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... तो क्या मकसद था एक करोड़ फूंकने का
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Tue, 19 Jan 2016 10:15 PM IST
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सरकारी धन की बर्बादी और बंदरबांट का इससे बड़ा उदाहरण और क्या हो सकता है। जौरासी मोटर मार्ग में अगनेरी के निकट करीब एक करोड़ रुपये की लागत से बने आपुण बाजार की कोई सुध लेने वाला नहीं है। हालात यह है कि किसानों को बाजार उपलब्ध कराने के मकसद से बनाए गए भवन का दो साल बाद भी उपयोग नहीं हो पाया है।
किसानों को बाजार उपलब्ध कराने के मकसद से जौरासी मोटर मार्ग में अगनेरी के निकट ग्राम पंचायत नागाड़ की सरहद में गधेरे के एकदम निकट मंडी परिषद द्वारा बनाए गए आपुण बाजार वीरान पड़ा है। आपुण बाजार में दुकानें, विशालकाय टीन शेड भवन, शौचालय, कार्यालय के साथ ही बोरिंग से पेयजल आदि की व्यवस्था की गई है। परंतु निर्माण के करीब दो साल बाद भी किसी ने भवन की सुध लेने की नहीं सोची।
स्थानीय कृषकों का कहना है कि यदि अधिकारियों को किसानों के लिए कुछ करने की चिंता होती तो अब तक किसानों के हित में भवन का कुछ न कुछ उपयोग हो गया होता। बहरहाल करीब एक करोड़ की लागत से बने भवन का यह हाल देखकर हर कोई हैरान है। लोगों की समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर इन हालातों में उत्तराखंड प्रदेश का क्या होगा।
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किसानों को बाजार उपलब्ध कराने के मकसद से जौरासी मोटर मार्ग में अगनेरी के निकट ग्राम पंचायत नागाड़ की सरहद में गधेरे के एकदम निकट मंडी परिषद द्वारा बनाए गए आपुण बाजार वीरान पड़ा है। आपुण बाजार में दुकानें, विशालकाय टीन शेड भवन, शौचालय, कार्यालय के साथ ही बोरिंग से पेयजल आदि की व्यवस्था की गई है। परंतु निर्माण के करीब दो साल बाद भी किसी ने भवन की सुध लेने की नहीं सोची।
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स्थानीय कृषकों का कहना है कि यदि अधिकारियों को किसानों के लिए कुछ करने की चिंता होती तो अब तक किसानों के हित में भवन का कुछ न कुछ उपयोग हो गया होता। बहरहाल करीब एक करोड़ की लागत से बने भवन का यह हाल देखकर हर कोई हैरान है। लोगों की समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर इन हालातों में उत्तराखंड प्रदेश का क्या होगा।
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