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Almora News: पेंशन और बकाया भुगतान के लिए कलाकारों का प्रदर्शन
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अल्मोड़ा के चौघानपाटा में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते लोक कलाकार।।संवाद
- फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा/बागेश्वर। हमारी लोक संस्कृति के वाहक लोक कलाकारों की प्रदेश में अनदेखी हो रही है। इन लोक कलाकारों ने लोक संस्कृति और लोक परंपराओं को सहेजने के लिए संस्कृति विभाग के आदेश पर एक साल से कई कार्यक्रम पेश किए लेकिन उन्हें इन कार्यक्रमों का करीब दो करोड़ रुपये का बकाया भुगतान नहीं मिल सका है। इसके विरोध में लोक कलाकार महासंगठन के बैनर तले एकजुट लोक कलाकारों ने बुधवार को सरकार के खिलाफ प्रदेशव्यापी धरना, प्रदर्शन किया।
अल्मोड़ा के विभिन्न सांस्कृतिक दलों से जुड़े लोक कलाकार बुधवार को बढ़ी संख्या में लोक कलाकार महासंगठन के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल सिंह चम्याल के नेतृत्व में चौघानपाटा स्थित गांधी पार्क में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर धरना दिया। कहा कि प्रदेश में 300 सांस्कृतिक दल पंजीकृत हैं। इन दलों में शामिल एक कलाकार को एक कार्यक्रम के लिए महज 800 रुपये और दलनायक को एक हजार रुपये मानदेय मिलता है।
उम्र के 60 साल पार कर चुके कलाकारों को तीन हजार रुपये मासिक पेंशन देने का प्राविधान है लेकिन एक साल से कलाकारों को न तो मानदेय मिला है और न ही पेंशन। इसलिए उन्होंने सरकार के खिलाफ जमकर नारे लगाए। कहा कि उनकी मांगों पर गौर नहीं किया गया तो वे सड़कों पर उतरेंगे। इस दौरान संगठन के जिला महासचिव दयानंद कठैत, प्रियंका चम्याल, मानसी बोरा, विनीता बोरा, शीला पंत, मनीषा आर्या, महिमा आर्या, लकी पवार, दीक्षा सुयाल, विवेक तिवारी, चंपा सुयाल आदि शामिल रहे।
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बागेश्वर के कलाकारों ने नुमाइशखेत मैदान में प्रदर्शन कर एसडीएम हर गिरि के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। वहां अर्जुन देव, भास्कर तिवारी, बलदेव प्रसाद आगरी, अजय चंदोला, आरपी कांडपाल, मनोज लोहनी आदि मौजूद रहे।
बोले लोक कलाकार
प्रदेश में लोक संस्कृति के वाहक लोक कलाकारों की ऐसी अनदेखी कभी नहीं हुई। एक साल से कार्यक्रमों का भुगतान नहीं हुआ है। ऐसे में कलाकार और सांस्कृतिक दल आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। सरकार को हमारी परेशानी गंभीरता से दूर करनी चाहिए। - गोपाल सिंह चम्याल, प्रदेश उपाध्यक्ष, लोक कलाकार महासंगठन, अल्मोड़ा।
कलाकारों को उनके कार्यक्रम का बहुत कम मेहनताना मिलता है लेकिन वह भी एक साल से नहीं मिला है। ऐसे में लोक कलाकारों और लोक संस्कृति को सहेजने के सभी दावे-खोखले साबित हो रहे हैं। - रमेश लाल, लोक कलाकार।
एक साल से न तो कार्यक्रमों का भुगतान हुआ है और न ही कलाकारों को पेंशन मिली है। ऐसे में वह कैसे लोक संस्कृति को बचाने में सहयोग दे पाएंगे। सरकार को इसकी चिंता ही नहीं है। - दयानंद कठैत, लोक कलाकार।
यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि लोक संस्कृति के वाहक लोक कलाकार सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर हैं। सरकार की अनदेखी से लोक कलाकार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं, इस पर सरकार को गंभीरता दिखानी होगी। - ममता वाणी भट्ट, प्रदेश उपाध्यक्ष, लोक कलाकार महासंगठन, अल्मोड़ा।
कलाकारों के भुगतान के लिए विभाग को बजट नहीं मिला है। इस बारे में शासन को अवगत कराया गया है। बजट मिलते ही उन्हें भुगतान कर दिया जाएगा। - डॉ. चंद्र सिंह चौहान, प्रभारी निदेशक, संग्रहालय, अल्मोड़ा।
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अल्मोड़ा के विभिन्न सांस्कृतिक दलों से जुड़े लोक कलाकार बुधवार को बढ़ी संख्या में लोक कलाकार महासंगठन के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल सिंह चम्याल के नेतृत्व में चौघानपाटा स्थित गांधी पार्क में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर धरना दिया। कहा कि प्रदेश में 300 सांस्कृतिक दल पंजीकृत हैं। इन दलों में शामिल एक कलाकार को एक कार्यक्रम के लिए महज 800 रुपये और दलनायक को एक हजार रुपये मानदेय मिलता है।
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उम्र के 60 साल पार कर चुके कलाकारों को तीन हजार रुपये मासिक पेंशन देने का प्राविधान है लेकिन एक साल से कलाकारों को न तो मानदेय मिला है और न ही पेंशन। इसलिए उन्होंने सरकार के खिलाफ जमकर नारे लगाए। कहा कि उनकी मांगों पर गौर नहीं किया गया तो वे सड़कों पर उतरेंगे। इस दौरान संगठन के जिला महासचिव दयानंद कठैत, प्रियंका चम्याल, मानसी बोरा, विनीता बोरा, शीला पंत, मनीषा आर्या, महिमा आर्या, लकी पवार, दीक्षा सुयाल, विवेक तिवारी, चंपा सुयाल आदि शामिल रहे।
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बागेश्वर के कलाकारों ने नुमाइशखेत मैदान में प्रदर्शन कर एसडीएम हर गिरि के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। वहां अर्जुन देव, भास्कर तिवारी, बलदेव प्रसाद आगरी, अजय चंदोला, आरपी कांडपाल, मनोज लोहनी आदि मौजूद रहे।
बोले लोक कलाकार
प्रदेश में लोक संस्कृति के वाहक लोक कलाकारों की ऐसी अनदेखी कभी नहीं हुई। एक साल से कार्यक्रमों का भुगतान नहीं हुआ है। ऐसे में कलाकार और सांस्कृतिक दल आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। सरकार को हमारी परेशानी गंभीरता से दूर करनी चाहिए। - गोपाल सिंह चम्याल, प्रदेश उपाध्यक्ष, लोक कलाकार महासंगठन, अल्मोड़ा।
कलाकारों को उनके कार्यक्रम का बहुत कम मेहनताना मिलता है लेकिन वह भी एक साल से नहीं मिला है। ऐसे में लोक कलाकारों और लोक संस्कृति को सहेजने के सभी दावे-खोखले साबित हो रहे हैं। - रमेश लाल, लोक कलाकार।
एक साल से न तो कार्यक्रमों का भुगतान हुआ है और न ही कलाकारों को पेंशन मिली है। ऐसे में वह कैसे लोक संस्कृति को बचाने में सहयोग दे पाएंगे। सरकार को इसकी चिंता ही नहीं है। - दयानंद कठैत, लोक कलाकार।
यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि लोक संस्कृति के वाहक लोक कलाकार सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर हैं। सरकार की अनदेखी से लोक कलाकार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं, इस पर सरकार को गंभीरता दिखानी होगी। - ममता वाणी भट्ट, प्रदेश उपाध्यक्ष, लोक कलाकार महासंगठन, अल्मोड़ा।
कलाकारों के भुगतान के लिए विभाग को बजट नहीं मिला है। इस बारे में शासन को अवगत कराया गया है। बजट मिलते ही उन्हें भुगतान कर दिया जाएगा। - डॉ. चंद्र सिंह चौहान, प्रभारी निदेशक, संग्रहालय, अल्मोड़ा।