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सरयू की सफाई के लिए पालिका ने पांच पर्यावरण मित्र तैनात किए
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर।
Updated Fri, 16 Dec 2016 12:12 AM IST
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सरयू नदी किनारे बिखरा कूड़ा।
- फोटो : अमर उजाला
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। हजारों टन कचरा डालकर गंदी कर दी गई मोक्ष दायिनी सरयू नदी को गंदगी से मुक्ति दिलाने को लेकर आखिरकार प्रयास शुरू हो गए हैं। शुरुआती दौर में नगरपालिका ने नदी में जमा कचरे को साफ करने के लिए पांच पर्यावरण मित्र तैनात कर दिए हैं। पहली जनवरी से 35 और पर्यावरण मित्रों को नदी की सफाई में लगाया जाएगा।
छोटी काशी के नाम से विख्यात बागेश्वर नगरी से होकर बहने वाली सरयू नदी को मोक्ष दायिनी कहा जाता है। मान्यता है कि सरयू और गोमती के संगम पर स्नान से जन्मों के पाप समाप्त हो जाते हैं। लेकिन बागेश्वर में लोगों ने पाप धोने वाली इस पतित पावनी सरयू को ही कूड़ाघर बनाया है। वर्षों से लोगों द्वारा घरों के कचरे को नदी में फेंकने से सरयू के किनारे टनों गंदगी जमा है। मकर संक्रांति के दिन संगम पर हजारों की संख्या में लोग स्नान करते हैं। परंतु जिस नदी में टनों कचरा डाला गया हो उस नदी में पवित्र स्नान कैसे हो यह बड़ा सवाल है।
इसी को देखते हुए उत्तरायणी पर्व से पहले सरयू नदी को कूड़ा मुक्त करने को लेकर अमर उजाला की ओर से एक अभियान चलाया गया। इस अभियान के बाद आखिरकार नगरपालिका ने नदी की सफाई को लेकर प्रयास शुरू कर दिए हैं। इसके तहत नगरपालिका ने नदी की सफाई को लेकर पांच पर्यावरण मित्र तैनात किए हैं। यह पर्यावरण मित्र केवल नदी किनारे डाले गए कूड़े की सफाई का कार्य करेंगे। यह अभियान पालिका क्षेत्र से लेकर गांवों तक चलेगा। एक जनवरी से इस कार्य में 35 और पर्यावरण मित्र तैनात किए जाएंगे, ताकि 14 जनवरी को उत्तरायणी पर्व के अवसर पर लोग साफ पानी में पवित्र स्नान कर सकें। इसके अलावा 14 वें वित्त से मिली धनराशि से नगरपालिका बागनाथ मंदिर परिसर और ऐतिहासिक नुमाइशखेत क्षेत्र में स्टील के नए कूड़ेदान भी लगाएगी।
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नगर व सरयू नदी की सफाई व्यवस्था को लेकर प्रयास किए जा रहे हैं। पर्यावरण मित्र तैनात कर दिए गए हैं। 14वें वित्त से धनराशि मिली है इससे नए कूड़ेदान खरीदे जाएंगे। सभी प्रमुख स्थलों पर छोटे-बड़े कूड़ेदान लगाए जाएंगे। सभी मोहल्लों में जाकर कूड़ा निस्तारण के संबंध में लोगों की समस्याओं को जाना जाएगा। अमर उजाला का यह अभियान बहुत अच्छा है। लोगों को जागरूक होने की जरूरत है। कई लोग कूड़ेदानों के बजाय खुली जगह पर कूड़ा डाल देते हैं। नदियों की सफाई के लिए नगरवासियों का सहयोग जरूरी है।
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छोटी काशी के नाम से विख्यात बागेश्वर नगरी से होकर बहने वाली सरयू नदी को मोक्ष दायिनी कहा जाता है। मान्यता है कि सरयू और गोमती के संगम पर स्नान से जन्मों के पाप समाप्त हो जाते हैं। लेकिन बागेश्वर में लोगों ने पाप धोने वाली इस पतित पावनी सरयू को ही कूड़ाघर बनाया है। वर्षों से लोगों द्वारा घरों के कचरे को नदी में फेंकने से सरयू के किनारे टनों गंदगी जमा है। मकर संक्रांति के दिन संगम पर हजारों की संख्या में लोग स्नान करते हैं। परंतु जिस नदी में टनों कचरा डाला गया हो उस नदी में पवित्र स्नान कैसे हो यह बड़ा सवाल है।
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इसी को देखते हुए उत्तरायणी पर्व से पहले सरयू नदी को कूड़ा मुक्त करने को लेकर अमर उजाला की ओर से एक अभियान चलाया गया। इस अभियान के बाद आखिरकार नगरपालिका ने नदी की सफाई को लेकर प्रयास शुरू कर दिए हैं। इसके तहत नगरपालिका ने नदी की सफाई को लेकर पांच पर्यावरण मित्र तैनात किए हैं। यह पर्यावरण मित्र केवल नदी किनारे डाले गए कूड़े की सफाई का कार्य करेंगे। यह अभियान पालिका क्षेत्र से लेकर गांवों तक चलेगा। एक जनवरी से इस कार्य में 35 और पर्यावरण मित्र तैनात किए जाएंगे, ताकि 14 जनवरी को उत्तरायणी पर्व के अवसर पर लोग साफ पानी में पवित्र स्नान कर सकें। इसके अलावा 14 वें वित्त से मिली धनराशि से नगरपालिका बागनाथ मंदिर परिसर और ऐतिहासिक नुमाइशखेत क्षेत्र में स्टील के नए कूड़ेदान भी लगाएगी।
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नगर व सरयू नदी की सफाई व्यवस्था को लेकर प्रयास किए जा रहे हैं। पर्यावरण मित्र तैनात कर दिए गए हैं। 14वें वित्त से धनराशि मिली है इससे नए कूड़ेदान खरीदे जाएंगे। सभी प्रमुख स्थलों पर छोटे-बड़े कूड़ेदान लगाए जाएंगे। सभी मोहल्लों में जाकर कूड़ा निस्तारण के संबंध में लोगों की समस्याओं को जाना जाएगा। अमर उजाला का यह अभियान बहुत अच्छा है। लोगों को जागरूक होने की जरूरत है। कई लोग कूड़ेदानों के बजाय खुली जगह पर कूड़ा डाल देते हैं। नदियों की सफाई के लिए नगरवासियों का सहयोग जरूरी है।