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गोल्डन कार्ड के नाम पर की गई कटौती से भड़के पेंशनर, धरना देकर नारेबाजी की
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अल्मोड़ा के गांधी पार्क में विधायक मनोज तिवारी को ज्ञापन सौंपते गवर्नमेंट पेंशनर्स वेलफेयर आर्?
- फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। गोल्डन कार्ड की विसंगतियां दूर न होने से नाराज पेंशनरों ने शनिवार को गवर्नमेंट पेंशनर्स वेलफेयर आर्गनाइजेशन जिला शाखा के बैनर तले चौघानपाटा स्थित गांधी पार्क में धरना दिया। उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर विरोध जताया।
धरनास्थल पर हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि राज्य स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत गोल्डन कार्ड के अधीन पेंशनरों और पारिवारिक पेंशनरों की पेंशन से की जा रही कटौती दिसंबर 2021 की पेंशन से बंद कर दी गई थी। राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने 25 अगस्त 2022 को विज्ञापन प्रकाशित कर विकल्प को आधार बनाकर सितंबर 2022 की पेंशन, पारिवारिक पेंशनरों की माह दिसंबर 2021 से सितंबर 2022 तक की कटौती बगैर सहमति के कर दी। ये पेंशनरों के साथ अन्याय है।
आरोप लगाया कि स्वास्थ्य प्राधिकरण की ओर मांगा गया विकल्प पेंशनरों के हित में न होकर एकतरफा है। विकल्प के अनुसार जो पेंशनर, पारिवारिक पेंशनर किसी भी प्रकार का विकल्प नहीं भरेंगे उन्हें स्वास्थ्य योजना में उनकी स्वीकारोक्ति मान लिया गया है। स्वास्थ्य प्राधिकरण और कोषागार की ओर से पेंशनरों के मौन रहने पर उनके खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकालना विधि विरुद्ध है। पेंशनरों की पेंशन संविधान के अनुच्छेद-300 के तहत संरक्षित संपत्ति है। कई पेंशनरों ने योजना को अस्वीकार करने का विकल्प भरा था लेकिन उनकी पेंशन से भी कटौती की गई।
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विधायक मनोज तिवारी ने धरनास्थल पर पहुंचकर पेंशनरों की समस्याएं सुनीं और उनका ज्ञापन लिया। तिवारी ने कहा कि पेंशनरों की समस्याओं को मुख्यमंत्री के सामने रखने के साथ ही विधानसभा में उठाया जाएगा। वहां पर संगठन के अध्यक्ष गिरीश तिवारी, महासचिव हेम जोशी, चंद्रमणि भट्ट, भैरव दत्त, नवीन लाल साह, आनंदी वर्मा, प्रताप सत्याल, डॉ. गोकुल सिंह रावत, किशन जोशी, गिरीश जोशी आदि बैठे।
पेंशनरों की मांगें
- अवैधानिक रूप से एक जनवरी 2021 से 30 नवंबर 2021 तक 11 माह और एक जनवरी 2022 से सितंबर 2022 तक 10 माह की कटौती को तुरंत वापस लिया जाए।
-पेंशनरों, पारिवारिक पेंशनरों को केंद्र सरकार की तरह अथवा उत्तर प्रदेश सरकार की तरह कैश लेश इलाज की सुविधा अथवा तीन हजार प्रतिमाह चिकित्सा भत्ता दिया जाए।
- पेंशनरों और पारिवारिक पेंशनरों को पूर्व की तरह चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाए।
क्या कहते हैं पेंशनर
गोल्डन कार्ड के नाम पर पेंशन से की जा रही कटौती पेंशनरों के साथ अन्याय है। कटौती के नाम पर ग्रेडवार कटौती की जा रही है। गोल्डन कार्ड के पैनल में जो अस्पताल है वहां उपचार की भी बेहतर सुविधाएं नहीं है।
हेम चंद्र जोशी, महासचिव गवर्नमेंट पेंशनर्स वेलफेयर आर्गनाइजेशन
पेंशन से 2021 में 11 माह की कटौती की गई जबकि सितंबर 2022 में 10 माह की फिर से कटौती कर दी गई है। इससे पेंशनर काफी परेशान हैं। पेंशन से ही पेंशनरों की घर चलता है।कटौती का पैसा जल्द वापस किया जाना चाहिए।
चंद्रमणि भट्ट, अल्मोड़ा
यूपी में पेंशनरों की पेंशन से कोई कटौती नहीं की जाती है लेकिन उन्हें सुविधाएं पर्याप्त दी जाती हैं। उत्तर प्रदेश की तर्ज पर उत्तराखंड में भी पेंशनरों को स्वास्थ्य लाभ दिया जाए।
नवीन लाल साह, अल्मोड़ा
गोल्डन कार्ड के नाम पर पेंशन से की कई कटौती की राशि पेंशनरों को जल्द लौटाई जाए। सभी अस्पतालों में पेंशनरों को उपचार की सुविधा मिलनी चाहिए। पेंशनरों की उपेक्षा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
डॉ. जेसी दुर्गापाल, पूर्व स्वास्थ्य निदेशक अल्मोड़ा
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धरनास्थल पर हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि राज्य स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत गोल्डन कार्ड के अधीन पेंशनरों और पारिवारिक पेंशनरों की पेंशन से की जा रही कटौती दिसंबर 2021 की पेंशन से बंद कर दी गई थी। राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने 25 अगस्त 2022 को विज्ञापन प्रकाशित कर विकल्प को आधार बनाकर सितंबर 2022 की पेंशन, पारिवारिक पेंशनरों की माह दिसंबर 2021 से सितंबर 2022 तक की कटौती बगैर सहमति के कर दी। ये पेंशनरों के साथ अन्याय है।
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आरोप लगाया कि स्वास्थ्य प्राधिकरण की ओर मांगा गया विकल्प पेंशनरों के हित में न होकर एकतरफा है। विकल्प के अनुसार जो पेंशनर, पारिवारिक पेंशनर किसी भी प्रकार का विकल्प नहीं भरेंगे उन्हें स्वास्थ्य योजना में उनकी स्वीकारोक्ति मान लिया गया है। स्वास्थ्य प्राधिकरण और कोषागार की ओर से पेंशनरों के मौन रहने पर उनके खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकालना विधि विरुद्ध है। पेंशनरों की पेंशन संविधान के अनुच्छेद-300 के तहत संरक्षित संपत्ति है। कई पेंशनरों ने योजना को अस्वीकार करने का विकल्प भरा था लेकिन उनकी पेंशन से भी कटौती की गई।
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विधायक मनोज तिवारी ने धरनास्थल पर पहुंचकर पेंशनरों की समस्याएं सुनीं और उनका ज्ञापन लिया। तिवारी ने कहा कि पेंशनरों की समस्याओं को मुख्यमंत्री के सामने रखने के साथ ही विधानसभा में उठाया जाएगा। वहां पर संगठन के अध्यक्ष गिरीश तिवारी, महासचिव हेम जोशी, चंद्रमणि भट्ट, भैरव दत्त, नवीन लाल साह, आनंदी वर्मा, प्रताप सत्याल, डॉ. गोकुल सिंह रावत, किशन जोशी, गिरीश जोशी आदि बैठे।
पेंशनरों की मांगें
- अवैधानिक रूप से एक जनवरी 2021 से 30 नवंबर 2021 तक 11 माह और एक जनवरी 2022 से सितंबर 2022 तक 10 माह की कटौती को तुरंत वापस लिया जाए।
-पेंशनरों, पारिवारिक पेंशनरों को केंद्र सरकार की तरह अथवा उत्तर प्रदेश सरकार की तरह कैश लेश इलाज की सुविधा अथवा तीन हजार प्रतिमाह चिकित्सा भत्ता दिया जाए।
- पेंशनरों और पारिवारिक पेंशनरों को पूर्व की तरह चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाए।
क्या कहते हैं पेंशनर
गोल्डन कार्ड के नाम पर पेंशन से की जा रही कटौती पेंशनरों के साथ अन्याय है। कटौती के नाम पर ग्रेडवार कटौती की जा रही है। गोल्डन कार्ड के पैनल में जो अस्पताल है वहां उपचार की भी बेहतर सुविधाएं नहीं है।
हेम चंद्र जोशी, महासचिव गवर्नमेंट पेंशनर्स वेलफेयर आर्गनाइजेशन
पेंशन से 2021 में 11 माह की कटौती की गई जबकि सितंबर 2022 में 10 माह की फिर से कटौती कर दी गई है। इससे पेंशनर काफी परेशान हैं। पेंशन से ही पेंशनरों की घर चलता है।कटौती का पैसा जल्द वापस किया जाना चाहिए।
चंद्रमणि भट्ट, अल्मोड़ा
यूपी में पेंशनरों की पेंशन से कोई कटौती नहीं की जाती है लेकिन उन्हें सुविधाएं पर्याप्त दी जाती हैं। उत्तर प्रदेश की तर्ज पर उत्तराखंड में भी पेंशनरों को स्वास्थ्य लाभ दिया जाए।
नवीन लाल साह, अल्मोड़ा
गोल्डन कार्ड के नाम पर पेंशन से की कई कटौती की राशि पेंशनरों को जल्द लौटाई जाए। सभी अस्पतालों में पेंशनरों को उपचार की सुविधा मिलनी चाहिए। पेंशनरों की उपेक्षा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
डॉ. जेसी दुर्गापाल, पूर्व स्वास्थ्य निदेशक अल्मोड़ा