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पालड़ी का लाल सूरज अखनूर में शहीद
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Mon, 03 Dec 2018 12:07 AM IST
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शहीद सूरज सिंह भाकुनी।
- फोटो : अमर उजाला
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आठ कुमाऊं रेजीमेंट में तैनात पालड़ी गांव के सूरज सिंह भाकुनी शनिवार शाम एक धमाके में जम्मू-कश्मीर के अखनूर सेक्टर में शहीद हो गए। सूरज सिंह की शहादत की खबर सुनते ही गांव और आसपास के क्षेत्र में मातम छा गया। सूरज नवंबर में एक माह की छुट्टी पर घर आए थे और एक हफ्ते पहले ही 25 नवंबर को डयूटी पर लौटे थे। वह सूरज पांच भाई बहनों में तीसरे नंबर के और अविवाहित थे।
सात जुलाई 1995 को भनोली तहसील के पालड़ी में गांव में नारायण सिंह भाकुनी और सीता देवी के घर जन्मे सूरज सिंह ने बचपन से ही सेना में जाने का मन बना लिया था। इंटरमीडिएट तक की परीक्षा गांव में करने के बाद सूरज बीए की पढ़ाई के लिए अल्मोड़ा आ गए थे। एसएसजे परिसर में बीए की पढ़ाई के दौरान ही वर्ष 2014 में उनका आर्मी में सेलेक्शन हो गया। रानीखेत में ट्रेनिंग लेने के बाद सूरज की पहली ज्वॉइनिंग जम्मू के उड़ी सेक्टर में हुई। फिर बटालियन तीन साल लखनऊ में रही। इधर, एक साल पहले ही बटालियन जम्मू आ गई थी। सूरज इस साल एक-एक माह की छुट्टी लेकर दो बार घर आ चुके थे। इस बीच एक माह की छुट्टी काटकर वह 25 नवंबर को बटालियन लौटे थे। वहां जाने के बाद ही वह शहीद हो गए।
सूरज सिंह की शहादत की खबर शनिवार शाम को गांव में सबसे पहले उनके चाचा महासिंह को मिली। बटालियन के अधिकारियों ने बाद में उनके पिता को भी जानकारी दी। जानकारी मिलने के बाद गांव में भी शोक की लहर छा गई। इधर प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार सूरज का पार्थिव शरीर सोमवार को यहां लाया जाएगा। उसके बाद राजकीय सम्मान और सैन्य सम्मान के साथ उनको अंतिम विदाई दी जाएगी।
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सात जुलाई 1995 को भनोली तहसील के पालड़ी में गांव में नारायण सिंह भाकुनी और सीता देवी के घर जन्मे सूरज सिंह ने बचपन से ही सेना में जाने का मन बना लिया था। इंटरमीडिएट तक की परीक्षा गांव में करने के बाद सूरज बीए की पढ़ाई के लिए अल्मोड़ा आ गए थे। एसएसजे परिसर में बीए की पढ़ाई के दौरान ही वर्ष 2014 में उनका आर्मी में सेलेक्शन हो गया। रानीखेत में ट्रेनिंग लेने के बाद सूरज की पहली ज्वॉइनिंग जम्मू के उड़ी सेक्टर में हुई। फिर बटालियन तीन साल लखनऊ में रही। इधर, एक साल पहले ही बटालियन जम्मू आ गई थी। सूरज इस साल एक-एक माह की छुट्टी लेकर दो बार घर आ चुके थे। इस बीच एक माह की छुट्टी काटकर वह 25 नवंबर को बटालियन लौटे थे। वहां जाने के बाद ही वह शहीद हो गए।
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सूरज सिंह की शहादत की खबर शनिवार शाम को गांव में सबसे पहले उनके चाचा महासिंह को मिली। बटालियन के अधिकारियों ने बाद में उनके पिता को भी जानकारी दी। जानकारी मिलने के बाद गांव में भी शोक की लहर छा गई। इधर प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार सूरज का पार्थिव शरीर सोमवार को यहां लाया जाएगा। उसके बाद राजकीय सम्मान और सैन्य सम्मान के साथ उनको अंतिम विदाई दी जाएगी।
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