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एक तरफ झुक गया है सेराघाट का झूला पुल
अमर उजाला ब्यूरो अल्मोड़ा।
Updated Thu, 05 Jul 2018 11:13 PM IST
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जीर्ण-शीर्ण हालत में सेराघाट का पुल।
- फोटो : अमर उजाला
49 साल पूर्व सेराघाट में बना पैदल झूला पुल सेराघाट बाजार की पहचान भी है, लेकिन यह झूला पुल अब जीर्ण-शीर्ण हालत में पहुंच गया है। पुल में कई स्थानों में गड्ढे बन गए हैं। यही नहीं यह पुल एक तरफ को लगभग 8 से 10 इंच झुक भी गया है। पुल की जल्द मरम्मत नहीं हुई तो कभी भी बड़ा हादसा होने से इंकार नहीं किया जा सकता है।
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सेराघाट जैंगन नदी पर 1969 में बना झूला पुल सेराघाट बाजार की पहचान है। ल्वेटा, सल्यूडी, सल्लाभाटकोट, कोट्यूडा, ढानखेत, बडुवाटाना, पडोली, मल्ली नाली, तल्ली नाली, कुंज किमोला, खाडवे, जिंगल, बमोरी, हरड़ा, तल्ला सेराघाट आदि दो दर्जन छोटे-बड़े गांवों को जोड़ने वाला यह पुल पहले पैदल चलने के लिए बना था। 2013 के बाद सेराघाट-नैनी मोटर मार्ग बनने के बाद इस पुल से दोपहिया वाहन गुजरने लगे। इधर कुछ समय से पुल पर कई स्थान पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं और पुल पर पड़ा डामर भी उखड़ गया है। चादर कई जगहों पर उखड़ गई है और पुल के किनारों में लगी सुरक्षा जाली भी कई जगह टूट गई है।
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पुल के निचले हिस्से के केबल भी जंक लगने से गल गए हैं और अपर केबल ढीले हो गए हैं जिससे पुल एक तरफ झुक गया है। पुल की जर्जर हालत पर अब तक विभाग की नजर नहीं पड़ी है। बरसात के दिनों में जैगन नदी का जलस्तर बढ़ जाने से आसपास के गांवों की लगभग 20 हजार आबादी इस एक मात्र पुल का ही इस्तेमाल करती है। सेराघाट क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता पंकज पांडे ने बताया कि कई बार क्षेत्र की बारातें भी इसी पुल से होकर गुजरती हैं और उस दौरान करीब 100 से 150 लोग एक साथ पुल पार करते हैं। यही नहीं माल से लदे 10-12 घोड़े हर रोज इस पुल को पार करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते मरम्मत नहीं की गई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
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