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पेड़ के गिरने की आशंका से लोग भयभीत

Sat, 03 Sep 2016 11:35 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला रानीखेत (अल्मोड़ा)।
ब्यूरो, अमर उजाला रानीखेत (अल्मोड़ा)। Updated Sat, 03 Sep 2016 11:35 PM IST
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People are afraid of the possibility of falling tree
इसी पेड़ के गिरने की आशंका से भयभीत हैं लोग - फोटो : अमर उजाला

रानीखेत (अल्मोड़ा)। धूप और बारिश में कभी लोगों को सुकून पहुंचाने वाला तुन का 120 साल पुराना सूखा दरख्त अब लोगों के लिए मुसीबत का सबब बना हुआ है। पेड़ की जड़ें खोखली हो चुकी हैं, हल्की आंधी में भी इसके गिरने की आशंका बनी हुई है।

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बिंता के सुरना गांव स्थित इस पेड़ के एक तरफ प्राइमरी स्कूल है, जबकि दूसरी तरफ प्रख्यात ग्वेल देवता का मंदिर है, जहां वर्षभर कार्यक्रम होते हैं। इसे कटवाने के लिए प्रशासन और विभागीय अधिकारी भी सार्थक कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
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तुन के इस पुराने दरख्त की ऊंचाई 35 मीटर है, जबकि इसकी शाखाएं 25 से 30 मीटर क्षेत्र में फैली हुई हैं। एक तरफ प्राइमरी विद्यालय है तो दूसरी तरफ ग्वेल देवता का प्रख्यात मंदिर जहां वर्ष भर कीर्तन-भजनों के अलावा अश्विन नवरात्र में मेले जैसा माहौल रहता है।
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प्राथमिक विद्यालय के बच्चे सर्दियों में आंगन में बैठकर पढ़ाई करते हैं। प्रधान लाल सिंह ने बताया कि जब यह पेड़ हरा भरा था तब खेतों में काम कर लौटने वाली महिलाएं पेड़ की छांव बैठकर थकान मिटाती थीं, जबकि बारिश में भी यह लोगों के लिए छतरी का काम करता था।

विद्यालय के बच्चे इस पेड़ के सहारे लुका छिपी का खेल खेलते थे। लंबे समय से यह पेड़ सूख चुका है, जड़ें पूरी तरह से खोखली हो चुकी हैं। हल्की आंधी में ही इसके गिरने की आशंका बनी हुई है। यदि अचानक कभी यह पेड़ गिर गया तो जान-माल का बड़ा नुकसान हो सकता है।


कई बार इसे कटवाने के लिए डीएम और वन विभाग के अधिकारियों से गुहार लगाई गई, लेकिन अधिकारी मौखिक रूप से इसे काटने की बात कह देते हैं, लिखित में कोई नहीं देता। मंदिर से जुड़े प्रताप सिंह रावत और दुकानदार हरी सिंह ने कहा कि यदि ग्रामीण इसे काटते हैं कि तो कई कानूनों में घिर जाएंगे। प्रशासन को इस संबंध में सार्थक कदम उठाकर इसे कटवाना चाहिए और ग्रामीणों को राहत दिलानी चाहिए।
 

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