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पेड़ों पर बंधे मिले जानवरों के कंकाल
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बैजनाथ की वन पंचायत में जानवरों के कंकाल।
- फोटो : GARUD
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गरुड़ (बागेश्वर)। क्षेत्र में लावारिस गोवंशीय (गाय और बैल) पशुओं को बैजनाथ वन पंचायत के आरक्षित जंगल में पेड़ों से बांधकर मार डालने का मामला सामने आया है। जंगल में दुर्गंध आने पर मामले का खुलासा हुआ। इस माह हुई घटना में 12 और दो माह पहले बलिबुबु मंदिर उड़खुली गांव के पास भी ऐसी घटना में आठ से अधिक पशुओं को मारे जाने की आशंका जताई गई है।
बैजनाथ, भकुनखोला, गढ़सेर, स्याल्दे टीट, नौघर, टीट बाजार के ग्रामीण लावारिस जानवरों से तंग आ चुके थे। इन गांवों के लोगों ने कुछ माह पूर्व एसडीएम गरुड़ को कई बार ज्ञापन सौंपकर आवारा जानवरों को गोशाला में रखने की मांग की, लेकिन प्रशासन ने किसानों की मांग को गंभीरता से नहीं लिया।
दबी जुबान से कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ दिन पहले क्षेत्र के ही 24 से अधिक लोग लावारिस गाय और बैलों को बैजनाथ वन पंचायत और बलिबुबु के मंदिर तक ले गए। वहां उन्होंने इन जानवरों को चीड़ के पेड़ों पर बांध दिया। भूख से मरे इन जानवरों के शव सड़ चुके हैं। तेज दुर्गंध के कारण वन पंचायत और बलिबुबु के जंगल में जा रहे लोग सांस तक नहीं ले पा रहे हैं।
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इन पशुओं का मांस खाकर कुछ कुत्ते तक बीमार हो गए हैं। लोगों ने जहर देकर पेड़ों से बांधने की आशंका जताई है। इससे परेशान पुरुड़ा क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता कंचन सिंह थायत समेत पुरुड़ा और उड़खुली के ग्रामीणों ने गोहत्या करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
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बैजनाथ, भकुनखोला, गढ़सेर, स्याल्दे टीट, नौघर, टीट बाजार के ग्रामीण लावारिस जानवरों से तंग आ चुके थे। इन गांवों के लोगों ने कुछ माह पूर्व एसडीएम गरुड़ को कई बार ज्ञापन सौंपकर आवारा जानवरों को गोशाला में रखने की मांग की, लेकिन प्रशासन ने किसानों की मांग को गंभीरता से नहीं लिया।
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दबी जुबान से कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ दिन पहले क्षेत्र के ही 24 से अधिक लोग लावारिस गाय और बैलों को बैजनाथ वन पंचायत और बलिबुबु के मंदिर तक ले गए। वहां उन्होंने इन जानवरों को चीड़ के पेड़ों पर बांध दिया। भूख से मरे इन जानवरों के शव सड़ चुके हैं। तेज दुर्गंध के कारण वन पंचायत और बलिबुबु के जंगल में जा रहे लोग सांस तक नहीं ले पा रहे हैं।
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इन पशुओं का मांस खाकर कुछ कुत्ते तक बीमार हो गए हैं। लोगों ने जहर देकर पेड़ों से बांधने की आशंका जताई है। इससे परेशान पुरुड़ा क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता कंचन सिंह थायत समेत पुरुड़ा और उड़खुली के ग्रामीणों ने गोहत्या करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।