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अस्तित्व बचाने की जंग लड़ रही रामगंगा

Mon, 01 May 2017 10:57 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो बागेश्वर
अमर उजाला ब्यूरो बागेश्वर Updated Mon, 01 May 2017 10:57 PM IST
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Ramganga fighting for survival
चौखुटिया में अप्रैल में ही कम होने लगा है रामगंगा का जल स्तर। - फोटो : अमर उजाला

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जीवनदायिनी रामगंगा आज अपने अस्तित्व को बचाने की जंग लड़ रही है। बेतरतीब अवैध खनन, पेड़ों का कटान, जंगलों में आग और चौड़े पत्ते वाले पेड़ों के अभाव से नदी के जलस्तर तेजी से कम हो रहा है।

पश्चिमी रामगंगा कही जाने वाली रामगंगा का उद्गम दुधातोली से लगे दीवालीखाल के रामनाली नामक स्थान से होता है। वहां से रामगंगा  मैहलचौरी और खंसर घाटी होते हुए चौखुटिया पहुंचती है। बाद में केदार पहुंचने पर विनोद नदी और भिकियासैंण पहुंचने पर गगास नदी का इसमें समागम होता है और फिर यह कालागढ़ डैम में पहुंचने के बाद आगे बढ़ती है। तड़ाग, खचार और कुथलाड़ सहित कई दर्जन नाले भी रामगंगा में मिलते हैं।    
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रामगंगा से गढ़वाल मंडल की योजनाओं के अलावा मासी से 80 गावों के लिए बनी नैथना देवी पेयजल योजना, चौखुटिया नागर पेयजल योजना, पीपलधार पेयजल योजना, द्वाराहाट पेयजल योजना, बाखली पेयजल योजना, भिकियासैंण-नौला, भिकियासैंण एकल और भवानी देवी पेयजल योजना सहित तमाम पेयजल योजनाओं के साथ ही तेरह किलोमीटर की रामगंगा बाईं और रामगंगा दाईं नहरों सहित दर्जनों सिंचाई योजनाएं बनी हैं। रामगंगा के घटते जलस्तर को देखते हुए गाहे बगाहे इस नदी में पिंडर का पानी डालने की मांग उठती रही है।
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सामूहिक पहल जरूरी                 
-नदियों का अस्तित्व बचाने के लिए सबसे पहले लोगों को जागरूक करना होगा। उनकी योजना लोगों के सहयोग से रामगंगा से जुड़े विस्तृत भू भाग में चौड़ी पत्ती के पौधों का रोपण करना है।                  
एलडी मठपाल , सेवानिवृत्त एडीओ वन


फरवरी में केंद्र सरकार की पहल पर आई नमामि गंगे की टीम ने सरसरी तौर पर रामगंगा का सर्वे किया था। ऊंचा वाहन के ग्राम प्रधान शंकर सिंह बिष्ट का कहना है कि रामगंगा का अस्तित्व बचाने के लिए लोगों को एकजुट होकर चौड़ी पत्ती वाले बांज, बुरांश और काफल जैसे पौधों का रोपण करना होगा।                  

डा. कुलदीप सिंह बिष्ट, समाज सेवी

               
-पहले आम तौर पर नदी में पानी कम होने से जून में दिक्कत होती थी, परंतु पिछले कुछ सालों से अप्रैल अंतिम सप्ताह से ही समस्या खड़ी होने लगी है। जल स्तर कम होने से पंपिंग की अवधि घटानी पड़ती है। अभी सभी पेयजल योजनाएं संचालित हो रही हैं।
- अवधेश कुमार, सहायक अभियंता, जल संस्थान

 
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