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Almora News: कांडे में रासलीला से वृंदावन धाम का आभास

Wed, 14 Jun 2023 11:48 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा Updated Wed, 14 Jun 2023 11:48 PM IST
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Rasleela in Kande Dwarahat
द्वाराहाट के कांडे में वृंदावन से पहुंची टीम के सदस्य।
द्वाराहाट/चौखुटिया (अल्मोड़ा)। रासलीला संस्थान वृंदावन से 24 सदस्यीय दल ग्राम पंचायत कांडे में पहुंचा है। यह दल बृजमंडल में राधा-कृष्ण के रूप और जीवन के हर पहलु को छूती प्रस्तुति दे रहा है। भक्ति, वात्सल्य और प्रेम भाव में डूबे, नाचते, थिरकते लोगों की भाव भंगिमा के बीच आयोजन स्थल का नजारा वृंदावन धाम सा बन गया है।
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वृंदावन से पहुंची टीम के संचालक रासाचार्य गोकुल शर्मा के निर्देशन में हो रहे आयोजन के लिए लोगों में खासा उत्साह है। आयोजन के लिए गांव में काफी चहलपहल है। कई शहरों से प्रवासी भी गांव पहुंचे हैं। संयोजक मंडल के सदस्यों में आनंद बल्लभ कांडपाल, तारा दत्त कांडपाल, धर्मानंद, गोविंद बल्लभ, खीमानंद कांडपाल, मोहन कांडपाल सहित ग्राम कांडे, हल्द्वानी, दिल्ली की कार्यकारिणी के सभी सदस्य और ग्रामीण शामिल हैं।
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रासलीला को असल अर्थों में समझे नई पीढ़ी

द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। वृंदावन से पहुंचे टीम के संचालक रासाचार्य गोकुल शर्मा (गोपी जी) का कहना है कि नई पीढ़ी ने रासलीला को प्रिय और प्रियतम के प्रेम संबंध के रूप में समझ लिया है जो सरासर गलत है। नई पीढ़ी को अपनी भ्रांतियों को दूर करने के लिए एक बार रासलीला जरूर देखनी चाहिए। गोकुल ने कहा कि टीवी के नाटकों में कृष्ण की लीलाओं को देखने वालों के हृदय में श्रद्धा का भाव पैदा नहीं हो सकता है। हम जो दिखा रहे हैं वह सब पुराणों पर आधारित और मर्यादित है। महिला पात्रों का अभिनय भी पुरुष ही कर रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि उनका परिवार एक हजार से भी अधिक रासलीलाओं का आयोजन कर चुका है। हर गुरु पूर्णिमा को ऋषिकेश में आयोजन होता है। हल्द्वानी वह देहरादून में कई कार्यक्रम कर चुके हैं लेकिन कांडे गांव में यह पहला आयोजन है। गोकुल शर्मा की टीम के मुखिया उनके पिता रासाचार्य स्वामी देवेंद्र कुमार हैं। उनके दादा रासाचार्य रूपकिशोर ने वर्ष 1911 में श्री कृष्ण लीला का मंचन शुरू किया था। इस परंपरा को फिर रासाचार्य फतेहराम और अब गोकुल शर्मा अपने पिता के साथ निभा रहे हैं।
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