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अब बैंकों में नहीं लग रही भीड़, एटीएम में भी कम हुई कतारें
अमर उजाला ब्यूरो अल्मोड़ा
Updated Wed, 23 Nov 2016 11:56 PM IST
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एसबीआई की मुख्य शाखा में लाइन में खड़े ग्राहक।
- फोटो : अमर उजाला
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नोटबंदी के बाद से हर रोज सैकड़ों की संख्या में बैंक पहुंचने वाले लोगों की संख्या अब सीमित हो गई है, जिससे बैंकों में भीड़ कम हो गई है। एटीएम में अभी भी भीड़ लग रही है, लेकिन पहले की तरह लोगों की लंबी लाइनें कम ही दिखाई दी। इधर बाजार ने भी अब थोड़ा बहुत रफ्तार पकड़नी शुरू कर दी है।
बुधवार को नगर के सभी बैंकों में लोगों की भीड़ काफी कम रही। छोटी करेंसी बीस और पचास के नोट मिलने पर लोग खुश भी दिखाई दिए। दो हजार के नोट के साथ पांच सौ का नया नोट नहीं मिलने से कई मायूस भी नजर आए। एसबीआई, पीएनबी, सेंट्रल बैंक, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई, अरबन को आपरेटिव समेत विभिन्न बैंकों की शाखाओं में ग्राहक सुबह से आते रहे। काउंटरों में भी आठ दस लोगों की लाइन ही लगी दिखाई दी। इससे बैंक कर्मियों को भी कामकाज में ज्यादा परेशानी नहीं झेलनी पड़ी।
एटीएम में लोग रोज की तरह कतार में लगे रहे। लोगों पहले की तरह लंबा इंतजार नहीं करना पड़ा।
नोटबंदी की मार से परेशान व्यापारियों को भी अब थोड़ा बहुत राहत मिलने लगी है। बैंकों से सौ रुपए और छोटी करेंसी आने से नकद में काम होने लगा है। छोटे व्यापारी भी सामान नकद में देने लगे हैं। हालांकि ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की परेशानियां अभी कम नहीं हुई हैं। ग्रामीणों द्वारा हर साल अक्तूबर, नवंबर माह में काफी मात्रा में मौसमी फसल और दाल मंडियों में पहुंचाया जाता है लेकिन नोट बंदी के बाद इस बार ग्रामीण अभी तक मंडियों तक अपने खेत का अनाज नहीं पहुंचा सके हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के कई बैंकों के एटीएम में पैसा नहीं होने से ग्रामीणों को शहर की ओर आने को मजबूर होना पड़ रहा है।
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बुधवार को नगर के सभी बैंकों में लोगों की भीड़ काफी कम रही। छोटी करेंसी बीस और पचास के नोट मिलने पर लोग खुश भी दिखाई दिए। दो हजार के नोट के साथ पांच सौ का नया नोट नहीं मिलने से कई मायूस भी नजर आए। एसबीआई, पीएनबी, सेंट्रल बैंक, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई, अरबन को आपरेटिव समेत विभिन्न बैंकों की शाखाओं में ग्राहक सुबह से आते रहे। काउंटरों में भी आठ दस लोगों की लाइन ही लगी दिखाई दी। इससे बैंक कर्मियों को भी कामकाज में ज्यादा परेशानी नहीं झेलनी पड़ी।
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एटीएम में लोग रोज की तरह कतार में लगे रहे। लोगों पहले की तरह लंबा इंतजार नहीं करना पड़ा।
नोटबंदी की मार से परेशान व्यापारियों को भी अब थोड़ा बहुत राहत मिलने लगी है। बैंकों से सौ रुपए और छोटी करेंसी आने से नकद में काम होने लगा है। छोटे व्यापारी भी सामान नकद में देने लगे हैं। हालांकि ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की परेशानियां अभी कम नहीं हुई हैं। ग्रामीणों द्वारा हर साल अक्तूबर, नवंबर माह में काफी मात्रा में मौसमी फसल और दाल मंडियों में पहुंचाया जाता है लेकिन नोट बंदी के बाद इस बार ग्रामीण अभी तक मंडियों तक अपने खेत का अनाज नहीं पहुंचा सके हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के कई बैंकों के एटीएम में पैसा नहीं होने से ग्रामीणों को शहर की ओर आने को मजबूर होना पड़ रहा है।
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