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हिमालयी फोरम बनाने की तैयारी
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Sat, 05 Nov 2016 11:46 PM IST
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हिमालयी फोरम बनाने की तैयारी
- फोटो : अमर उजाला
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अल्मोड़ा। सेंटर फार मीडिया स्टडीज (सीएमएस) के सहयोग से जीबी पंत संस्थान में क्लाइमेंट चेंज पर चल रही तीन दिवसीय कार्यशाला शनिवार को संपन्न हो गई। अंतिम दिन विशेषज्ञों ने उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर आदि सभी हिमालय राज्यों के लिए हिमालयी फोरम बनाने की मांग रखी है।
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हिमालयन फोरम कैसे बनेगा, उसका स्वरूप कैसा होगा, इसकी प्रारंभिक रूपरेखा भी तय हुई। इसके अलावा विज्ञान से जुड़े संस्थानों को अपनी सूचना कैसे ज्यादा से ज्यादा और सरल ढंग से लोगों तक पहुंचा सके, इसके लिए भी कार्य करने पर जोर दिया गया।
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अंतिम दिन विशेषज्ञों ने कहा कि साइंस कम्युनिकेशन नीति बननी चाहिए, जिससे बेहतर ढंग से इससे जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग हो सके। इतिहासकार डा. शेखर पाठक ने कहा कि 2013 में आपदा आई थी, तो केवल केदारनाथ केंद्र में रहा। लेकिन, उस साल हिमाचल से लेकर नेपाल तक में भारी तबाही हुई थी।
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वहां के बारे में ज्यादा बातें सामने नहीं आईं। इसके अलावा केदारनाथ आपदा के लिए बांध कितने दोषी थे? उसकी बात कही गई, करीब तीन साल बाद भी इसके उत्तर की तलाश है। उत्तराखंड मुक्त विवि के भूपेन सिंह ने मीडिया की भूमिका को लेकर बात रखी।
अंत में तय हुआ कि विज्ञान क्षेत्र में कार्य करने वाले संस्थान जो भी रिसर्च आदि करते हैं, वह आम जनता तक पहुंचने के साथ लोग आसानी से समझ भी सकें, इसके लिए रिसर्च पेपर के साथ एक सरल और सहज भाषा में नोट तैयार करें।
इसके अलावा सभी हिमालयी राज्यों का एक फोरम बने। जो निश्चित अवधि में चुनौतियों और विशेषज्ञों को लेकर आपस विचार- विमर्श करें, जिसके बाद जनता तक क्लाइमेंट चेंज हो या कोई और विषय, उसे पहुंचाया जा सके। जीबी पंत इंस्टीट्यूट आफ हिमालयन इनवायरमेंट एंड डेवलपमेंट के निदेशक डा. पीपी ध्यानी ने कहा कि फोरम बनाने का विचार समसामयिक है, इसमें संस्थान अगुवाई करेगा।
इससे पूर्व सीएमएस संस्था को अन्य जगहों से इनपुट लेकर और फोरम के स्वरूप, कार्य आदि की संस्तुतियों को भेजे, जिसके बाद संस्थान आगे की कार्र्यवाही की जाएगी। इस दौरान वैज्ञानिक आरसी सुंदरियाल, सुब्रत शर्मा, सीएमएस संस्था के दिनेश शर्मा, अनु आनंद, इलिना रॉय आदि मौजूद थे।