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न शासन की परवाह न सीएम के फरमान का खौफ
ब्यूरो /अमर उजाला, चौखुटिया (अल्मोड़ा)।
Updated Sun, 15 Nov 2015 12:53 AM IST
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लगता है कि लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को न शासन के फरमानों का खौफ है और न ही सीएम के सख्त निर्देशों की परवाह।
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मुख्यमंत्री हरीश रावत ने खुद सड़क का कार्य गैरसैंण विधानसभा सत्र तक पूरा करने को कहा था, लेकिन बार-बार के सख्त निर्देशों के बावजूद वर्तमान में तेरह किलोमीटर की सड़क में कार्य एक तरह से ठप है शनिवार को सिर्फ एक स्थान पर गिनती के मजदूर काम करते दिखाई दिए।
चौखुटिया-मासी सड़क के पुनर्निर्णाण कार्य की धीमी गति ने लोगों को रुलाकर रख दिया है। हालात यह है कि कदम दर कदम पर हादसे को दावत देती इस सड़क से वाहनों की आवाजाही काफी कम हो चुकी है। जरूरी कार्य से सफर करने वाले लोग दोबारा इस सड़क से नहीं आने की कसम खाकर लौट जाते हैं। 13 किलोमीटर का सपर तय करने में एक घंटे से भी अधिक का समय लगता है।
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बीते दिनों विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने सड़क की धीमी कार्य गति को लेकर संबंधित अधिकारियों को लताड़ लगाई थी।
सीएम हरीश रावत के गांव मोहनरी में आयोजित जनता दरबार में भी यह मामला जोरों से उठा था। सीएम ने अधिकारियों को चेतावनी भी दी थी परंतु इस सब के बावजूद अधिकारियों की कार्य को जल्द पूरा कराने में कोई दिलचस्पी नहीं है।
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शनिवार को इस सड़क के निर्माण कार्य के लिए पटलगांव के निकट एक जेसीबी और गिनती के चार मजदूर कार्य करते दिखाई दिए इसके अलावा कहीं कोई मजदूर काम पर नहीं थे।
इस पर भी कछुआ चाल से हो रहे आधे अधूरे कार्य के चलते सड़क पर बिछाए गए पत्थर जानलेवा तो हैं ही साथ ही कई स्थानों पर नालियों के निकट हो रहे धंसाव और बीच में छोड़ दिए गए स्कबर के गड्ढे बड़ी दुर्घटना को दावत देते दिख रहे हैं।
परंतु कभी त्यौहार तो कभी ठंड आदि का बहाना बनाकर लेटलतीफी पर उतर आए सिस्टम को न तो जन सुविधाओं की परवाह है और न ही सीएम और विधानसभा स्पीकर के आदेशों की।