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Almora News: जागेश्वर की ऐरावत गुफा बनेगी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र
Wed, 23 Apr 2025 11:45 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Wed, 23 Apr 2025 11:45 PM IST
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अल्मोड़ा। जागेश्वरधाम के निकट स्थित प्राचीन ऐरावत गुफा विकसित होकर पर्यटकों के आकर्षण केंद्र बनेगी। जिलाधिकारी आलोक कुमार पांडेय ने बुधवार को जागेश्वर पहुंचकर इस गुफा का स्थलीय निरीक्षण करते हुए इसे नए पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की संभावना तलाशी। इसे विकसित करने की योजना तैयार करने के निर्देश लोक निर्माण विभाग को दिए।
निरीक्षण के दौरान डीएम पांडेय ने कहा कि ऐरावत गुफा को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि इसे विकसित किया जाएगा ताकि पर्यटकों और श्रद्धाुओं को आकर्षित किया जा सके। पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ेगी तो क्षेत्रवासियों की आजीविका बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि जागेश्वरधाम और उसके आसपास के क्षेत्रों को विकसित करने के लिए मुख्यमंत्री भी प्रयासरत हैं। जिलाधिकारी ने मौके पर ही लोक निर्माण विभाग की अधिशाषी अभियंता को निर्देश दिए कि ऐरावत गुफा स्थल को विकसित करने का कार्य किया जाए। उन्होंने गुफा तक पहुंच मार्ग बनाने के साथ ही स्थल सौंदर्यीकरण, गुफा के ध्यान केंद्रों का डिजाइन व कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान उनके साथ जागेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति के उपाध्यक्ष नवीन भट्ट, लोनिवि की ईई ऋचा भट्ट, तहसीलदार बरखा जलाल, पुजारी प्रतिनिधि नवीन चंद्र भट्ट आदि मौजूद रहे।
डीएम ने ट्रैकिंग कर नैसर्गिक सौंदर्य निहारा
जागेश्वर। जागेश्वर क्षेत्र के भ्रमण के दौरान डीएम आलोक कुमार पांडेय ने जटा गंगा के उद्गम स्थल का भी निरीक्षण किया और यहां सुधारात्मक कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जागेश्वर से जटा गंगा के उद्गम स्थल तक अच्छा ईको ट्रैक के रूप में विकसित किया जाएगा। इस दौरान डीएम ने इस ट्रैक पर ट्रैकिंग करते हुए प्राकृतिक सुंदरता का अवलोकन किया।
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संतों का ध्यान केंद्र रही गुफा
जागेश्वर। जागेश्वरधाम से करीब एक किमी दूर प्राचीन गुफा है जो ऐरावत गुफा के नाम से प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि प्राचीन समय में इस गुफा में संत और तपस्वी ध्यान लगाते थे। इस गुफा के जीर्णोद्धार की मांग काफी समय से चल रही है। कई लोग आज भी इस गुफा को देखने पहुंचते हैं। यह गुफा एक विशाल चट्टान में स्थित हैजिसमें ऐरावत हाथी और इंद्र के वाहन जैसी छवि प्रतीत होती है। इसी कारण इसका नाम ऐरावत गुफा पड़ा है।
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निरीक्षण के दौरान डीएम पांडेय ने कहा कि ऐरावत गुफा को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि इसे विकसित किया जाएगा ताकि पर्यटकों और श्रद्धाुओं को आकर्षित किया जा सके। पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ेगी तो क्षेत्रवासियों की आजीविका बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि जागेश्वरधाम और उसके आसपास के क्षेत्रों को विकसित करने के लिए मुख्यमंत्री भी प्रयासरत हैं। जिलाधिकारी ने मौके पर ही लोक निर्माण विभाग की अधिशाषी अभियंता को निर्देश दिए कि ऐरावत गुफा स्थल को विकसित करने का कार्य किया जाए। उन्होंने गुफा तक पहुंच मार्ग बनाने के साथ ही स्थल सौंदर्यीकरण, गुफा के ध्यान केंद्रों का डिजाइन व कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान उनके साथ जागेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति के उपाध्यक्ष नवीन भट्ट, लोनिवि की ईई ऋचा भट्ट, तहसीलदार बरखा जलाल, पुजारी प्रतिनिधि नवीन चंद्र भट्ट आदि मौजूद रहे।
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डीएम ने ट्रैकिंग कर नैसर्गिक सौंदर्य निहारा
जागेश्वर। जागेश्वर क्षेत्र के भ्रमण के दौरान डीएम आलोक कुमार पांडेय ने जटा गंगा के उद्गम स्थल का भी निरीक्षण किया और यहां सुधारात्मक कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जागेश्वर से जटा गंगा के उद्गम स्थल तक अच्छा ईको ट्रैक के रूप में विकसित किया जाएगा। इस दौरान डीएम ने इस ट्रैक पर ट्रैकिंग करते हुए प्राकृतिक सुंदरता का अवलोकन किया।
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संतों का ध्यान केंद्र रही गुफा
जागेश्वर। जागेश्वरधाम से करीब एक किमी दूर प्राचीन गुफा है जो ऐरावत गुफा के नाम से प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि प्राचीन समय में इस गुफा में संत और तपस्वी ध्यान लगाते थे। इस गुफा के जीर्णोद्धार की मांग काफी समय से चल रही है। कई लोग आज भी इस गुफा को देखने पहुंचते हैं। यह गुफा एक विशाल चट्टान में स्थित हैजिसमें ऐरावत हाथी और इंद्र के वाहन जैसी छवि प्रतीत होती है। इसी कारण इसका नाम ऐरावत गुफा पड़ा है।