{"_id":"6aa6e92095d21861ce0c9d00","slug":"rare-herbarium-collection-to-be-preserved-at-patanjali-research-foundation-ranikhet-news-c-232-1-alm1019-148590-2026-09-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Almora News: दुर्लभ हर्बेरियम संग्रह पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन में होगा सुरक्षित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Almora News: दुर्लभ हर्बेरियम संग्रह पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन में होगा सुरक्षित
Sun, 13 Sep 2026 11:49 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Sun, 13 Sep 2026 11:49 PM IST
विज्ञापन
रानीखेत (अल्मोड़ा)। कुमाऊं और गढ़वाल के विभिन्न हिमालयी क्षेत्रों से दशकों की मेहनत से संकलित ऐतिहासिक और दुर्लभ हर्बेरियम संग्रह अब पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन ट्रस्ट हरिद्वार में सुरक्षित रखा जाएगा। संग्रह में उत्तराखंड के दुर्गम कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्रों से संकलित विभिन्न वनस्पतियों के संरक्षित नमूने शामिल हैं।
रानीखेत निवासी प्रसिद्ध वनस्पति शास्त्री स्व. रामलाल साह ने इस संग्रह को तैयार किया था। उनके पुत्र स्व. उमेश चंद्र साह ने लंबे समय तक इसे संरक्षित रखा। अब उनके पौत्र मुकेश चंद्र साह ने संरक्षण और अनुसंधान के उद्देश्य से संग्रह पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन को दान कर दिया है।
बीते दिनों फाउंडेशन के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. भास्कर जोशी और डॉ. अमित कुमार रानीखेत पहुंचे और जरूरी बाजार स्थित रामजी हर्बेरियम आवास से संग्रह को औपचारिक रूप से प्राप्त किया।
विज्ञापन
मुकेश चंद्र साह ने बताया कि उनके दादा और पिता ने दुर्गम क्षेत्रों का भ्रमण कर वनस्पतियों का अध्ययन किया और उनके नमूनों को सहेजा था। अब यह ऐतिहासिक संग्रह हिमालयी जड़ी-बूटियों और दुर्लभ वनस्पतियों पर होने वाले नए शोध में उपयोगी साबित होगा।
विज्ञापन
रानीखेत निवासी प्रसिद्ध वनस्पति शास्त्री स्व. रामलाल साह ने इस संग्रह को तैयार किया था। उनके पुत्र स्व. उमेश चंद्र साह ने लंबे समय तक इसे संरक्षित रखा। अब उनके पौत्र मुकेश चंद्र साह ने संरक्षण और अनुसंधान के उद्देश्य से संग्रह पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन को दान कर दिया है।
विज्ञापन
बीते दिनों फाउंडेशन के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. भास्कर जोशी और डॉ. अमित कुमार रानीखेत पहुंचे और जरूरी बाजार स्थित रामजी हर्बेरियम आवास से संग्रह को औपचारिक रूप से प्राप्त किया।
विज्ञापन
मुकेश चंद्र साह ने बताया कि उनके दादा और पिता ने दुर्गम क्षेत्रों का भ्रमण कर वनस्पतियों का अध्ययन किया और उनके नमूनों को सहेजा था। अब यह ऐतिहासिक संग्रह हिमालयी जड़ी-बूटियों और दुर्लभ वनस्पतियों पर होने वाले नए शोध में उपयोगी साबित होगा।