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एक दूसरे के सुख-दुख में भागीदार बनने का संकल्प
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Thu, 15 Nov 2018 12:19 AM IST
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चौखुटिया में आयोजित विधुर सम्मेलन में मौजूद बुजुर्ग व अन्य लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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यहां आयोजित विधुर सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे विधुर जनों का बैज लगाकर स्वागत किया गया। इस मौके पर आपसी सहयोग और सामंजस्य के साथ एक दूसरे के सुख-दुख में भागीदार बनने का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के सबसे अधिक उम्र के बुजुर्ग पटलगांव निवासी नाथूराम जोशी (101) भी पहुंचे थे।
चौखुटिया में पहली बार आयोजित विधुर सम्मेलन के संयोजक डॉ. एलएस मनराल ने सम्मेलन के उद्देश्य के बारे में बताते हुए कार्यक्रम की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि कोई भी विधुर खुद को अकेला न समझे। कहा कि एक दूसरे की तकलीफों को समझने और उसका निदान तलाशने की मूल भावना को लेकर कार्यक्रम आयोजित किया गया है।
सम्मेलन में पहुंचे बुजुर्गों और अन्य लोगों ने बाल्यकाल से लेकर विवाह, यात्राएं और फिर जीवन साथी के बिछुड़ने से लेकर उसके बाद तक के वृतांत सुनाए। कार्यक्रम के समापन पर संयोजक डॉ. मनराल ने सभी लोगों को स्व: लिखित पुस्तकें भेट की।
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इस मौके पर सेवानिवृत्त कैप्टेन माधोसिंह बिष्ट, पूर्व प्रधानाचार्य जीवानंद जोशी, जयदत्त फुलोरिया, पीतांबर पांडे, पूरन पंत, जसवंत सिंह रौतेला, दरबान सिंह नेगी, कुंदन सिंह मनराल, सदराम, केशर राम, प्रेमगिरी सहित तमाम लोग मौजूद थे। संचालन जीवन नेगी ने किया।
एकांकी जीवन बीता रहे विधुर लोगों को हौसला दे गया सम्मेलन
चौखुटिया(अल्मोड़ा)। विधुर सम्मेलन एकांकी जीवन यापन कर रहे बुजुर्गों को हौसला दे गया है। सम्मेलन के बहाने जहां पुराने साथियों का मिलन हुआ वहीं दूसरी ओर सभी ने एक दूसरे की पीड़ा को समझते हुए जीवन के खट्टे-मीठेअनुभवों को साझा किया।
क्षेत्र में पहली बार हुआ विधुर सम्मेलन जीवन साथी की गैरमौजूदगी में एकांकी जीवन यापन कर रहे लोगों के लिए किसी सहारे से कम नहीं था। सम्मेलन में कुछ ऐसे लोग भी थे जो अपने जीवन के नब्बे बसंत गुजार चुके हैं पर उन्होंने जीवन में संघर्ष और विपदाओं के पतझड़ के सिवाय कुछ नहीं देखा। सम्मेलन में पहुंचे लोगों ने एक दूसरे के दर्द को समझते हुए जख्म में मरहम लगाने का प्रयास किया। चर्चा-परिचर्चा के दौरान एक दूसरे को समझाने और समझने का प्रयास भी हुआ।
कार्यक्रम के संयोजक पूर्व प्रमुख डॉ.एलएस मनराल ने बताया कि सम्मेलन के माध्यम से विधुर लोगों को यह संदेश देने का प्रयास किया गया है कि वे अकेले नहीं हैं। उनके हर दुख-सुख में संगठन के साथी उनके साथ खड़े हैं। डॉ. मनराल ने बताया कि विधुर लोगों का पूरे उत्तराखंड स्तर पर एक संगठन बनाकर उनकी तकलीफों को साझा करने और दूर करने का प्रयास भी किया जाएगा।
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चौखुटिया में पहली बार आयोजित विधुर सम्मेलन के संयोजक डॉ. एलएस मनराल ने सम्मेलन के उद्देश्य के बारे में बताते हुए कार्यक्रम की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि कोई भी विधुर खुद को अकेला न समझे। कहा कि एक दूसरे की तकलीफों को समझने और उसका निदान तलाशने की मूल भावना को लेकर कार्यक्रम आयोजित किया गया है।
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सम्मेलन में पहुंचे बुजुर्गों और अन्य लोगों ने बाल्यकाल से लेकर विवाह, यात्राएं और फिर जीवन साथी के बिछुड़ने से लेकर उसके बाद तक के वृतांत सुनाए। कार्यक्रम के समापन पर संयोजक डॉ. मनराल ने सभी लोगों को स्व: लिखित पुस्तकें भेट की।
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इस मौके पर सेवानिवृत्त कैप्टेन माधोसिंह बिष्ट, पूर्व प्रधानाचार्य जीवानंद जोशी, जयदत्त फुलोरिया, पीतांबर पांडे, पूरन पंत, जसवंत सिंह रौतेला, दरबान सिंह नेगी, कुंदन सिंह मनराल, सदराम, केशर राम, प्रेमगिरी सहित तमाम लोग मौजूद थे। संचालन जीवन नेगी ने किया।
एकांकी जीवन बीता रहे विधुर लोगों को हौसला दे गया सम्मेलन
चौखुटिया(अल्मोड़ा)। विधुर सम्मेलन एकांकी जीवन यापन कर रहे बुजुर्गों को हौसला दे गया है। सम्मेलन के बहाने जहां पुराने साथियों का मिलन हुआ वहीं दूसरी ओर सभी ने एक दूसरे की पीड़ा को समझते हुए जीवन के खट्टे-मीठेअनुभवों को साझा किया।
क्षेत्र में पहली बार हुआ विधुर सम्मेलन जीवन साथी की गैरमौजूदगी में एकांकी जीवन यापन कर रहे लोगों के लिए किसी सहारे से कम नहीं था। सम्मेलन में कुछ ऐसे लोग भी थे जो अपने जीवन के नब्बे बसंत गुजार चुके हैं पर उन्होंने जीवन में संघर्ष और विपदाओं के पतझड़ के सिवाय कुछ नहीं देखा। सम्मेलन में पहुंचे लोगों ने एक दूसरे के दर्द को समझते हुए जख्म में मरहम लगाने का प्रयास किया। चर्चा-परिचर्चा के दौरान एक दूसरे को समझाने और समझने का प्रयास भी हुआ।
कार्यक्रम के संयोजक पूर्व प्रमुख डॉ.एलएस मनराल ने बताया कि सम्मेलन के माध्यम से विधुर लोगों को यह संदेश देने का प्रयास किया गया है कि वे अकेले नहीं हैं। उनके हर दुख-सुख में संगठन के साथी उनके साथ खड़े हैं। डॉ. मनराल ने बताया कि विधुर लोगों का पूरे उत्तराखंड स्तर पर एक संगठन बनाकर उनकी तकलीफों को साझा करने और दूर करने का प्रयास भी किया जाएगा।