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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Almora News ›   Rivers are shrinking by the spread of pine forests

चीड़ के वनों के फैलाव से भी सिकुड़ रही हैं नदियां

Tue, 09 May 2017 10:41 PM IST
अमर उजाला ब्यूराे अल्माेड़ा
अमर उजाला ब्यूराे अल्माेड़ा Updated Tue, 09 May 2017 10:41 PM IST
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 पर्वतीय क्षेत्र में बांज और अन्य चौड़ी पत्ती के वनों की जगह चीड़ के वन तेजी से फैल रहे हैं। चीड़ के जंगलों में बारिश का पानी धरती के भीतर काफी कम जाता है। बांज के वनों में बारिश का 23 प्रतिशत पानी तो चीड़ के वनों में सिर्फ 08 प्रतिशत पानी ही धरती के भीतर जाता है और ज्यादातर पानी बहकर निकल जाता है। जानकारों का मानना है कि चीड़ के वनों को अपग्रेड करके वहां चौड़ी पत्ती वाले वनों को विकसित करने के साथ ही बंजर जमीन पर अधिक से अधिक घास उगाई जानी चाहिए। जिससे जल स्रोत अधिक से अधिक रिचार्ज हो सकें। 

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बारिश का जो भी पानी धरती के भीतर जाता है वही बाद में जल स्रोतों, नौलों और गधेरों से बाहर निकलता है। रिचार्ज की इसी प्रक्रिया पर नदियों का भविष्य भी टिका है लेकिन हाल के वर्षों में पहाड़ में धरती के भीतर के जल भंडारों में पानी का स्तर लगातार नीचे गिर रहा है। मुख्य नदियों की तमाम सहायक नदियां तेजी से सूख रही हैं। पिछले कुछ दशकों में बांज और अन्य चौड़ी पत्ती के वनों के बजाय चीड़ के वनों का विस्तार हुआ है। कुमाऊं विवि एसएसजे परिसर में भूगोल विभाग के एनआरडीएमएस केंद्र के एक अध्ययन के मुताबिक बांज के जंगल में फ्रेस पत्तियों से लेकर सड़ी-गली पत्तियों की 50 सेमी से लेकर एक मीटर तक मोटी परत जम जाती है।
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ह्यूमस कही जानी वाली यह लेयर बारिश के पानी को तेजी से सोखती है। यही वजह है कि बांज के वनों में बारिश का 23 प्रतिशत पानी धरती के भीतर जाता है। इसके उलट चीड़ के वनों में ह्यूमस की कोई परत नहीं होती और बारिश का अधिकांश पानी सीधे बहकर निकल जाता है। चीड़ के वनों में बारिश के पानी का रिचार्ज सिर्फ 08 प्रतिशत ही होता है। दूसरी तरफ बंजर भूमि में स्थिति इससे भी खराब रहती है। बंजर भूमि में सिर्फ 05 प्रतिशत पानी ही रिचार्ज होता है। 
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चीड़ के वनों और बंजर जमीन में बारिश के पानी के साथ ही मिट्टी भी बह जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि नदियों में पानी का स्तर बढ़ाने के लिए सबसे पहले चीड़ के वनों को अपग्रेड करके वहां चौड़ी पत्ती वाले बांज, बुरांश, काफल आदि प्रजाति के पौधे लगाने होंगे। साथ ही बंजर जमीन में भी पौधारोपण के साथ ही घास आदि उगानी होगी। इससे भूमि में पानी सोखने की क्षमता बढ़ेगी और धरती के भीतर जल भंडार बढ़ेगा तथा नदियों में पानी का डिस्चार्ज भी बढ़ेगा। 


तेजी से बढ़ रहे हैं चीड़ के वन 
अल्मोड़ा। धरती के भीतर जल भंडार को रिचार्ज करने के लिहाज से चीड़ के वनों को अच्छा नहीं माना जा रहा है। यही वजह है कि वन विभाग ने पिछले कई सालों से चीड़ के पौधे लगाने बंद कर दिए हैं लेकिन इसके बावजूद चीड़ के जंगल तेजी से फैल रहे हैं। सिविल सोयम वन प्रभाग अल्मोड़ा का आकलन करें तो यहां 81.43 प्रतिशत चीड़ के वन हैं। जबकि बांज के वन सिर्फ 2.04 प्रतिशत और देवदार 1.34 प्रतिशत में है। 

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