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Almora News: हमारी रोडवेज सेवा को तो बहाल कर दीजिए 'साहब'
Mon, 11 Sep 2023 11:31 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Mon, 11 Sep 2023 11:31 PM IST
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अल्मोड़ा। जिले में उत्तराखंड परिवहन निगम की हालत राज्य गठन के बाद सुधरने के बजाय और अधिक दयनीय हो चुकी है। राज्य गठन के बाद नए रूट में बस के संचालन के बजाय पांच रूट पर इनका संचालन ठप हुआ है और यात्री टैक्सी में धक्के खाने के लिए मजबूर हैं। अल्मोड़ा-टनकपुर, लमगड़ा-दिल्ली, बेतालघाट-दिल्ली, अल्मोड़ा-देहरादून और मासी-दिल्ली सेवा का लंबे समय से संचालन ठप है, जिससे क्षेत्र के लोगों को खासी दिक्कत झेलनी पड़ रही है।
पर्वतीय क्षेत्रों की सड़कों पर आवाजाही का बेहतर जरिया रोडवेज बस हैं। राज्य गठन के बाद लोगों को उम्मीद थी दूर-दराज के क्षेत्रों में नए रूट पर बस का संचालन होगा और उनका सफर आरामदायक होगा। लेकिन नई बस सेवा संचालित होने के बजाय पुरानी सेवाएं भी बंद हो रही हैं।
अल्मोड़ा डिपो के पास मौजूद 30 बसों का 14 मार्गों पर संचालन होता था। करीब एक साल से अल्मोड़ा-टनकपुर, लमगड़ा-दिल्ली, बेतालघाट-दिल्ली, अल्मोड़ा-देहरादून, मासी-दिल्ली रूट पर बस का संचालन ठप है। इन हालात में लोग टैक्सी के भरोसे ऊंचा किराया देकर आवाजाही करने के लिए मजबूर हैं।
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लंबे समय से इन सेवाओं के संचालन की मांग तो हो रही है, लेकिन निगम इससे हाथ पीछे खींच रहा है, जिसकी मार लोगों को सहनी पड़ रही है।
अल्मोड़ा डिपो के एआरएम आरके आर्या का कहना है कि लंबे समय से चालक और परिचालकों की कमी बनी हुई है। ऐसे में कई रूट पर बस का संचालन रोकना पड़ा है। चालक, परिचालकों की व्यवस्था होते ही सभी रूट पर बस संचालन संभव है।
बस संचालन के लिए नहीं हैं चालक, परिचालक, निगम को हर माह लग रही है 30 लाख की चपत
अल्मोड़ा। अल्मोड़ा डिपो के पास बस संचालन के लिए चालक और परिचालक नहीं हैं। निगम के अधिकारियों के मुताबिक सभी रूट पर बस संचालन के लिए 68 चालक और 73 परिचालकों की जरूरत है। लेकिन निगम के पास महज 44 चालक और 57 परिचालक हैं। ऐसे में हर रूट पर बस का संचालन कर पाना निगम के लिए चुनौती बन गया है। वहीं बस का संचालन न होने से निगम को हर माह 30 लाख रुपये की चपत लग रही है।
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रानीखेत से पांच रूट पर बंद हुआ बस का संचालन
अल्मोड़ा। रानीखेत डिपो की हालत बेहद खराब है। यह डिपो भी चालक और परिचालकों की कमी से जूझ रहा है। यहां से पूर्व तक विभिन्न रूट पर 70 बस का संचालन होता था। लेकिन चालक और परिचालक न होने से महज 26 बस का संचालन हो रहा है। यहां से अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, गैरसैंण, बागेश्वर, नैनीताल सहित अन्य रूट पर बस का संचालन ठप है, इससे यात्री परेशान हैं।
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पर्वतीय क्षेत्रों की सड़कों पर आवाजाही का बेहतर जरिया रोडवेज बस हैं। राज्य गठन के बाद लोगों को उम्मीद थी दूर-दराज के क्षेत्रों में नए रूट पर बस का संचालन होगा और उनका सफर आरामदायक होगा। लेकिन नई बस सेवा संचालित होने के बजाय पुरानी सेवाएं भी बंद हो रही हैं।
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अल्मोड़ा डिपो के पास मौजूद 30 बसों का 14 मार्गों पर संचालन होता था। करीब एक साल से अल्मोड़ा-टनकपुर, लमगड़ा-दिल्ली, बेतालघाट-दिल्ली, अल्मोड़ा-देहरादून, मासी-दिल्ली रूट पर बस का संचालन ठप है। इन हालात में लोग टैक्सी के भरोसे ऊंचा किराया देकर आवाजाही करने के लिए मजबूर हैं।
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लंबे समय से इन सेवाओं के संचालन की मांग तो हो रही है, लेकिन निगम इससे हाथ पीछे खींच रहा है, जिसकी मार लोगों को सहनी पड़ रही है।
अल्मोड़ा डिपो के एआरएम आरके आर्या का कहना है कि लंबे समय से चालक और परिचालकों की कमी बनी हुई है। ऐसे में कई रूट पर बस का संचालन रोकना पड़ा है। चालक, परिचालकों की व्यवस्था होते ही सभी रूट पर बस संचालन संभव है।
बस संचालन के लिए नहीं हैं चालक, परिचालक, निगम को हर माह लग रही है 30 लाख की चपत
अल्मोड़ा। अल्मोड़ा डिपो के पास बस संचालन के लिए चालक और परिचालक नहीं हैं। निगम के अधिकारियों के मुताबिक सभी रूट पर बस संचालन के लिए 68 चालक और 73 परिचालकों की जरूरत है। लेकिन निगम के पास महज 44 चालक और 57 परिचालक हैं। ऐसे में हर रूट पर बस का संचालन कर पाना निगम के लिए चुनौती बन गया है। वहीं बस का संचालन न होने से निगम को हर माह 30 लाख रुपये की चपत लग रही है।
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रानीखेत से पांच रूट पर बंद हुआ बस का संचालन
अल्मोड़ा। रानीखेत डिपो की हालत बेहद खराब है। यह डिपो भी चालक और परिचालकों की कमी से जूझ रहा है। यहां से पूर्व तक विभिन्न रूट पर 70 बस का संचालन होता था। लेकिन चालक और परिचालक न होने से महज 26 बस का संचालन हो रहा है। यहां से अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, गैरसैंण, बागेश्वर, नैनीताल सहित अन्य रूट पर बस का संचालन ठप है, इससे यात्री परेशान हैं।
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