अल्मोड़ा। जीबी पंत हिमालय पर्यावरण एवं विकास संस्थान कोसी कटारमल में भारतीय हिमालयी राज्यों में हिमालयी शोधार्थियों का दो दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया गया। इसके दूसरे दिन शुक्रवार को संस्थान के निदेशक डॉ. आरएस रावल ने शोधार्थियों को संबोधित किया। कहा कि शोधार्थियों का कार्य हिमालयी राज्यों के डाटा बैंक को और भी समृद्ध करेगा। उनसे प्राप्त आंकड़े भविष्य में काफी महत्वपूर्ण साबित होंगे।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सम्मेलन को संबोधित कर रहे वक्ताओं ने कहा कि भारतीय हिमालयी राज्यों में हिमालयी शोधार्थियों से प्राप्त आंकड़ा महत्वपूर्ण है। वन पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के वरिष्ठ सलाहकार ललित कपूर, आईआईटी रुड़की के प्रो. एसके मिश्रा, कुमाऊं विश्वविद्यालय के प्रो. सीसी पंत, पूर्व निदेशक विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान डॉ. जेसी भट्ट आदि ने शोधार्थियों के शोध पर दी गई प्रस्तुतिकरणों का मूल्यांकन किया और उन्हें आवश्यक सुझाव दिए। इस अवसर पर शेर-ए-कश्मीर विश्वविद्यालय के डॉ. इम्माद ए. साह, आरएफआरआई के प्रदीपन राय, तेमलेनसोला, बिथी बरूह, असम कृषि विश्वविद्यालय के हेमंत पोखरियाल, अब्दुल मलिक, लाऔन, दीपांकर नाथ, रकतिम शर्मा आईसीएआर एनआरसीओ सिक्किम से डॉ. रामलाल, एनआईटी नागालैंड से माला पामई, इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय से डॉ. निदा रिजवी, निधि चिल्लर, अभिषेक चिल्लर आदि ने अपनी प्रस्तुतियां दीं। विषय विशेषज्ञों ने नई विधियों से अनेक शोधार्थियों के शोध कार्यों की सराहना कर उन्हें कार्य की गुणवत्ता को बनाए रखने का सुझाव दिया। इस मौके पर मिशन के नोडल अधिकारी इंजीनियर किरीट कुमार ने कहा कि जैव विविधता संरक्षण और जल संसाधन प्रबंधन विषयों पर विषय विशेषज्ञों की राय शोधार्थियों के लिए बहुउपयोगी होंगी। इस अवसर पर संस्थान के वैज्ञानिक रंजन जोशी, संदीपन मुकर्जी, आशुतोष तिवारी, डॉ. ललित गिरी, तन्मय धर समेत जगदीश पांडे, अंकित धनै, योगेश परिहार, अरविंद टम्टा आदि ने सहयोग किया।