अन्यथा विकास की कल्पना करना निरर्थक है। छात्रों ने कहा कि लैंगिक विभेदता लाने के लिए सरकार जो भी कानून या प्रावधान करती है उसका दुरुपयोग नहीं होना चाहिए।
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डॉ. देवेंद्र सिंह चम्याल ने कहा कि जिस समाज में लैंगिक समानता होती है उस समाज में विकास रूपी इमारत बनाई जा सकती है। महिला और पुरुष समाज के मूल आधार हैं। समानता एक सुरक्षित, सुंदर और विकसित समाज की नीव है। लैंगिक असमानता एक खाई के समान है। सरकार भले ही कानूनी तौर पर लैंगिक समानता लाने का प्रयास कर रही है लेकिन लोगों को भी अपने विचारों से व्यवहारिक तौर पर समानता लानी होगी। तभी लैंगिक समानता आएगी।
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प्रोफेसर भीमा मनराल ने कहा कि समाज के समुचित विकास के लिए लैंगिक विभेदता की खाई को पाटना जरूरी है। अन्यथा विकास की कल्पना करना निरर्थक है। छात्रों ने कहा कि लैंगिक विभेदता लाने के लिए सरकार जो भी कानून या प्रावधान करती है उसका दुरुपयोग नहीं होना चाहिए।
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